मुख्य सामग्री पर जाएँ

circa 605–538 BC

The Babylonian Exile

Jerusalem falls and the temple burns; Ezekiel and Daniel minister among the exiles as Lamentations mourns the city's ruin.

1,784 वचन · 3 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. विलापगीत ३:७लगभग ५८८ ई.पू.

    उन्होंने मेरे आस-पास दीवार खड़ी कर दी है, कि मैं बचकर पलायन न कर सकूं; उन्होंने मुझे भारी बेड़ियों में बांध रखा है.

  2. विलापगीत ३:८लगभग ५८८ ई.पू.

    मैं सहायता की दोहाई अवश्य देता हूं, किंतु वह मेरी पुकार को अवरुद्ध कर देते हैं.

  3. विलापगीत ३:९लगभग ५८८ ई.पू.

    उन्होंने मेरे मार्गों को पत्थर लगाकर बाधित कर दिया है; उन्होंने मेरे मार्गों को विकृत बना दिया है.

  4. विलापगीत ३:१०लगभग ५८८ ई.पू.

    वह एक ऐसा रीछ है, ऐसा सिंह है, जो मेरे लिए घात लगाए हुए बैठा है,

  5. विलापगीत ३:११लगभग ५८८ ई.पू.

    मुझे भटका कर मुझे टुकड़े-टुकड़े कर डाला और उसने मुझे निस्सहाय बना छोड़ा है.

  6. विलापगीत ३:१२लगभग ५८८ ई.पू.

    उन्होंने अपना धनुष चढ़ाया तथा मुझे अपने बाणों का लक्ष्य बना लिया.

  7. विलापगीत ३:१३लगभग ५८८ ई.पू.

    अपने तरकश से बाण लेकर उन्होंने उन बाणों से मेरा हृदय बेध दिया.

  8. विलापगीत ३:१४लगभग ५८८ ई.पू.

    सभी के लिए अब तो मैं उपहास पात्र हूं; सारे दिन उनके व्यंग्य-बाण मुझ पर छोड़े जाते हैं.

  9. विलापगीत ३:१५लगभग ५८८ ई.पू.

    उन्होंने मुझे कड़वाहट से भर दिया है उन्होंने मुझे नागदौने से सन्तृप्‍त कर रखा है.

  10. विलापगीत ३:१६लगभग ५८८ ई.पू.

    उन्होंने मुझे कंकड़ों पर दांत चलाने के लिए विवश कर दिया है; मुझे भस्म के ढेर में जा छिपने के लिए विवश कर दिया है.

  11. विलापगीत ३:१७लगभग ५८८ ई.पू.

    शांति ने मेरी आत्मा का साथ छोड़ दिया है; मुझे तो स्मरण ही नहीं रहा कि सुख-आनन्द क्या होता है.

  12. विलापगीत ३:१८लगभग ५८८ ई.पू.

    इसलिये मुझे यही कहना पड़ रहा है, “न मुझमें धैर्य शेष रहा है और न ही याहवेह से कोई आशा.”

  13. विलापगीत ३:१९लगभग ५८८ ई.पू.

    स्मरण कीजिए मेरी पीड़ा और मेरी भटकन, वह नागदौन तथा वह कड़वाहट.

  14. विलापगीत ३:२०लगभग ५८८ ई.पू.

    मेरी आत्मा को इसका स्मरण आता रहता है, मेरा मनोबल शून्य हुआ जा रहा है.

  15. विलापगीत ३:२१लगभग ५८८ ई.पू.

    मेरी आशा मात्र इस स्मृति के आधार पर जीवित है:

  16. विलापगीत ३:२२लगभग ५८८ ई.पू.

    याहवेह का करुणा-प्रेम, के ही कारण हम भस्म नही होते! कभी भी उनकी कृपा का ह्रास नहीं होता.

  17. विलापगीत ३:२३लगभग ५८८ ई.पू.

    प्रति प्रातः वे नए पाए जाते हैं; महान है आपकी विश्वासयोग्यता.

  18. विलापगीत ३:२४लगभग ५८८ ई.पू.

    मेरी आत्मा इस तथ्य की पुष्टि करती है, “याहवेह मेरा अंश हैं; इसलिये उनमें मेरी आशा रखूंगा.”

  19. विलापगीत ३:२५लगभग ५८८ ई.पू.

    याहवेह के प्रिय पात्र वे हैं, जो उनके आश्रित हैं, वे, जो उनके खोजी हैं;

  20. विलापगीत ३:२६लगभग ५८८ ई.पू.

    उपयुक्त यही होता है कि हम धीरतापूर्वक याहवेह द्वारा उद्धार की प्रतीक्षा करें.

  21. विलापगीत ३:२७लगभग ५८८ ई.पू.

    मनुष्य के लिए हितकर यही है कि वह आरंभ ही से अपना जूआ उठाए.

  22. विलापगीत ३:२८लगभग ५८८ ई.पू.

    वह एकाकी हो शांतिपूर्वक इसे स्वीकार कर ले, जब कभी यह उस पर आ पड़ता है.

  23. विलापगीत ३:२९लगभग ५८८ ई.पू.

    वह अपना मुख धूलि पर ही रहने दे— आशा कभी मृत नहीं होती.

  24. विलापगीत ३:३०लगभग ५८८ ई.पू.

    वह अपना गाल उसे प्रस्तुत कर दे, जो उस प्रहार के लिए तैयार है, वह समस्त अपमान स्वीकार कर ले.

  25. विलापगीत ३:३१लगभग ५८८ ई.पू.

    प्रभु का परित्याग चिरस्थायी नहीं हुआ करता.