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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ४१:२३लगभग १७१५ ई.पू.

    तभी मैंने देखा कि कमजोर और मुरझाई, और पूर्वी वायु से झुलसी बालें उगीं.

  2. उत्पत्ति ४१:२४लगभग १७१५ ई.पू.

    तथा कमजोर बालों ने उन मोटी बालों को निगल लिया. मैंने अपने ज्योतिषियों से ये स्वप्न बताये, लेकिन अर्थ कोई नहीं बता पाया.”

  3. उत्पत्ति ४१:२५लगभग १७१५ ई.पू.

    तब योसेफ़ ने फ़रोह से कहा, “आपके दोनों स्वप्न एक ही हैं. इनमें परमेश्वर ने फ़रोह को बताया हैं कि परमेश्वर क्या करने जा रहे हैं.

  4. उत्पत्ति ४१:२६लगभग १७१५ ई.पू.

    सात सुंदर और मोटी गायें सात वर्ष हैं, सात अच्छी बालें भी सात वर्ष हैं; दोनों ही स्वप्न एक ही हैं.

  5. उत्पत्ति ४१:२७लगभग १७१५ ई.पू.

    कमजोर एवं कुरूप गायें, सात वर्ष हैं, और मुरझाई हुई बालें जो देखी वे भी सात वर्ष; वे अकाल के होंगे.

  6. उत्पत्ति ४१:२८लगभग १७१५ ई.पू.

    “जैसा मैंने फ़रोह को बताया, ठीक वैसा ही होगा; परमेश्वर ने आपको यह दिखा दिया है कि जल्दी ही क्या होनेवाला है.

  7. उत्पत्ति ४१:२९लगभग १७१५ ई.पू.

    मिस्र देश में सात वर्ष बहुत ही अच्छी फसल होगी,

  8. उत्पत्ति ४१:३०लगभग १७१५ ई.पू.

    और उसके बाद सात वर्ष का अकाल होगा. तब मिस्र देश के लोग सारी उपज को भूल जायेंगे, और अकाल से देश का नाश होगा.

  9. उत्पत्ति ४१:३१लगभग १७१५ ई.पू.

    अकाल इतना भयानक होगा कि अच्छी फसल और उपज किसी को याद तक नहीं रहेगी.

  10. उत्पत्ति ४१:३२लगभग १७१५ ई.पू.

    फ़रोह आपने एक ही बात के विषय दो बार स्वप्न देखे; यह इस बात को दिखाता है कि परमेश्वर निश्चय ही ऐसा होने देंगे और परमेश्वर जल्दी ही इसे पूरा करेंगे.

  11. उत्पत्ति ४१:३३लगभग १७१५ ई.पू.

    “इसलिये फ़रोह जल्दी किसी समझदार एवं बुद्धिमान व्यक्ति को मिस्र देश का अधिकारी बनाएं.

  12. उत्पत्ति ४१:३४लगभग १७१५ ई.पू.

    और फ़रोह सारे मिस्र देश में सर्वेक्षकों को नियुक्त करे और सात वर्ष जो अच्छी फसल और उपज का है, उस समय भूमि की उपज का पंचमांश इकट्ठा करें.

  13. उत्पत्ति ४१:३५लगभग १७१५ ई.पू.

    तब अच्छी फसल के सात वर्षों में सारी भोजन वस्तु एकत्रित की जाये और अनाज को फ़रोह के अधिकार में भंडार नगरों में सुरक्षित रखते जायें.

  14. उत्पत्ति ४१:३६लगभग १७१५ ई.पू.

    और यह भोजन सात वर्ष के अकाल से बचने के लिए पूरे मिस्र देश को देने के लिए इकट्ठा करे ताकि लोग भोजन के अभाव में नहीं मरें.”

  15. उत्पत्ति ४१:३७लगभग १७१५ ई.पू.

    फ़रोह तथा सब कर्मचारियों को लगा कि यह जवाबदारी योसेफ़ को ही दी जाये.

  16. उत्पत्ति ४१:३८लगभग १७१५ ई.पू.

    फ़रोह ने अपने सेवकों से पूछा, “क्या हमें ऐसा कोई व्यक्ति मिल सकता है जिसमें परमेश्वर का आत्मा हो?”

  17. उत्पत्ति ४१:३९लगभग १७१५ ई.पू.

    फिर फ़रोह ने योसेफ़ से कहा, “इसलिये कि परमेश्वर ने ही तुम पर यह सब प्रकट किया है, तुम यह जवाबदारी लो क्योंकि तुम जैसा समझदार तथा बुद्धिमान कोई नहीं.

  18. उत्पत्ति ४१:४०लगभग १७१५ ई.पू.

    और तुम मेरे महल के अधिकारी होंगे तथा मेरी प्रजा तुम्हारे ही आदेश का पालन करेगी. मैं सिंहासन पर बैठने के कारण राजा होकर तुमसे बड़ा रहूंगा.”

  19. उत्पत्ति ४१:४१लगभग १७१५ ई.पू.

    और फ़रोह ने योसेफ़ से कहा, “मैंने तुम्हें सारे मिस्र देश पर अधिकार दे दिया है.”

  20. उत्पत्ति ४१:४२लगभग १७१५ ई.पू.

    यह कहते हुए फ़रोह ने अपनी राजमुद्रा वाली अंगूठी उतारकर योसेफ़ को पहना दी, और मलमल के वस्त्र तथा गले में सोने की माला भी पहना दी.

  21. उत्पत्ति ४१:४३लगभग १७१५ ई.पू.

    फिर फ़रोह ने योसेफ़ को अपने दूसरे रथ में चढ़ाकर सम्मान दिया. रथों के आगे-आगे चल रहे अधिकारी बोल रहे थे, “घुटने टेको!” इस प्रकार फ़रोह ने योसेफ़ को संपूर्ण मिस्र का अधिकार सौंप दिया.

  22. उत्पत्ति ४१:४४लगभग १७१५ ई.पू.

    और फ़रोह ने योसेफ़ से कहा, “फ़रोह तो मैं हूं, किंतु अब से सारे मिस्र देश में बिना तुम्हारी आज्ञा के कोई भी न तो हाथ उठा सकेगा और न ही पांव.”

  23. उत्पत्ति ४१:४५लगभग १७१५ ई.पू.

    फ़रोह ने योसेफ़ का नया नाम ज़ाफेनाथ-पानियाह रखा तथा उनका विवाह ओन के पुरोहित पोतिफेरा की पुत्री असेनाथ से कर दिया. इस प्रकार अब योसेफ़ समस्त मिस्र देश के प्रशासक हो गए.

  24. उत्पत्ति ४१:४६लगभग १७१५ ई.पू.

    जब योसेफ़ को मिस्र के राजा फ़रोह के पास लाया गया, तब वे तीस वर्ष के थे. फ़रोह से अधिकार पाकर योसेफ़ समस्त मिस्र देश का निरीक्षण करने के लिए निकले.

  25. उत्पत्ति ४१:४७लगभग १७१५ ई.पू.

    पहले सात वर्षों में बहुत उपज हुई.