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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 1 कोरिंथ १५:१३लगभग ५९ ई.

    यदि मरे हुओं के पुनरुत्थान जैसा कुछ न होता तो मसीह भी जीवित नहीं किए गए होते.

  2. 1 कोरिंथ १५:१४लगभग ५९ ई.

    यदि मसीह जीवित नहीं किए गए, तो व्यर्थ है हमारा प्रचार तथा व्यर्थ है तुम्हारा विश्वास भी.

  3. 1 कोरिंथ १५:१५लगभग ५९ ई.

    इससे भी बढ़कर यह कि हम परमेश्वर के झूठे गवाह प्रमाणित हो रहे हैं क्योंकि हमने उनके विषय में यह गवाही दी है कि उन्होंने मसीह को मरे हुओं में से जीवित किया; किंतु यदि मरे हुए वास्तव में जीवित नहीं किए जाते तो परमेश्वर ने मसीह को भी जीवित नहीं किया.

  4. 1 कोरिंथ १५:१६लगभग ५९ ई.

    क्योंकि यदि मरे हुए जीवित नहीं किए जाते तो मसीह भी जीवित नहीं किए गए.

  5. 1 कोरिंथ १५:१७लगभग ५९ ई.

    और यदि मसीह जीवित नहीं किए गए तो तुम्हारा विश्वास व्यर्थ है और तुम अब भी अपनी पाप की अवस्था में ही हो.

  6. 1 कोरिंथ १५:१८लगभग ५९ ई.

    तब तो वे, जो मसीह में सो गए हैं, नाश हो चुके.

  7. 1 कोरिंथ १५:१९लगभग ५९ ई.

    यदि हमने मात्र इस शारीरिक जीवन में ही मसीह में आशा रखी है तो हम अन्य सभी मनुष्यों में सबसे अधिक दयनीय हैं.

  8. 1 कोरिंथ १५:२०लगभग ५९ ई.

    किंतु सच यही है कि मसीह मरे हुओं में से जीवित किए गए हैं—उनके पहले फल, जो सो गए हैं.

  9. 1 कोरिंथ १५:२१लगभग ५९ ई.

    जिस प्रकार एक मनुष्य के द्वारा मृत्यु का प्रवेश हुआ, उसी प्रकार एक मनुष्य के द्वारा मरे हुओं के पुनरुत्थान का प्रवेश भी हुआ.

  10. 1 कोरिंथ १५:२२लगभग ५९ ई.

    जिस प्रकार आदम में सब की मृत्यु होती है, उसी प्रकार मसीह में सब जीवित भी किए जाएंगे.

  11. 1 कोरिंथ १५:२३लगभग ५९ ई.

    किंतु हर एक अपनी बारी से: पहले फल मसीह, इसके बाद वे सब, जो मसीह के आगमन तक उनमें स्थिर बने रहेंगे.

  12. 1 कोरिंथ १५:२४लगभग ५९ ई.

    तब, जब वह सारी प्रभुता, अधिकार और सामर्थ्य को नाश कर राज्य पिता परमेश्वर को सौंप देंगे, फिर युगांत हो जाएगा.

  13. 1 कोरिंथ १५:२५लगभग ५९ ई.

    यह ज़रूरी है कि वह उस समय तक शासन करें जब तक वह अपने सभी शत्रुओं को अपने अधीन न कर दें.

  14. 1 कोरिंथ १५:२६लगभग ५९ ई.

    जिस शत्रु को सबके अंत में नष्ट किया जाएगा, वह है मृत्यु

  15. 1 कोरिंथ १५:२७लगभग ५९ ई.

    क्योंकि उन्होंने सब कुछ उनके अधीन कर दिया है. किंतु जब वह कहते हैं, “सब कुछ उनके अधीन कर दिया गया है,” यह साफ़ ही है कि परमेश्वर इसमें शामिल नहीं, जिन्होंने सब कुछ उनके अधीन कर दिया है.

  16. 1 कोरिंथ १५:२८लगभग ५९ ई.

    जब सब कुछ मसीह के अधीन कर दिया गया है, तब स्वयं पुत्र भी परमेश्वर के अधीन हो जाएंगे, जिन्होंने सब कुछ पुत्र के अधीन कर दिया कि परमेश्वर ही स्वामी हों.

  17. 1 कोरिंथ १५:२९लगभग ५९ ई.

    यदि पुनरुत्थान जैसा कुछ नहीं होता तो उनका क्या होगा, जो मरे हुओं के स्थान पर बपतिस्मित हो रहे हैं? यदि मृतक जीवित नहीं किए जाते तो लोग उनके लिए बपतिस्मित क्यों किए जा रहे हैं?

  18. 1 कोरिंथ १५:३०लगभग ५९ ई.

    तो फिर हम क्यों हर घड़ी अपने जीवन को जोखिम में डाले फिर रहे हैं?

  19. 1 कोरिंथ १५:३१लगभग ५९ ई.

    मैं हर दिन मृत्यु का सामना करता हूं. यह मैं उस गौरव की शपथ खाकर कह रहा हूं, जो हमारे प्रभु येशु मसीह में मुझे तुम पर है.

  20. 1 कोरिंथ १५:३२लगभग ५९ ई.

    इफ़ेसॉस नगर में यदि मैं जंगली पशुओं से सिर्फ मनुष्य की रीति से लड़ता तो मुझे क्या लाभ होता? यदि मरे हुए जीवित नहीं किए जाते तो, जैसी कि उक्ति है: “आओ, हम खाएं-पिएं, क्योंकि कल तो हमारी मृत्यु होनी ही है!”

  21. 1 कोरिंथ १५:३३लगभग ५९ ई.

    धोखे में मत रहना: बुरी संगति अच्छे चरित्र को बिगाड़ देती है.

  22. 1 कोरिंथ १५:३४लगभग ५९ ई.

    सावधान हो जाओ, पाप करना छोड़ दो. यह मैं तुम्हें लज्जित करने के लिए ही कह रहा हूं क्योंकि तुममें से कुछ तो परमेश्वर को जानते ही नहीं.

  23. 1 कोरिंथ १५:३५लगभग ५९ ई.

    संभवतः कोई यह पूछे: कैसे जीवित हो जाते हैं मुर्दे? कैसा होता है उनका शरीर?

  24. 1 कोरिंथ १५:३६लगभग ५९ ई.

    मूर्खता भरा प्रश्न! तुम जो कुछ बोते हो तब तक पोषित नहीं होता, जब तक वह पहले मर न जाए.

  25. 1 कोरिंथ १५:३७लगभग ५९ ई.

    तुम उस शरीर को, जो पोषित होने को है, नहीं रोपते—तुम तो सिर्फ बीज रोपते हो—चाहे गेहूं या कोई और