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circa 1446 BC

Moses & The Exodus

God raises up Moses to confront Pharaoh; the ten plagues culminate in Israel's dramatic deliverance from four centuries of bondage.

415 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. याकोब के साथ मिस्र में अपने-अपने घराने के साथ आकर रहनेवाले इस्राएलियों के नाम निम्न लिखित हैं:

  2. रियूबेन, शिमओन, लेवी और यहूदाह;

  3. इस्साखार, ज़ेबुलून तथा बिन्यामिन;

  4. दान एवं नफताली; गाद एवं आशेर.

  5. याकोब के वंश में सत्तर जन थे, योसेफ़ पहले ही मिस्र में थे.

  6. निर्गमन १:६लगभग १६३५ ई.पू.

    वहां योसेफ़ और उनके सभी भाई तथा पूरी पीढ़ी के लोगों की मृत्यु हो गई थी.

  7. निर्गमन १:७लगभग १६३५ ई.पू.

    इस्राएली बहुत फलवंत थे और वे बढ़ते चले गए, और बहुत सामर्थ्यी होकर पूरे देश में भर गए.

  8. निर्गमन १:८लगभग १६३५ ई.पू.

    फिर मिस्र में एक नया राजा बना, जो योसेफ़ को नहीं जानता था.

  9. निर्गमन १:९लगभग १६३५ ई.पू.

    उसने अपनी प्रजा से यह कहा, “इस्राएल के लोग संख्या में और बल में हमसे अधिक हैं.

  10. निर्गमन १:१०लगभग १६३५ ई.पू.

    इसलिये हम समझदारी से रहें, ये लोग तो बढ़ते जाएंगे! ऐसा न हो कि युद्ध की स्थिति में हमारे शत्रुओं के साथ मिलकर, हमसे ही युद्ध करने लगें और देश छोड़कर चले जाएं.”

  11. निर्गमन १:११लगभग १६३५ ई.पू.

    इस विचार से उन्होंने इस्राएलियों को कड़ी मेहनत कराने के उद्देश्य से ठेकेदार नियुक्त कर दिए. तब फ़रोह के लिए पिथोम तथा रामेसेस नामक भण्डारगृह नगरों को बनाए.

  12. निर्गमन १:१२लगभग १६३५ ई.पू.

    जितना इस्राएलियों को कष्ट दिया गया, उतने ही वे बढ़ते और देश में फैलते गए, इसलिये इस्राएली मिस्रवासियों के लिए डर का कारण बन गये.

  13. निर्गमन १:१३लगभग १६३५ ई.पू.

    मिस्री इस्राएलियों से कठोर मेहनत कराते रहे.

  14. निर्गमन १:१४लगभग १६३५ ई.पू.

    इस प्रकार मिस्रियों ने इस्राएलियों के जीवन को दुःखपूर्ण कर दिया. उन्हें गारे तथा ईंट के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी. सभी कामों में उन्हें दुःखी कर सताया जाता था.

  15. निर्गमन १:१५लगभग १६३५ ई.पू.

    यह देख मिस्र देश के राजा ने इब्री धायों को बुलवाया. इनमें एक का नाम शिफ्राह तथा दूसरी का पुआह था.

  16. निर्गमन १:१६लगभग १६३५ ई.पू.

    राजा ने उनसे कहा, “इब्री स्त्रियों का प्रसव कराते समय जैसे ही तुम्हें यह पता चली कि लड़का है, तुम उसकी हत्या कर देना; किंतु यदि वह पुत्री हो, तो उसे जीवित रहने देना.”

  17. निर्गमन १:१७लगभग १६३५ ई.पू.

    किंतु धायें परमेश्वर का भय मानने वालीं थीं. इस कारण उन्होंने राजा की बात नहीं मानी; वे पुत्रों को जीवित छोड़ती चली गईं.

  18. निर्गमन १:१८लगभग १६३५ ई.पू.

    इसलिये राजा ने धायों को बुलवाया और उनसे पूछा, “तुम ऐसा क्यों कर रही हो? क्यों लड़कों को जीवित छोड़ रही हो?”

  19. निर्गमन १:१९लगभग १६३५ ई.पू.

    उन्होंने फ़रोह को उत्तर दिया, “इब्री स्त्रियां मिस्री स्त्रियों के समान नहीं होती; वे हृष्ट-पुष्ट होती हैं, इसलिये हमारे पहुंचने से पहले ही प्रसव कर चुकी होती हैं.”

  20. निर्गमन १:२०लगभग १६३५ ई.पू.

    इस कारण परमेश्वर की दया उन धायों पर बनी रही, इस्राएली बढ़ते और शक्तिशाली होते गए.

  21. निर्गमन १:२१लगभग १६३५ ई.पू.

    धायों के मन में परमेश्वर का भय था, इस कारण परमेश्वर ने उनको अपने परिवार दिये.

  22. निर्गमन १:२२लगभग १५७३ ई.पू.

    फिर फ़रोह ने सब लोगों से कहा, “हर नवजात पुत्र को, जो तुम्हारे आस-पास जन्म लेता है, उन्हें नील नदी में फेंक दिया करना, किंतु पुत्री को जीवित रहने देना.”

  23. निर्गमन २:१लगभग १५७२ ई.पू.

    लेवी गोत्र के एक व्यक्ति ने लेवी गोत्र की एक कन्या से विवाह किया.

  24. निर्गमन २:२लगभग १५७१ ई.पू.

    उस कन्या ने गर्भधारण किया और एक बच्‍चे को जन्म दिया, और वह बहुत सुंदर था, उसने उसे तीन महीने तक छिपाए रखा.

  25. निर्गमन २:३लगभग १५७१ ई.पू.

    किंतु जब बच्‍चे को छिपाए रखना उसके लिए मुश्किल हो गया तब उसने एक टोकरी बनाई और उस पर तारकोल और पीच का लेप किया. उसने बच्‍चे को टोकरी में रख उस टोकरी को नील नदी के किनारे लंबी घासों के बीच में रख दिया.