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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ४२:१६लगभग १७०७ ई.पू.

    तुममें से कोई जाकर अपने भाई को यहां लेकर आओ; फ़रोह की शपथ, तब तक तुम सभी बंदी बनकर यहीं रहोगे, और तुमने कितना सच कहा है वह पता चल जायेगा.”

  2. उत्पत्ति ४२:१७लगभग १७०७ ई.पू.

    तब योसेफ़ ने उन्हें तीन दिन के लिए बंदीगृह में डाल दिया.

  3. उत्पत्ति ४२:१८लगभग १७०७ ई.पू.

    तीसरे दिन योसेफ़ ने उनसे कहा, “यदि जीवित रहना चाहते हो, तो तुम्हें यह करना होगा; क्योंकि मुझमें परमेश्वर का भय है:

  4. उत्पत्ति ४२:१९लगभग १७०७ ई.पू.

    यदि तुम सच्चे हो, तो तुममें से एक भाई कारागार में रहे और बाकी तुम लोग वापस घर जाओ और अपने परिवार को अकाल से बचाने के लिए अन्‍न ले जाओ.

  5. उत्पत्ति ४२:२०लगभग १७०७ ई.पू.

    और अपने छोटे भाई को यहां लेकर आना, ताकि वह तुम्हारे शब्दों को साबित कर सके और तुम्हारी मृत्यु न हो!” उन्होंने इस बात को माना.

  6. उत्पत्ति ४२:२१लगभग १७०७ ई.पू.

    तब वे आपस में बात करने लगे, “हम अपने भाई के प्रति दोषी हैं, क्योंकि जब वह हमसे लगातार दया मांगी, और उसके प्राणों की वेदना दिख रही थी, किंतु हमने ही अपना मन कठोर बना लिया था. यही कारण कि आज हम पर यह कष्ट आ पड़ा है.”

  7. उत्पत्ति ४२:२२लगभग १७०७ ई.पू.

    रियूबेन ने कहा, “क्या मैं नहीं कह रहा था, लड़के के विरुद्ध कोई अपराध मत करो? तुमने मेरी बात न सुनी. अब समय आ गया है; उसकी हत्या का बदला पाने का.”

  8. उत्पत्ति ४२:२३लगभग १७०७ ई.पू.

    उन्हें मालूम नहीं पड़ा कि योसेफ़ उनकी बात को समझ रहे थे.

  9. उत्पत्ति ४२:२४लगभग १७०७ ई.पू.

    योसेफ़ उनके सामने से अलग जाकर रोने लगे; फिर वापस आकर उन्होंने उन्हीं के सामने शिमओन को पकड़ा और बांध दिया.

  10. उत्पत्ति ४२:२५लगभग १७०७ ई.पू.

    फिर योसेफ़ ने आदेश दिया कि उनके बोरों को अन्‍न से भर दिया जाए और जो दाम दिया है, वह भी उसी के बोरे में रख दिया जाए. और योसेफ़ ने कहा कि उनकी यात्रा के लिए आवश्यक सामान भी उन्हें दे दिया जाए.

  11. उत्पत्ति ४२:२६लगभग १७०७ ई.पू.

    तब भाइयों ने अपने-अपने गधों पर अन्‍न के बोरे रखे और वहां से चल पड़े.

  12. उत्पत्ति ४२:२७लगभग १७०७ ई.पू.

    जब रास्ते में गधे को चारा देने के उद्देश्य से उनमें से एक ने बोरा खोला, तो उसे वही रुपया दिखा जिसे उसने उन्हें दिया था.

  13. उत्पत्ति ४२:२८लगभग १७०७ ई.पू.

    यह उसने अपने भाइयों को बताया, “मैंने जो रुपया दिया था वह मेरे बोरे में मिला है.” वे सभी आश्चर्य करने लगे. और कांपने लगे तथा एक दूसरे की ओर देखते हुए कहने लगे, “परमेश्वर ने हमारे साथ यह क्या कर दिया है?”

