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circa AD 95

The Revelation

John's vision on Patmos unveils the cosmic victory of the Lamb over evil and the final restoration of all creation.

404 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. प्रकाशन १:१लगभग ९६ ई.

    मसीह येशु का प्रकाशन, जिसे परमेश्वर ने उन पर इसलिये प्रकट किया कि वह अपने दासों पर उन घटनाओं का प्रकाशन करें जिनका जल्द ही घटित होना तय है. इसे परमेश्वर ने अपने स्वर्गदूत के माध्यम से अपने दास योहन को पहुंचाया.

  2. प्रकाशन १:२लगभग ९६ ई.

    योहन प्रमाणित करते हैं कि वह सब, जो उन्होंने देखा है, परमेश्वर की ओर से दिया गया संदेश तथा मसीह येशु के साक्षी है.

  3. प्रकाशन १:३लगभग ९६ ई.

    धन्य है वह, जो इस भविष्यवाणी को पढ़ता है तथा वे सब, जो इस भविष्यवाणी को सुनते हैं तथा इसमें लिखी हुई बातों का पालन करते हैं क्योंकि इसके पूरा होने का समय निकट है.

  4. प्रकाशन १:४लगभग ९६ ई.

    योहन की ओर से, उन सात कलीसियाओं को, जो आसिया प्रदेश में हैं, तुम्हें उनकी ओर से अनुग्रह और शांति मिले, जो हैं, जो सर्वदा थे और जो आनेवाले हैं और सात आत्माओं की ओर से, जो उनके सिंहासन के सामने हैं,

  5. प्रकाशन १:५लगभग ९६ ई.

    तथा मसीह येशु की ओर से, जो विश्वासयोग्य गवाह, मरे हुओं से जी उठनेवालों में पहलौठे तथा पृथ्वी के राजाओं के हाकिम हैं. जो हमसे प्रेम करते हैं तथा जिन्होंने अपने लहू द्वारा हमें हमारे पापों से छुड़ाया

  6. प्रकाशन १:६लगभग ९६ ई.

    और हमें अपनी प्रजा, अपने परमेश्वर और पिता के सामने पुरोहित होने के लिए चुना, गौरव तथा अधिकार सदा-सर्वदा होती रहे, आमेन!

  7. प्रकाशन १:७लगभग ९६ ई.

    “याद रहे, वह बादलों में आ रहे हैं. हर एक आंख उन्हें देखेगी—जिन्हें उन्होंने बेधा है.” पृथ्वी के सभी मनुष्य “उनके लिए विलाप करेंगे.”

  8. प्रकाशन १:८लगभग ९६ ई.

    “सर्वशक्तिमान, जो है, जो हमेशा से था तथा जो आनेवाला है,” प्रभु परमेश्वर का वचन है, “अल्फ़ा और ओमेगा मैं ही हूं.”

  9. प्रकाशन १:९लगभग ९६ ई.

    मैं योहन, मसीह में तुम्हारा भाई तथा मसीह येशु के लिए दुःख सहने, परमेश्वर के राज्य की नागरिकता तथा लगातार कोशिश करने में तुम्हारा सहभागी हूं, परमेश्वर के संदेश के प्रचार के कारण मसीह येशु के गवाह के रूप में मैं पतमॉस नामक द्वीप में भेज दिया गया था.

  10. प्रकाशन १:१०लगभग ९६ ई.

    प्रभु के दिन आत्मा में ध्यानमग्न की अवस्था में मुझे अपने पीछे तुरही के ऊंचे शब्द के समान यह कहता सुनाई दिया,

  11. प्रकाशन १:११लगभग ९६ ई.

    “जो कुछ तुम देख रहे हो, उसे लिखकर इन सात कलीसियाओं को भेज दो: इफ़ेसॉस, स्मुरना, पेरगामॉस, थुआतेइरा, सारदेइस, फ़िलादेलफ़िया और लाओदीकेइया.”

  12. प्रकाशन १:१२लगभग ९६ ई.

