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circa 1446 BC

Moses & The Exodus

God raises up Moses to confront Pharaoh; the ten plagues culminate in Israel's dramatic deliverance from four centuries of bondage.

415 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. निर्गमन १२:४२लगभग १४९१ ई.पू.

    जिस रात वे सब मिस्र से निकले वह रात उनके लिए विशेष रात कहलाई, यह याहवेह की महिमा की रात थी. जिसे, इस्राएल के सभी लोगों को तथा उनकी पूरी पीढ़ियों को, उस दिन को महत्व देना ज़रूरी था.

  2. निर्गमन १२:४३लगभग १४९१ ई.पू.

    याहवेह ने मोशेह एवं अहरोन को फ़सह का नियम समझाया: “इस्राएलियों के अलावा कोई भी परदेशी इस भोजन को न खाए.

  3. निर्गमन १२:४४लगभग १४९१ ई.पू.

    लेकिन जिस व्यक्ति को दाम देकर दास के रूप में खरीदा हो और उसका ख़तना कर लिया हो, वह व्यक्ति इस भोजन को खा सकता है.

  4. निर्गमन १२:४५लगभग १४९१ ई.पू.

    कोई भी परदेशी और मज़दूर इसमें शामिल न किया जाए.

  5. निर्गमन १२:४६लगभग १४९१ ई.पू.

    “खाना एक ही घर में रहकर खाया जाए, और मांस का कोई भी टुकड़ा घर के बाहर न ले जाया जाए और मेमने की हड्डी भी न तोड़ी जाए.

  6. निर्गमन १२:४७लगभग १४९१ ई.पू.

    सभी इस्राएली इस उत्सव में शामिल हों.

  7. निर्गमन १२:४८लगभग १४९१ ई.पू.

    “यदि कोई परदेशी मेहमान इस फ़सह में शामिल होना चाहता है तो, पहले सारे पुरुषों का ख़तना करके याहवेह के उस पर्व में उसे साथ लिया जा सकता है; तब वह उस देश के ही लोग समान हो जाएगा; लेकिन कोई भी बिना ख़तना किए इसमें शामिल न हो.

  8. निर्गमन १२:४९लगभग १४९१ ई.पू.

    नियम स्वदेशी और विदेशी सबके लिए एक जैसा ही हो.”

  9. निर्गमन १२:५०लगभग १४९१ ई.पू.

    सभी इस्राएलियों ने जैसा मोशेह तथा अहरोन को याहवेह ने आदेश दिया वैसा ही किया.

  10. निर्गमन १२:५१लगभग १४९१ ई.पू.

    यह वही दिन था, जब याहवेह ने इस्राएलियों को मिस्र देश से बाहर निकाला था.

  11. निर्गमन १३:१लगभग १४९१ ई.पू.

    फिर याहवेह ने मोशेह से कहा:

  12. निर्गमन १३:२लगभग १४९१ ई.पू.

    “मनुष्य एवं पशु की पहली संतान मेरे लिए अलग करो. सब बच्‍चे, जो इस्राएल में पहिलौठे हैं, चाहे मनुष्य के हों, या पशु के, उन सभी पर मेरा ही अधिकार होगा.”

  13. निर्गमन १३:३लगभग १४९१ ई.पू.

    मोशेह ने लोगों से कहा, “यह दिन याद रखना, जब तुम मिस्र से निकले थे—जब तुम ग़ुलामी में थे तब याहवेह ही ने अपने सामर्थ्यी हाथों द्वारा उस जगह से तुम्हें बाहर निकाला; इस कारण खमीर वाली कोई भी चीज़ न रखना.

  14. निर्गमन १३:४लगभग १४९१ ई.पू.

    अबीब के महीने में आज के दिन तुम निकले हो.

  15. निर्गमन १३:५लगभग १४९१ ई.पू.

    जब याहवेह तुम्हें तुम्हारे पूर्वजों से किए गए वायदे के अनुसार कनानी, हित्ती, अमोरी, हिव्वी तथा यबूसी जाति के देशों में पहुंचा देंगे, जहां दूध एवं मधु की धाराएं बहती हैं, तब तुम्हें इस दिन को मनाना ज़रूरी होगा.

  16. निर्गमन १३:६लगभग १४९१ ई.पू.

    सात दिन बिना खमीर की रोटी खाना और सातवें दिन याहवेह के लिए उत्सव का दिन होगा.

  17. निर्गमन १३:७लगभग १४९१ ई.पू.

    सातों दिन बिना खमीर की रोटी ही खाना. तुम्हारे बीच खमीर की कोई भी चीज़ न हो और पूरे देश से भी खमीर की कोई वस्तु न लाना.

  18. निर्गमन १३:८लगभग १४९१ ई.पू.

    तुम अपने बच्चों को भी सच्चाई बताना, ‘यह सब इसलिये किया जाता है, क्योंकि जब हम मिस्र देश से निकले तब याहवेह ने हमारे लिए यह सब किया था.’

  19. निर्गमन १३:९लगभग १४९१ ई.पू.

    इस कारण तुम्हें भी इस दिन को उतना ही मनाना और याद रखना होगा, और याहवेह के नियम और व्यवस्था को कभी नहीं भूलना. यह हमेशा अपने माथे पर याद कराने वाली बात ठहरे और तुम्हारे हाथ में एक चिन्ह होगा, क्योंकि याहवेह ने अपनी सामर्थ्य के द्वारा तुम्हें मिस्र देश से बाहर निकाला था.

  20. निर्गमन १३:१०लगभग १४९१ ई.पू.

    इस कारण हर वर्ष इस विधि का सही समय पर पालन करना.

  21. निर्गमन १३:११लगभग १४९१ ई.पू.

    “तब याहवेह पूर्वजों से किए गए वायदे के अनुसार तुम्हें कनानियों के देश में पहुंचा कर तुम्हें उसका अधिकार देंगे,

  22. निर्गमन १३:१२लगभग १४९१ ई.पू.

    तब घर की हर पहली संतान को याहवेह को अर्पित करना ज़रूरी होगा, हर पशु का भी पहिलौठा याहवेह का होगा. हर एक पहिलौठे नर पर परमेश्वर का अधिकार होगा.

  23. निर्गमन १३:१३लगभग १४९१ ई.पू.

    गधी के पहिलौठे के बदले में मेमने को अलग कर सकते हो, और अगर मेमना न देना चाहो तो गदही के पहिलौठे का गला तोड़ देना. पर हर एक पहिलौठे पुत्र का बदला देकर छुड़ाना.

  24. निर्गमन १३:१४लगभग १४९१ ई.पू.

    “जब, तुम्हारे पुत्र इसके बारे में तुमसे पूछें तब तुम बताना, ‘जब तुम गुलाम थे तब याहवेह ने कैसे अपनी सामर्थ्य से तुम्हें मिस्र देश से निकाला.

  25. निर्गमन १३:१५लगभग १४९१ ई.पू.

    मिस्र देश से फ़रोह हमें निकलने नहीं दे रहा था, तब याहवेह ने मिस्र देश में प्रत्येक पहिलौठे को मार दिया—चाहे वह मनुष्य का था या पशु का. इसलिये पशु के पहलौठे नर को याहवेह के लिए बलि करते हैं, किंतु मनुष्य के पहिलौठे को बदला देकर छुड़ा देते हैं.’