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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ३३:८लगभग १७३९ ई.पू.

    एसाव ने याकोब से पूछा, “ये गाय, बैल मुझे क्यों दिया, समझ में नहीं आया.” याकोब बोले, “मेरे अधिपति, मैं इसके द्वारा आपकी दया पाना चाहता हूं.”

  2. उत्पत्ति ३३:९लगभग १७३९ ई.पू.

    एसाव ने कहा, “हे मेरे भाई मेरे पास सब कुछ है. और जो कुछ तुम्हारा है, उसे अपने ही पास रहने दो.”

  3. उत्पत्ति ३३:१०लगभग १७३९ ई.पू.

    याकोब ने कहा, “नहीं! यदि आपका अनुग्रह मुझ पर है, तो मेरी ओर से इन उपहारों को स्वीकार कर लीजिए; क्योंकि आपको देखकर लगा कि मैंने परमेश्वर के दर्शन पा लिये, और आपने मुझे दिल से स्वीकारा भी है.

  4. उत्पत्ति ३३:११लगभग १७३९ ई.पू.

    कृपा कर आप मेरे द्वारा प्रस्तुत इस भेंट को स्वीकार कर लीजिए, जो मैं आपके लिए लाया हूं, क्योंकि मेरे प्रति परमेश्वर अत्यंत कृपालु रहे हैं तथा मेरे पास बहुत है.” जब याकोब ने ज़बरदस्ती की, एसाव ने वह भेंट स्वीकार कर ली.

  5. उत्पत्ति ३३:१२लगभग १७३९ ई.पू.

    फिर एसाव ने कहा, “चलो, यहां से अपने घर चलें. मैं तुम्हारे आगे-आगे चलूंगा.”

  6. उत्पत्ति ३३:१३लगभग १७३९ ई.पू.

    इस पर याकोब ने एसाव से कहा, “मेरे स्वामी, आप जानते हैं कि बालक कमजोर हैं भेड़-बकरी एवं गायें जो दूध देनेवाली हैं, उनका ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है.

  7. उत्पत्ति ३३:१४लगभग १७३९ ई.पू.

    इसलिये मेरे स्वामी, आप आगे चलिये और मैं आपके पीछे-पीछे धीरे से, भेड़-बकरी एवं गायों का ध्यान रखते हुए उनकी रफ़्तार में चलूंगा.”

  8. उत्पत्ति ३३:१५लगभग १७३९ ई.पू.

    तब एसाव ने याकोब से कहा, “मैं अपने साथियों को आपके पास छोड़ देता हूं.” तब याकोब ने कहा, “क्या इसकी ज़रूरत है? मुझ पर मेरे स्वामी की दया बनी रहे, यही काफ़ी है.”

  9. उत्पत्ति ३३:१६लगभग १७३९ ई.पू.

    इसलिये एसाव उसी दिन सेईर चले गये.

  10. उत्पत्ति ३३:१७लगभग १७३९ ई.पू.

    याकोब सुक्कोथ की दिशा में आगे बढ़े. वहीं उन्होंने अपने लिए एक घर बनाया तथा पशुओं के रहने के लिए प्रबंध किया. इसलिये इस स्थान का नाम सुक्कोथ पड़ गया.

  11. उत्पत्ति ३३:१८लगभग १७३९ ई.पू.

    पद्दन-अराम से यात्रा करते हुए याकोब कनान देश के शेकेम नगर पहुंचे और उन्होंने नगर के पास तंबू खड़े किए.

  12. उत्पत्ति ३३:१९लगभग १७३९ ई.पू.

    जिस स्थान पर उन्होंने तंबू खड़े किए, उस ज़मीन को उन्होंने शेकेम के पिता, हामोर के पुत्रों से एक सौ चांदी की मुद्राएं देकर खरीदा था.

  13. उत्पत्ति ३३:२०लगभग १७३९ ई.पू.

    फिर याकोब ने वहां एक वेदी बनाई, जिसे उन्होंने एल-एलोहे-इस्राएल नाम रखा.

  14. उत्पत्ति ३४:१लगभग १७३२ ई.पू.

    लियाह की पुत्री दीनाह उस देश की लड़कियों के साथ स्त्रियों को देखने के लिए बाहर गई.

  15. उत्पत्ति ३४:२लगभग १७३२ ई.पू.

    उस देश के शासक हिव्वी हामोर के पुत्र शेकेम ने उसे देखा, वह उसे अपने साथ ले गया उसने उसे पकड़ लिया और उसने उसके साथ बलात्कार किया.

  16. उत्पत्ति ३४:३लगभग १७३२ ई.पू.

    याकोब की पुत्री दीनाह से उसे प्रेम था और उसके प्रति उसका व्यवहार अच्छा था.

  17. उत्पत्ति ३४:४लगभग १७३२ ई.पू.

    शेकेम ने अपने पिता हामोर से कहा, “मेरा विवाह इस युवती से कर दीजिए.”

  18. उत्पत्ति ३४:५लगभग १७३२ ई.पू.

    जब याकोब को पता चला कि शेकेम ने उनकी पुत्री को दूषित कर दिया है, उस समय उनके पुत्र पशुओं के साथ मैदान में थे; इसलिये याकोब उनके लौटने तक शांत रहे.

  19. उत्पत्ति ३४:६लगभग १७३२ ई.पू.

    इसी समय शेकेम का पिता हामोर याकोब से मिलने आये.

  20. उत्पत्ति ३४:७लगभग १७३२ ई.पू.

    जब याकोब के पुत्र लौटे और उन्हें सब बात पता चली तब वे बहुत उदास और नाराज हुए, क्योंकि उसने याकोब की पुत्री से संभोग द्वारा इस्राएल में मूर्खता का काम कर डाला था, एक ऐसा काम, जो अनुचित था.

  21. उत्पत्ति ३४:८लगभग १७३२ ई.पू.

    किंतु हामोर ने उनसे कहा, “मेरा पुत्र शेकेम आपकी पुत्री को चाहता है. कृपया उसका विवाह मेरे पुत्र से कर दीजिए.

  22. उत्पत्ति ३४:९लगभग १७३२ ई.पू.

    हमारे साथ वैवाहिक संबंध बना लीजिए आप हमें अपनी पुत्रियां दीजिए और आप हमारी पुत्रियां लीजिए.

  23. उत्पत्ति ३४:१०लगभग १७३२ ई.पू.

    इस प्रकार आप हमारे साथ इस देश में मिलकर रह पायेंगे. आप इस देश में रहिये, व्यवसाय कीजिए तथा संपत्ति प्राप्‍त करते जाइए.”

  24. उत्पत्ति ३४:११लगभग १७३२ ई.पू.

    शेकेम ने दीनाह के पिता तथा उसके भाइयों से यह भी कहा, “यदि मैंने आपकी कृपादृष्टि प्राप्‍त कर ली है, तो आप अपने मन की बात कह दीजिए कि मैं उसे पूरा कर सकूं.

  25. उत्पत्ति ३४:१२लगभग १७३२ ई.पू.

    आप वधू के लिए जो भी मांगेंगे उसे मैं पूरा करूंगा. किंतु मेरा विवाह उसी युवती से कीजिए.”