    यह देखने के लिए कि कौन मुझसे बातें कर रहा है, मैं पीछे मुड़ा. पीछे मुड़ने पर मुझे सात सोने के दीवट दिखाई दिए

  13. प्रकाशन १:१३लगभग ९६ ई.

    और मैंने दीपदानों के बीच “मनुष्य के पुत्र,” के समान एक पुरुष को पैरों तक लंबा वस्त्र तथा छाती पर सोने का पटुका बांधे हुए देखा.

  14. प्रकाशन १:१४लगभग ९६ ई.

    उनका सिर और बाल ऊन के समान सफ़ेद हिम जैसे उजले, आंख आग की ज्वाला से,

  15. प्रकाशन १:१५लगभग ९६ ई.

    पैर भट्टी में तपा कर चमकाए हुए कांसे की तरह तथा उनका शब्द प्रचंड लहरों की गर्जन-सा था.

  16. प्रकाशन १:१६लगभग ९६ ई.

    वह अपने दाएं हाथ में सात तारे लिए हुए थे. उनके मुंह से तेज दोधारी तलवार निकली हुई थी. उनका चेहरा दोपहर के सूर्य जैसे चमक रहा था.

  17. प्रकाशन १:१७लगभग ९६ ई.

    उन्हें देख मैं उनके चरणों पर मरा हुआ सा गिर पड़ा. उन्होंने अपना दायां हाथ मुझ पर रखकर कहा: “डरो मत. पहला और अंतिम मैं ही हूं.

  18. प्रकाशन १:१८लगभग ९६ ई.

    और जीवित मैं ही हूं; मैं मृत था किंतु देखो, अब मैं हमेशा के लिए जीवित हूं. मृत्यु और अधोलोक की कुंजियां मेरे अधिकार में हैं.

  19. प्रकाशन १:१९लगभग ९६ ई.

    “इसलिये तुमने जो देखा है, जो इस समय घट रहा है और जो इसके बाद घटने पर है, उसे लिख लेना.

  20. प्रकाशन १:२०लगभग ९६ ई.

    इन सात तारों का, जो तुम मेरे दाएं हाथ में देख रहे हो तथा सात सोने के दीवटों का गहरा अर्थ यह है: ये सात तारे सात कलीसियाओं को भेजे हुए दूत तथा सात दीपदान सात कलीसियाएं हैं.

  21. प्रकाशन २:१लगभग ९६ ई.

    “इफ़ेसॉस नगर की कलीसिया के लिए चुने हुए दूत को लिखो: जो अपने दाएं हाथ में साथ तारे लिए हुए है तथा जो सात सोने के दीवटों के बीच चल रहा है, उसका कहना यह है:

  22. प्रकाशन २:२लगभग ९६ ई.

    मैं तुम्हारे कामों, तुम्हारे परिश्रम तथा तुम्हारे धीरज से भली-भांति परिचित हूं और यह भी जानता हूं कि बुराई तुम्हारे लिए असहनीय हैं. तुमने उनके दावों को, जो स्वयं को प्रेरित कहते तो हैं, किंतु हैं नहीं, परखा और झूठा पाया

  23. प्रकाशन २:३लगभग ९६ ई.

    और यह भी कि तुम धीरज धरे रहे. तुम मेरे नाम के लिए दुःख सहते रहे, किंतु तुमने हार स्वीकार नहीं की.

  24. प्रकाशन २:४लगभग ९६ ई.

    परंतु तुम्हारे विरुद्ध मुझे यह कहना है कि तुममें वह प्रेम नहीं रहा, जो पहले था.

  25. प्रकाशन २:५लगभग ९६ ई.

    याद करो कि तुम कहां से कहां आ गिरे हो. इसलिये पश्चाताप करो और वही करो जो तुम पहले किया करते थे; नहीं तो, अगर तुम पश्चाताप न करोगे तो मैं तुम्हारे पास आकर तुम्हारा दीपदान उसके नियत स्थान से हटा दूंगा.