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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ३२:१५लगभग १७३९ ई.पू.

    तीस दुधार ऊंटनियां तथा उनके शावक, चालीस गायें तथा दस सांड़, बीस गधियां तथा दस गधे.

  2. उत्पत्ति ३२:१६लगभग १७३९ ई.पू.

    याकोब ने पशुओं के अलग-अलग झुंड बनाकर अपने सेवकों को सौंप दिए, और उन्होंने अपने सेवकों से कहा, “मेरे आगे-आगे चलते जाओ तथा हर एक झुंड के बीच थोड़ी जगह छोड़ना.”

  3. उत्पत्ति ३२:१७लगभग १७३९ ई.पू.

    जो सबसे आगे था उनसे कहा: “जब तुम मेरे भाई एसाव से मिलोगे और वह तुमसे पूछेगा, ‘कौन है तुम्हारा स्वामी और कहां जा रहे हो? और ये सब पशु, जो आगे जा रहे हैं, किसके हैं?’

  4. उत्पत्ति ३२:१८लगभग १७३९ ई.पू.

    तब तुम उनसे कहना, ‘ये सभी आपके भाई याकोब के हैं, जो उपहार में उनके अधिपति एसाव को दिए जा रहे हैं. और याकोब हमारे पीछे आ रहे हैं.’ ”

  5. उत्पत्ति ३२:१९लगभग १७३९ ई.पू.

    याकोब ने यही बात दूसरे तथा तीसरे तथा उन सभी को कही, जो उनके पीछे-पीछे आ रहे थे.

  6. उत्पत्ति ३२:२०लगभग १७३९ ई.पू.

    “तुम यह कहना, ‘आपके सेवक याकोब पीछे आ रहे हैं.’ ” क्योंकि याकोब ने सोचा, “इतने उपहार देकर मैं एसाव को खुश कर दूंगा. इसके बाद मैं उनके साथ जाऊंगा. तब ज़रूर, वह मुझे स्वीकार कर लेंगे.”

  7. उत्पत्ति ३२:२१लगभग १७३९ ई.पू.

    और इसी तरह सब उपहार आगे बढ़ते गये, और याकोब तंबू में रहे.

  8. उत्पत्ति ३२:२२लगभग १७३९ ई.पू.

    उस रात याकोब उठे और अपनी दोनों पत्नियों, दोनों दासियों एवं बालकों को लेकर यब्बोक के घाट के पार चले गए.

  9. उत्पत्ति ३२:२३लगभग १७३९ ई.पू.

    याकोब ने सबको नदी की दूसरी तरफ भेज दिया.

  10. उत्पत्ति ३२:२४लगभग १७३९ ई.पू.

    और याकोब वहीं रुक गये. एक व्यक्ति वहां आकर सुबह तक उनसे मल्ल-युद्ध करता रहा.

  11. उत्पत्ति ३२:२५लगभग १७३९ ई.पू.

    जब उस व्यक्ति ने यह देखा कि वह याकोब को हरा नहीं सका तब उसने याकोब की जांघ की नस को छुआ और मल्ल-युद्ध करते-करते ही उनकी नस चढ़ गई.

  12. उत्पत्ति ३२:२६लगभग १७३९ ई.पू.

    यह होने पर उस व्यक्ति ने याकोब से कहा, “अब मुझे जाने दो.” किंतु याकोब ने उस व्यक्ति से कहा, “नहीं, मैं आपको तब तक जाने न दूंगा, जब तक आप मुझे आशीष न देंगे.”

  13. उत्पत्ति ३२:२७लगभग १७३९ ई.पू.

    तब उसने याकोब से पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?” उसने कहा, “याकोब.”

  14. उत्पत्ति ३२:२८लगभग १७३९ ई.पू.

    तब उस व्यक्ति ने उनसे कहा, “अब से तुम्हारा नाम याकोब नहीं बल्कि इस्राएल होगा, क्योंकि परमेश्वर से तथा मनुष्यों से संघर्ष करते हुए तुम जीत गए हो.”

  15. उत्पत्ति ३२:२९लगभग १७३९ ई.पू.

    तब याकोब ने उस व्यक्ति से कहा, “कृपया आप मुझे अपना नाम बताइए.” उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, “क्या करोगे मेरा नाम जानकर?” और तब उस व्यक्ति ने वहीं याकोब को आशीष दी.

  16. उत्पत्ति ३२:३०लगभग १७३९ ई.पू.

    जहां यह सब कुछ हुआ याकोब ने उस स्थान का नाम पनीएल रखा, यह कहकर कि “मैंने परमेश्वर को आमने-सामने देखा, फिर भी मेरा जीवन बच गया!”

  17. उत्पत्ति ३२:३१लगभग १७३९ ई.पू.

    जब याकोब पनीएल से निकले तब सूरज उसके ऊपर उग आया था. वह अपनी जांघ के कारण लंगड़ा रहे थे.

  18. उत्पत्ति ३२:३२लगभग १७३९ ई.पू.

    इस घटना का स्मरण करते हुए इस्राएल वंश आज तक जांघ की पुट्ठे की मांसपेशी को नहीं खाते क्योंकि उस व्यक्ति ने याकोब के जांघ की इसी मांसपेशी पर छुआ था.

  19. उत्पत्ति ३३:१लगभग १७३९ ई.पू.

    याकोब ने देखा कि दूर एसाव अपने चार सौ साथियों के साथ आ रहे थे; याकोब ने अपने बालकों को लियाह, राहेल तथा दोनों दासियों को दो भागों में कर दिये.

  20. उत्पत्ति ३३:२लगभग १७३९ ई.पू.

    उन्होंने दोनों दासियों तथा उनके बालकों को सबसे आगे कर दिया, उनके पीछे लियाह और उसकी संतान तथा राहेल और योसेफ़ सबसे पीछे थे.

  21. उत्पत्ति ३३:३लगभग १७३९ ई.पू.

    याकोब सबसे आगे थे और एसाव को देखते ही सात बार भूमि पर गिरकर दंडवत किया और एसाव के पास पहुंचे.

  22. उत्पत्ति ३३:४लगभग १७३९ ई.पू.

    एसाव दौड़ते हुए आए और याकोब को गले लगाया और चुंबन किया. और दोनो रोने लगे.

  23. उत्पत्ति ३३:५लगभग १७३९ ई.पू.

    एसाव ने स्त्रियों एवं बालकों को देखा. उसने पूछा, “तुम्हारे साथ ये सब कौन हैं?” याकोब ने कहा ये बालक, “जो परमेश्वर ने अपनी कृपा से आपके दास को दिये हैं.”

  24. उत्पत्ति ३३:६लगभग १७३९ ई.पू.

    और दासियां अपने-अपने बालकों के साथ पास आई और झुककर प्रणाम किया.

  25. उत्पत्ति ३३:७लगभग १७३९ ई.पू.

    वैसे ही लियाह अपने बालकों के साथ पास आई, उसने भी झुककर प्रणाम किया और फिर राहेल के साथ योसेफ़ भी आया और प्रणाम किया.