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circa 1900–1700 BC
Jacob, Joseph & Egypt
Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.
इस काल के वचन
- उत्पत्ति ४१:४८लगभग १७१५ ई.पू.
और योसेफ़ ने इन सात वर्षों में बहुत भोजन वस्तुएं जमा की, जो मिस्र देश में उत्पन्न हो रही थीं. वह सब अन्न योसेफ़ नगरों में जमा करते गए. जिस नगर के पास खेत था उसकी उपज वहीं जमा करते गए.
- उत्पत्ति ४१:४९लगभग १७१५ ई.पू.
इस तरह योसेफ़ ने सागर तट के बालू समान अनाज जमा कर लिया कि उसको गिनना ही छोड़ दिया, क्योंकि उपज असंख्य हो चुकी थी.
- उत्पत्ति ४१:५०लगभग १७१५ ई.पू.
इससे पहले कि अकाल के वर्ष शुरू हों, ओन के पुरोहित पोतिफेरा की पुत्री असेनाथ से योसेफ़ के दो पुत्र पैदा हुए.
- उत्पत्ति ४१:५१लगभग १७१५ ई.पू.
पहले बेटे का नाम योसेफ़ ने मनश्शेह रखा क्योंकि उन्होंने विचार किया, “परमेश्वर ने सभी कष्टों एवं मेरे पिता के परिवार को भुलाने में मेरी सहायता की है.”
- उत्पत्ति ४१:५२लगभग १७११ ई.पू.
उन्होंने दूसरे पुत्र का नाम एफ्राईम रखा, क्योंकि उनका कहना था, “दुःख मिलने की जगह इस देश में परमेश्वर ने मुझे फलवंत किया.”
- उत्पत्ति ४१:५३लगभग १७०८ ई.पू.
जब मिस्र देश में फसल के वे सात वर्ष खत्म हुए,
- उत्पत्ति ४१:५४लगभग १७०८ ई.पू.
तब अकाल के सात वर्षों की शुरुआत हुई, जैसा योसेफ़ ने कहा था. सभी देशों में अकाल था, किंतु मिस्र देश में अन्न की कोई कमी न थी.
- उत्पत्ति ४१:५५लगभग १७०८ ई.पू.
जब मिस्र देश में भोजन की कमी होने लगी तब लोग फ़रोह से भोजन मांगने लगे. फ़रोह ने मिस्र की प्रजा से कहा, “तुम योसेफ़ के पास जाओ. वह जो कुछ कहे, वही करना.”
- उत्पत्ति ४१:५६लगभग १७०८ ई.पू.
जब पूरे देश में अकाल पड़ा, तब योसेफ़ ने अपने भंडार खोलकर मिस्रवासियों को अन्न बेचना शुरू किया, क्योंकि अकाल भयानक था.
- उत्पत्ति ४१:५७लगभग १७०८ ई.पू.
पृथ्वी के अलग-अलग देश से लोग योसेफ़ से अन्न खरीदने आने लगे, क्योंकि सारी पृथ्वी पर अकाल भयंकर हो चुका था.
- उत्पत्ति ४२:१लगभग १७०७ ई.पू.
जब याकोब को यह पता चला कि मिस्र देश में अन्न मिल रहा है, तो उन्होंने अपने बेटों से कहा, “क्यों एक दूसरे का मुख ताक रहे हो?
- उत्पत्ति ४२:२लगभग १७०७ ई.पू.
मिस्र देश में अन्न मिल रहा है. जाओ और वहां से अन्न खरीद कर लाओ, कि हम जीवित रह सकें.”
- उत्पत्ति ४२:३लगभग १७०७ ई.पू.
तब योसेफ़ के दस भाई अन्न खरीदने मिस्र देश आये.
- उत्पत्ति ४२:४लगभग १७०७ ई.पू.
किंतु याकोब ने योसेफ़ के भाई बिन्यामिन को नहीं भेजा क्योंकि उन्हें यह डर था कि कहीं उस पर कोई कष्ट न आ पड़े.
- उत्पत्ति ४२:५लगभग १७०७ ई.पू.
इसलिये इस्राएल के पुत्र अन्न खरीदने मिस्र पहुंचे, क्योंकि कनान देश में भी अकाल था.
- उत्पत्ति ४२:६लगभग १७०७ ई.पू.
योसेफ़ मिस्र देश के प्रशासक थे. वही पूरे राष्ट्र को अन्न बेचते थे. योसेफ़ के भाई वहां पहुंचे और उनको प्रणाम किया और उनका मुह ज़मीन की ओर था.
- उत्पत्ति ४२:७लगभग १७०७ ई.पू.
योसेफ़ अपने भाइयों को देखते ही पहचान गए; लेकिन अनजान बनकर वह अपने भाइयों से कठोरता से बात कर रहे थे. योसेफ़ ने उनसे पूछा, “तुम लोग कहां से आए हो?” उन्होंने कहा, “कनान देश से, अन्न खरीदने के लिए आए हैं.”
- उत्पत्ति ४२:८लगभग १७०७ ई.पू.
योसेफ़ ने तो अपने भाइयों को पहचान लिया था, किंतु भाइयों ने उन्हें नहीं पहचाना था.
- उत्पत्ति ४२:९लगभग १७०७ ई.पू.
तब योसेफ़ को अपने स्वप्न याद आये, जो उन्होंने उनके विषय में देखे थे. उन्होंने अपने भाइयों से कहा, “तुम लोग भेदिए हो और तुम यहां हमारे देश की दुर्दशा देखने आए हो.”
- उत्पत्ति ४२:१०लगभग १७०७ ई.पू.
उन्होंने कहा, “नहीं, अधिपति महोदय, आपके ये सेवक अन्न खरीदने यहां आए हैं.
- उत्पत्ति ४२:११लगभग १७०७ ई.पू.
हम सभी एक ही पिता की संतान हैं. हम, सीधे और सच्चे लोग हैं, कोई जासूस नहीं.”
- उत्पत्ति ४२:१२लगभग १७०७ ई.पू.
योसेफ़ ने फिर भी उनसे कहा, “मैं नहीं मान सकता. तुम लोग अवश्य हमारे देश की दुर्दशा देखने आए हो!”
- उत्पत्ति ४२:१३लगभग १७०७ ई.पू.
किंतु वे बार-बार कहते रहे, “आपके ये सेवक बारह भाई हैं, जो एक ही पिता की संतान हैं, हम कनान के रहनेवाले हैं. हमारा छोटा भाई हमारे पिता के साथ ही है. हमारा एक भाई अब जीवित नहीं है.”
- उत्पत्ति ४२:१४लगभग १७०७ ई.पू.
योसेफ़ ने उनसे कहा, “कुछ भी हो, मैं जानता हूं कि तुम लोग जासूस ही हो!
- उत्पत्ति ४२:१५लगभग १७०७ ई.पू.
अब तुम्हें जांचने का एक ही तरीका हैं: फ़रोह के जीवन की शपथ, तुम्हारे छोटे भाई को यहां आना होगा.