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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. 1 कोरिंथ १५:३८लगभग ५९ ई.

    मगर परमेश्वर अपनी इच्छा के अनुसार उसे देह प्रदान करते हैं—हर एक बीज को उसकी अपनी विशेष देह.

  2. 1 कोरिंथ १५:३९लगभग ५९ ई.

    सभी प्राणियों की देह अलग होती है—मनुष्य की देह एक प्रकार की, पशु की देह एक प्रकार की, पक्षी की देह तथा मछली की देह एक प्रकार की.

  3. 1 कोरिंथ १५:४०लगभग ५९ ई.

    देह स्वर्गीय भी होती है और शारीरिक भी. स्वर्गीय देह का तेज अलग होता है और शारीरिक देह का अलग.

  4. 1 कोरिंथ १५:४१लगभग ५९ ई.

    सूर्य का तेज एक प्रकार का होता है, चंद्रमा का अन्य प्रकार का और तारों का अन्य प्रकार का और हर एक तारे का तेज अन्य तारे के तेज से अलग होता है.

  5. 1 कोरिंथ १५:४२लगभग ५९ ई.

    मरे हुओं का जीवित होना भी ऐसा ही होता है. रोपित की जाती नाशमान देह, जीवित होती है अविनाशी देह.

  6. 1 कोरिंथ १५:४३लगभग ५९ ई.

    यह रोपित की जाती है अनादर के साथ, जीवित होती है तेज में; रोपित की जाती है निर्बल देह, जीवित होती है सामर्थ्य से भरी देह.

  7. 1 कोरिंथ १५:४४लगभग ५९ ई.

    रोपित की जाती है शारीरिक देह, जीवित होती है आत्मिक देह. यदि शारीरिक देह है तो आत्मिक देह भी है.

  8. 1 कोरिंथ १५:४५लगभग ५९ ई.

    जैसा कि पवित्र शास्त्र का लेख भी है: “पहला मानव आदम जीवित प्राणी हुआ किंतु अंतिम आदम जीवनदायी आत्मा हुआ.”

  9. 1 कोरिंथ १५:४६लगभग ५९ ई.

    फिर भी पहला वह नहीं, जो आत्मिक है परंतु वह, जो शारीरिक है. उसके बाद ही आत्मिक का स्थान है.

  10. 1 कोरिंथ १५:४७लगभग ५९ ई.

    पहला मानव शारीरिक था—मिट्टी का बना हुआ—दूसरा मानव स्वर्गीय.

  11. 1 कोरिंथ १५:४८लगभग ५९ ई.

    शारीरिक वैसे ही हैं जैसा मिट्टी से बना मानव था तथा स्वर्गीय वैसे ही हैं जैसा वह, जो स्वर्गीय है.

  12. 1 कोरिंथ १५:४९लगभग ५९ ई.

    ठीक जैसे हमें उस शारीरिक का रूप प्राप्‍त हुआ है, हमें उस स्वर्गीय का रूप भी प्राप्‍त होगा.

  13. 1 कोरिंथ १५:५०लगभग ५९ ई.

    प्रिय भाई बहनो, शारीरिक लहू और मांस का मनुष्य परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता और न ही नाशमान अविनाशी में.

  14. 1 कोरिंथ १५:५१लगभग ५९ ई.

    सुनो! मैं तुम पर एक भेद प्रकट करता हूं: हम सभी सो नहीं जाएंगे परंतु हम सभी का रूप बदल

  15. 1 कोरिंथ १५:५२लगभग ५९ ई.

    जाएगा—क्षण-भर में, पलक झपकते ही, आखिरी तुरही के स्वर पर. ज्यों ही आखिरी तुरही का स्वर होगा, मरे हुए अविनाशी दशा में जीवित किए जाएंगे और हमारा रूप बदल जाएगा.

  16. 1 कोरिंथ १५:५३लगभग ५९ ई.

    यह ज़रूरी है कि नाशमान अविनाशी को धारण करे तथा मरणहार अमरता को.

  17. 1 कोरिंथ १५:५४लगभग ५९ ई.

    किंतु जब यह नाशमान अविनाशी को तथा मरणहार अमरता को धारण कर लेगा तब पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हो जाएगा: “मृत्यु विजय का निवाला बन गई.”

  18. 1 कोरिंथ १५:५५लगभग ५९ ई.

    मृत्यु! कहां है तेरी विजय? मृत्यु! कहां है तेरा ड़ंक?

  19. 1 कोरिंथ १५:५६लगभग ५९ ई.

    मृत्यु का ड़ंक है पाप और पाप का बल है व्यवस्था.

  20. 1 कोरिंथ १५:५७लगभग ५९ ई.

    किंतु हम धन्यवाद करते हैं परमेश्वर का, जो हमें हमारे प्रभु येशु मसीह द्वारा विजय प्रदान करते हैं.

  21. 1 कोरिंथ १५:५८लगभग ५९ ई.

    इसलिये मेरे प्रिय भाई बहनो, इस सच्चाई के प्रकाश में कि प्रभु में तुम्हारा परिश्रम व्यर्थ नहीं है, तुम प्रभु के काम में उन्‍नत होते हुए हमेशा दृढ़ तथा स्थिर रहो.

  22. 1 कोरिंथ १६:१लगभग ५९ ई.

    अब पवित्र लोगों की सहायता के लिए धनराशि के संबंध में: इस विषय में मैंने, जो आज्ञा गलातिया प्रदेश की कलीसियाओं को दी थी, उन्हीं आज्ञाओं का पालन तुम भी करो.

  23. 1 कोरिंथ १६:२लगभग ५९ ई.

    सप्‍ताह के पहले दिन तुममें से हर एक अपनी आय के अनुसार कुछ धनराशि अलग रख छोड़े कि मेरे वहां आने पर तुम्हें धन इकट्ठा न करना पड़े.

  24. 1 कोरिंथ १६:३लगभग ५९ ई.

    जब मैं वहां आऊंगा, तुम्हारे द्वारा चुने गए व्यक्तियों को पत्रों के साथ भेज दूंगा कि वे इकट्ठा राशि को येरूशलेम पहुंचा दें.

  25. 1 कोरिंथ १६:४लगभग ५९ ई.

    यदि मेरा जाना भी सही हुआ तो वे मेरे साथ जा सकेंगे.