  14. उत्पत्ति ४२:२९लगभग १७०७ ई.पू.

    जब वे कनान देश में अपने पिता याकोब के पास पहुंचे, तब उन्होंने अपने पिता को पूरी घटना बताई.

  15. उत्पत्ति ४२:३०लगभग १७०७ ई.पू.

    और कहा, “उस देश का अधिपति हमसे कठोर होकर बात कर रहा था. उसने हमें अपने देश का जासूस समझा.

  16. उत्पत्ति ४२:३१लगभग १७०७ ई.पू.

    हमने उन्हें समझाया, ‘हम सच्चे लोग हैं; जासूस नहीं.

  17. उत्पत्ति ४२:३२लगभग १७०७ ई.पू.

    और बताया कि हम बारह भाई हैं, एक ही पिता की संतान. एक भाई अब जीवित नहीं रहा, तथा हमारा छोटा भाई पिता के साथ कनान देश में ही है.’

  18. उत्पत्ति ४२:३३लगभग १७०७ ई.पू.

    “उस देश के अधिपति ने हमसे कहा, ‘तुम्हारी सच्चाई तब प्रकट होगी जब तुम अपने भाइयों में से एक को मेरे पास छोड़कर जाओगे; और अब अकाल में अपने परिवारों के लिए अन्‍न लेकर जाओ.

  19. उत्पत्ति ४२:३४लगभग १७०७ ई.पू.

    जब तुम अपने छोटे भाई को मेरे पास लाओगे, तब मालूम पड़ेगा कि तुम जासूस नहीं हो, फिर मैं तुम्हारे भाई को छोड़ दूंगा और तुम इस देश में व्यापार कर सकोगे.’ ”

  20. उत्पत्ति ४२:३५लगभग १७०७ ई.पू.

    जब वे अपने-अपने बोरे खाली कर रहे थे, उन सभी ने देखा कि सबके बोरों में उनके रुपये की थैलियां रखी हुई है! जब उन्होंने तथा उनके पिता ने रुपये की थैली देखी, तब वे डर गए.

  21. उत्पत्ति ४२:३६लगभग १७०७ ई.पू.

    उनके पिता याकोब ने उनसे कहा, “तुम लोगों ने तो मुझसे मेरी संतान ही छीन ली है. योसेफ़ नहीं रहा और अब तुम लोग बिन्यामिन को ले जा रहे हो. यह सब मेरे विरुद्ध ही हो रहा है!”

  22. उत्पत्ति ४२:३७लगभग १७०७ ई.पू.

    रियूबेन ने अपने पिता को यह आश्वासन दिया, “अगर मैं बिन्यामिन को यहां वापस न लाऊं, तो आप मेरे दोनों पुत्रों की हत्या कर देना. आप बिन्यामिन को मेरे हाथों में सौंप दीजिए, मैं उसे वापस लाऊंगा.”

  23. उत्पत्ति ४२:३८लगभग १७०७ ई.पू.

    किंतु याकोब कहते रहे, “मेरा पुत्र तुम्हारे साथ न जाएगा; क्योंकि उसके भाई की मृत्यु हो ही चुकी है, इसलिये वह अकेला ही रह गया है. यदि इस यात्रा में उसके साथ कुछ अनर्थ हुआ तो तुम इस बुढ़ापे में मुझे घोर वेदना के साथ कब्र में नीचे उतारोगे.”

  24. उत्पत्ति ४३:१लगभग १७०७ ई.पू.

    देश में अब भी अकाल बहुत भयंकर था.

  25. उत्पत्ति ४३:२लगभग १७०७ ई.पू.

    जब उनके द्वारा मिस्र देश से लाया हुआ अन्‍न खत्म होने लगा, तब उनके पिता ने कहा, “जाओ, थोड़ा और अनाज खरीद कर लाओ.”