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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 1 कोरिंथ १६:५लगभग ५९ ई.

    में मकेदोनिया यात्रा के बाद तुम्हारे पास आऊंगा क्योंकि मैं मकेदोनिया यात्रा की योजना बना रहा हूं.

  2. 1 कोरिंथ १६:६लगभग ५९ ई.

    संभवतः मैं आकर तुम्हारे साथ कुछ समय व्यतीत करूं या पूरी शीत ऋतु ही कि तुम मुझे मेरे आगे के सफर की ओर, मैं जहां कहीं जाऊं, विदा कर सको.

  3. 1 कोरिंथ १६:७लगभग ५९ ई.

    मैं नहीं चाहता कि तुमसे केवल चलते-चलते मिलूं परंतु मेरी आशा है कि यदि परमेश्वर चाहें तो मैं तुम्हारे साथ कुछ समय व्यतीत करूं.

  4. 1 कोरिंथ १६:८लगभग ५९ ई.

    मैं पेन्तेकॉस्त पर्व तक इफ़ेसॉस नगर में ही रहूंगा

  5. 1 कोरिंथ १६:९लगभग ५९ ई.

    क्योंकि मेरे लिए वहां उपयोगी सेवा का द्वार खुला है. इसके अतिरिक्त वहां मेरे अनेक विरोधी भी हैं.

  6. 1 कोरिंथ १६:१०लगभग ५९ ई.

    जब तिमोथियॉस वहां आए तो यह सुनिश्चित करना कि वह तुम्हारे साथ निश्चिंत रहे क्योंकि मेरे समान वह भी प्रभु के काम में जुड़ा है.

  7. 1 कोरिंथ १६:११लगभग ५९ ई.

    ध्यान रहे कि कोई उसे तुच्छ न समझे. उसे सकुशल विदा करना कि वह मेरे पास लौट आए. मैं अन्य भाइयों के साथ उसकी प्रतीक्षा में हूं.

  8. 1 कोरिंथ १६:१२लगभग ५९ ई.

    अब हमारे भाई अपोल्लॉस के संबंध में: मैंने उनसे बार-बार विनती की कि वह अन्य भाइयों के साथ तुम्हारे पास आएं किंतु वह इस समय यात्रा के लिए तैयार नहीं किंतु सही अवसर प्राप्‍त होते ही वह वहां आएंगे.

  9. 1 कोरिंथ १६:१३लगभग ५९ ई.

    जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, निडर बनो, निश्चय करो

  10. 1 कोरिंथ १६:१४लगभग ५९ ई.

    तथा हर एक काम प्रेम भाव में ही करो.

  11. 1 कोरिंथ १६:१५लगभग ५९ ई.

    स्तेफ़ानॉस के कुटुंबियों के विषय में तो तुम्हें मालूम ही है कि वे आखाया प्रदेश के पहले फल हैं. उन्होंने स्वयं को पवित्र लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया हुआ है. इसलिये प्रिय भाई बहनो, मेरी तुमसे विनती है

  12. 1 कोरिंथ १६:१६लगभग ५९ ई.

    कि तुम उनका तथा ऐसे व्यक्तियों का नेतृत्व स्वीकार करो, जो मेरे काम में सहायक तथा परिश्रम करते हैं.

  13. 1 कोरिंथ १६:१७लगभग ५९ ई.

    स्तेफ़ानॉस, फ़ॉरतुनातॉस तथा अखियाकॉस का यहां आना मेरे लिए आनंद का विषय है. उनके कारण तुम्हारी ओर से जो कमी थी, वह पूरी हो गई.

  14. 1 कोरिंथ १६:१८लगभग ५९ ई.

    उनके कारण मेरे और तुम्हारे मन में नई ताज़गी का संचार हुआ है. ऐसे व्यक्तियों को मान्यता अवश्य दी जाए.

  15. 1 कोरिंथ १६:१९लगभग ५९ ई.

    आसिया प्रदेश की कलीसियाओं का तुम्हें नमस्कार. अकुलॉस और प्रिस्का तथा उस कलीसिया की ओर से, जो उनके घर पर आराधना के लिए इकट्ठा होती है, प्रभु में तुम्हें बहुत-बहुत नमस्कार.

  16. 1 कोरिंथ १६:२०लगभग ५९ ई.

    यहां सभी भाई बहनों की ओर से तुम्हें नमस्कार. पवित्र चुंबन के साथ एक दूसरे का नमस्कार करो.

  17. 1 कोरिंथ १६:२१लगभग ५९ ई.

    मैं, पौलॉस तुम्हें अपने हाथ से यह नमस्कार लिख रहा हूं.

  18. 1 कोरिंथ १६:२२लगभग ५९ ई.

    जो कोई प्रभु से प्रेम नहीं करता, वह शापित हो. हे हमारे प्रभु आ!

  19. 1 कोरिंथ १६:२३लगभग ५९ ई.

    तुम पर प्रभु येशु मसीह का अनुग्रह हो.

  20. 1 कोरिंथ १६:२४लगभग ५९ ई.

    मसीह येशु में मेरा प्रेम तुम पर हमेशा रहे, आमेन.

  21. 2 कोरिंथ १:१लगभग ६० ई.

    परमेश्वर की इच्छा के द्वारा मसीह येशु के प्रेरित पौलॉस तथा हमारे भाई तिमोथियॉस. की ओर से कोरिन्थॉस नगर में परमेश्वर की कलीसिया तथा आखाया प्रदेश के सभी पवित्र लोगों को:

  22. 2 कोरिंथ १:२लगभग ६० ई.

    परमेश्वर हमारे पिता तथा प्रभु येशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति प्राप्‍त हो.

  23. 2 कोरिंथ १:३लगभग ६० ई.

    स्तुति के योग्य हैं परमेश्वर हमारे प्रभु येशु मसीह के पिता—करुणामय पिता तथा सब प्रकार के धीरज के स्रोत परमेश्वर,

  24. 2 कोरिंथ १:४लगभग ६० ई.

    जो हमारी सारी पीड़ाओं में धीरज प्रदान करते हैं कि हम पीड़ितों को उसी प्रकार धीरज प्रदान कर सकें, जिस प्रकार परमेश्वर हमें धीरज प्रदान करते हैं.

  25. 2 कोरिंथ १:५लगभग ६० ई.

    ठीक जिस प्रकार हममें मसीह के दुःखों की बहुतायत है, उसी प्रकार बहुत है मसीह के द्वारा हमारा धीरज.