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circa 1446–1406 BC
The Wilderness Years
Forty years of wandering in the desert test Israel's faith and prepare a new generation to enter the promised land.
इस काल के वचन
- गणना ३१:४१लगभग १४५२ ई.पू.
मोशेह ने पुरोहित एलिएज़र को याहवेह के लिए ठहराया भाग सौंप दिया, ठीक जैसी याहवेह की आज्ञा थी.
- गणना ३१:४२लगभग १४५२ ई.पू.
मोशेह ने जिन इस्राएलियों को, जो युद्ध से लौटे थे, उनके आधे भाग के दसवें अंश के संबंध में:
- गणना ३१:४३लगभग १४५२ ई.पू.
सारी इस्राएली सभा के आधे भाग का दसवां अंश था 3,37,500 भेड़ें,
- गणना ३१:४४लगभग १४५२ ई.पू.
36,000 पशु,
- गणना ३१:४५लगभग १४५२ ई.पू.
30,500 गधे
- गणना ३१:४६लगभग १४५२ ई.पू.
तथा मानव प्राणी थे 16,000.
- गणना ३१:४७लगभग १४५२ ई.पू.
तथा इस्राएलियों के आधे भाग के दसवें अंश में से, मोशेह ने हर एक पचास में से, चाहे मनुष्य हों अथवा पशु, लेकर उन लेवियों को सौंप दिया, जो याहवेह के साक्षी तंबू के अधिकारी थे, ठीक जैसा मोशेह को याहवेह ने आज्ञा दी थी.
- गणना ३१:४८लगभग १४५२ ई.पू.
फिर वे अधिकारी—हज़ारों के सेनापति, सैकड़ों के प्रधान—मोशेह के पास आए.
- गणना ३१:४९लगभग १४५२ ई.पू.
उन्होंने मोशेह से विनती की, “आपके सेवकों ने हमें सौंपे गए योद्धाओं की गिनती कर ली है. कोई भी व्यक्ति छूट नहीं रहा.
- गणना ३१:५०लगभग १४५२ ई.पू.
इसलिये हममें से हर एक व्यक्ति याहवेह को भेंट करने के लिए सोने के गहने-बाजूबंद, कंगन, अंगूठियां, कर्णफूल, गले के हार लेकर आया है, जैसा जैसा जिसे प्राप्त हुआ है कि हम याहवेह के सामने अपने लिए प्रायश्चित कर सकें.”
- गणना ३१:५१लगभग १४५२ ई.पू.
मोशेह तथा पुरोहित एलिएज़र ने उनसे ये सोने के गहने इकट्ठे कर लिए, जो उनके द्वारा लाए गए थे.
- गणना ३१:५२लगभग १४५२ ई.पू.
भेंट में दिए गए सारे गहनों का तौल, जो उन्होंने याहवेह को चढ़ाया था, जो हज़ारों तथा सैकड़ों के अधिकारियों द्वारा प्राप्त हुआ था, 16,750 शेकेल हुआ.
- गणना ३१:५३लगभग १४५२ ई.पू.
योद्धाओं ने अपने लिए लूट सामग्री इकट्ठी कर ली थी.
- गणना ३१:५४लगभग १४५२ ई.पू.
मोशेह तथा पुरोहित एलिएज़र ने, हज़ारों एवं सैंकड़ों पर चुने हुए अधिकारियों से सोने के गहने स्वीकार कर लिए तथा इन्हें मिलनवाले तंबू पर ले गए, कि यह याहवेह के सामने इस्राएलियों के लिए चिन्ह हो जाए.
- गणना ३२:१लगभग १४५२ ई.पू.
इस समय तक रियूबेन तथा गाद के वंशजों का पशु धन बहुत विशाल संख्या में हो चुका था. फिर जब उन्होंने याज़र देश तथा गिलआद देश का विचार किया, तो उन्होंने इसे हर एक रीति से पशु धन के लिए उपयुक्त पाया.
- गणना ३२:२लगभग १४५२ ई.पू.
रियूबेन के वंशज तथा गाद के वंशज मोशेह, पुरोहित एलिएज़र तथा सभा के प्रधानों के पास अपनी विनती ले पहुंच गए.
- गणना ३२:३लगभग १४५२ ई.पू.
“अतारोथ, दीबोन, याज़र, निमराह, हेशबोन, एलिआलेह, सेबाम, नेबो तथा बेओन,
- गणना ३२:४लगभग १४५२ ई.पू.
वह देश, जिसे याहवेह ने इस्राएली सभा के लिए हरा दिया है, पशु धन के लिए अच्छा है और हम, आपके सेवक पशुधनधारी हैं.”
- गणना ३२:५लगभग १४५२ ई.पू.
तब उन्होंने यह भी कहा, “यदि हम पर आपकी कृपादृष्टि बनी है, हम, आपके सेवकों को यह भूमि का भाग दे दिया जाए; हमें अपने साथ यरदन के पार न ले जाइए.”
- गणना ३२:६लगभग १४५२ ई.पू.
किंतु मोशेह ने इनकार किया, “कैसे संभव है कि तुम्हारे भाई तो युद्ध में जाएंगे और तुम लोग यहां आराम से बैठे रहोगे?
- गणना ३२:७लगभग १४५२ ई.पू.
तुम लोग यहीं इस्राएलियों को याहवेह द्वारा दिए गए देश के लिए यरदन पार करने में हतोत्साहित क्यों कर रहे हो?
- गणना ३२:८लगभग १४५२ ई.पू.
तुम्हारे पूर्वजों ने भी उस अवसर पर यही किया था, जब मैंने उन्हें कादेश-बरनेअ से उस देश का भेद लेने के उद्देश्य से भेजा था.
- गणना ३२:९लगभग १४५२ ई.पू.
वे एशकोल घाटी में थे और वहां से उन्होंने उस देश को देखा, लौटकर उन्होंने इस्राएलियों को हतोत्साहित कर दिया, कि वे उस देश में प्रवेश न करें, जो उन्हें याहवेह द्वारा दिया जा चुका था.
- गणना ३२:१०लगभग १४५२ ई.पू.
परिणाम यह हुआ कि उस दिन याहवेह का क्रोध भड़क उठा और उन्होंने यह शपथ ले ली:
- गणना ३२:११लगभग १४५२ ई.पू.
‘मिस्र देश से निकलकर आए बीस वर्ष तथा इससे अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति उस देश का दर्शन ही न कर पाएगा जिसे देने के शपथ मैंने अब्राहाम, यित्सहाक तथा याकोब से की थी; क्योंकि उन्होंने पूरी तरह से मेरा अनुसरण नहीं किया;