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circa 605–538 BC

The Babylonian Exile

Jerusalem falls and the temple burns; Ezekiel and Daniel minister among the exiles as Lamentations mourns the city's ruin.

1,784 वचन · 3 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. विलापगीत ४:१६लगभग ५८८ ई.पू.

    उन्हें तो याहवेह ने ही इस तरह बिखरा दिया है; अब वे याहवेह के कृपापात्र नहीं रह गए. न तो पुरोहित ही सम्मान्य रह गए हैं, और न ही पूर्वज किसी कृपा के योग्य.

  2. विलापगीत ४:१७लगभग ५८८ ई.पू.

    हमारे नेत्र दृष्टिहीन हो गए, सहायता की आशा व्यर्थ सिद्ध हुई; हमने उस राष्ट्र से सहायता की आशा की थी, जिसमें हमारी सहायता की क्षमता ही न थी.

  3. विलापगीत ४:१८लगभग ५८८ ई.पू.

    उन्होंने इस रीति से हमारा पीछा करना प्रारंभ कर दिया, कि मार्ग पर हमारा आना-जाना दूभर हो गया; हमारी मृत्यु निकट आती गई, हमारा जीवनकाल सिमटता चला गया, वस्तुतः हमारा जीवन समाप्‍त ही हो गया था.

  4. विलापगीत ४:१९लगभग ५८८ ई.पू.

    वे, जो हमारा पीछा कर रहे थे, उनकी गति आकाशगामी गरुड़ों से भी द्रुत थी; उन्होंने पर्वतों तक हमारा पीछा किया और निर्जन प्रदेश में वे हमारी घात में रहे.

  5. विलापगीत ४:२०लगभग ५८८ ई.पू.

    याहवेह द्वारा अभिषिक्त, हमारे जीवन की सांस उनके फन्दों में जा फंसे. हमारा विचार तो यह रहा था, कि उनकी छत्रछाया में हम राष्ट्रों के मध्य निवास करते रहेंगे.

  6. विलापगीत ४:२१लगभग ५८८ ई.पू.

    एदोम की पुत्री, तुम, जो उज़ देश में निवास करती हो, हर्षोल्लास में मगन हो जाओ. प्याला तुम तक भी पहुंचेगा; तुम मदोन्मत्त होकर पूर्णतः निर्वस्त्र हो जाओगी.

  7. विलापगीत ४:२२लगभग ५८८ ई.पू.

    ज़ियोन की पुत्री, निष्पन्‍न हो गया तुम्हारी पापिष्ठता का दंड; अब वह तुम्हें निर्वासन में रहने न देंगे. किंतु एदोम की पुत्री, वह तुम्हारी पापिष्ठता को दंडित करेंगे, वह तुम्हारे पाप प्रकट कर सार्वजनिक कर देंगे.

  8. विलापगीत ५:१लगभग ५८८ ई.पू.

    याहवेह, स्मरण कीजिए हमने क्या-क्या सहा है; हमारी निंदा पर ध्यान दीजिए.

  9. विलापगीत ५:२लगभग ५८८ ई.पू.

    हमारा भाग अपरिचितों को दिया गया है, परदेशियों ने हमारे आवास अपना लिए हैं.

  10. विलापगीत ५:३लगभग ५८८ ई.पू.

    हम अनाथ एवं पितृहीन हो गए हैं, हमारी माताओं की स्थिति विधवाओं के सदृश हो चुकी है.

  11. विलापगीत ५:४लगभग ५८८ ई.पू.

    यह आवश्यक है कि हम पेय जल के मूल्य का भुगतान करें; जो काठ हमें दिया जाता है, उसका क्रय किया जाना अनिवार्य है.

  12. विलापगीत ५:५लगभग ५८८ ई.पू.

    वे जो हमारा पीछा कर रहे हैं, हमारे निकट पहुंच चुके हैं; हम थक चुके हैं, हमें विश्राम प्राप्‍त न हो सका है.

  13. विलापगीत ५:६लगभग ५८८ ई.पू.

    पर्याप्‍त भोजन के लिए हमने मिस्र तथा अश्शूर की अधीनता स्वीकार कर ली है.

  14. विलापगीत ५:७लगभग ५८८ ई.पू.

    पाप तो उन्होंने किए, जो हमारे पूर्वज थे, और वे कूच कर गए अब हम हैं, जो उनकी पापिष्ठता का सम्वहन कर रहे हैं.

  15. विलापगीत ५:८लगभग ५८८ ई.पू.

    जो कभी हमारे दास थे, आज हमारे शासक बने हुए हैं, कोई भी नहीं, जो हमें उनकी अधीनता से विमुक्त करे.

  16. विलापगीत ५:९लगभग ५८८ ई.पू.

    अपने प्राणों का जोखिम उठाकर हम अपने भोजन की व्यवस्था करते हैं, क्योंकि निर्जन प्रदेश में तलवार हमारे पीछे लगी रहती है.

  17. विलापगीत ५:१०लगभग ५८८ ई.पू.

    दुर्भिक्ष की ऊष्मा ने हमारी त्वचा ऐसी कालिगर्द हो गई है, मानो यह तंदूर है.

  18. विलापगीत ५:११लगभग ५८८ ई.पू.

    ज़ियोन में स्त्रियां भ्रष्‍ट कर दी गई हैं, यहूदिया के नगरों की कन्याएं.

  19. विलापगीत ५:१२लगभग ५८८ ई.पू.

    शासकों को उनके हाथों से लटका दिया गया है; पूर्वजों को कोई सम्मान नहीं दिया जा रहा.

  20. विलापगीत ५:१३लगभग ५८८ ई.पू.

    युवाओं को चक्की चलाने के लिए बाध्य किया जा रहा है; किशोर लट्ठों के बोझ से लड़खड़ा रहे हैं.

  21. विलापगीत ५:१४लगभग ५८८ ई.पू.

    प्रौढ़ नगर प्रवेश द्वार से नगर छोड़ जा चुके हैं; युवाओं का संबंध संगीत से टूट चुका है.

  22. विलापगीत ५:१५लगभग ५८८ ई.पू.

    हमारे हृदय में अब कोई उल्लास न रहा है; नृत्य की अभिव्यक्ति अब विलाप हो गई है.

  23. विलापगीत ५:१६लगभग ५८८ ई.पू.

    हमारे सिर का मुकुट धूल में जा पड़ा है. धिक्कार है हम पर, हमने पाप किया है!

  24. विलापगीत ५:१७लगभग ५८८ ई.पू.

    परिणामस्वरूप हमारे हृदय रुग्ण हो गए हैं, इन्हीं से हमारे नेत्र धुंधले हो गए हैं

  25. विलापगीत ५:१८लगभग ५८८ ई.पू.

    इसलिये कि ज़ियोन पर्वत निर्जन हो चुका है, वहां लोमड़ियों को विचरण करते देखा जा सकता है.