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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. याकोब ने वहां एक वेदी बनाई और उस स्थान का नाम एल-बेथेल रखा, क्योंकि इसी स्थान पर परमेश्वर ने स्वयं को उन पर प्रकट किया था, जब वह अपने भाई से बचकर भाग रहे थे.

  2. उसी समय रेबेकाह की धाय दबोरा की मृत्यु हो गई, उसे बेथेल के बाहर बांज वृक्ष के नीचे दफ़ना दिया. उस वृक्ष का नाम अल्लोन-बाकूथ रखा गया (अर्थात् रोने का बांज वृक्ष).

  3. जब याकोब पद्दन-अराम से आए, परमेश्वर दुबारा याकोब पर प्रकट हुए. परमेश्वर ने उनको आशीष दी.

  4. और कहा, “तुम्हारा नाम याकोब है, अब से तुम्हारा नाम इस्राएल होगा.” इस प्रकार परमेश्वर ने उन्हें इस्राएल नाम दे दिया.

  5. परमेश्वर ने उनसे यह भी कहा, “मैं एल शद्दय अर्थात् सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूं; तुम फूलो फलो और बढ़ते जाओ. तुम एक राष्ट्र तथा एक जनता का समूह भी होंगे, तुम्हारे वंश में राजा पैदा होंगे.

  6. जो देश मैंने अब्राहाम तथा यित्सहाक को दिया था, वह मैं तुम्हें भी दूंगा, तथा यही देश तुम्हारे बाद तुम्हारे वंश को दूंगा.”

  7. इसके बाद परमेश्वर उस स्थान से ऊपर चढ़ गए, जिस स्थान पर उन्होंने याकोब से बातचीत की थी.

  8. याकोब ने उस स्थान पर, जहां परमेश्वर से उनकी बात हुई थी, वहां खंभा खड़ा किया—यह एक पत्थर था. याकोब ने इस पर पेय बलि चढ़ाई तथा उस पर तेल भी उंडेला.

  9. जिस स्थान पर परमेश्वर ने उनसे बात की थी, उस स्थान का नाम उन्होंने बेथेल रखा.

  10. फिर वे बेथेल से चलना शुरू करके एफ़राथा नामक जगह के पास थे, कि राहेल की तबियत खराब हो गई.

  11. जब वह इस प्रसव पीड़ा में ही थी, धाय ने कहा, “डरो मत, अब तो तुम एक और पुत्र को जन्म दे चुकी हो.”

  12. उत्पत्ति ३५:१८लगभग १७२९ ई.पू.

    जब उसके प्राण निकल ही रहे थे, उसने इस पुत्र का नाम बेन-ओनी रखा. किंतु उसके पिता ने उसे बिन्यामिन कहकर पुकारा.

  13. उत्पत्ति ३५:१९लगभग १७२९ ई.पू.

    और वहां इस प्रकार राहेल की मृत्यु हुई तथा उसे एफ़राथा (अर्थात् बेथलेहेम) में दफ़ना दिया.

  14. उत्पत्ति ३५:२०लगभग १७२९ ई.पू.

    याकोब ने उसकी कब्र पर एक स्तंभ खड़ा किया, राहेल की कब्र का यह स्तंभ आज तक वहां स्थित है.

  15. उत्पत्ति ३५:२१लगभग १७२९ ई.पू.

    फिर इस्राएल ने अपनी यात्रा शुरू की और उन्होंने ऐदेर के स्तंभ से आगे बढ़कर तंबू डाला.

  16. उत्पत्ति ३५:२२लगभग १७२९ ई.पू.

    जब इस्राएल उस देश में रह रहे थे, तब रियूबेन ने अपने पिता की रखेल बिलहाह से संभोग किया, जो इस्राएल से छिपा न रहा. याकोब के पुत्र संख्या में बारह थे.

  17. उत्पत्ति ३५:२३लगभग १७२९ ई.पू.

    इनमें लियाह के पुत्र: याकोब का बड़ा बेटा रियूबेन, फिर शिमओन, लेवी, यहूदाह, इस्साखार तथा ज़ेबुलून थे.

  18. उत्पत्ति ३५:२४लगभग १७२९ ई.पू.

    राहेल के पुत्र: योसेफ़ तथा बिन्यामिन.

  19. उत्पत्ति ३५:२५लगभग १७२९ ई.पू.

    राहेल की दासी बिलहाह के पुत्र: दान तथा नफताली.

  20. उत्पत्ति ३५:२६लगभग १७२९ ई.पू.

    लियाह की दासी ज़िलपाह के पुत्र: गाद तथा आशेर. पद्दन-अराम में ही याकोब के ये पुत्र पैदा हुए थे.

  21. उत्पत्ति ३५:२७लगभग १७२९ ई.पू.

    याकोब अपने पिता यित्सहाक के पास पहुंच गए, जो किरयथ-अरबा (अर्थात् हेब्रोन) के ममरे में रहते थे. अब्राहाम तथा यित्सहाक यहीं रहते थे.

  22. उत्पत्ति ३५:२८लगभग १७२९ ई.पू.

    यित्सहाक की आयु एक सौ अस्सी वर्ष की हुई.

  23. उत्पत्ति ३५:२९लगभग १७१६ ई.पू.

    तब उनकी मृत्यु हुई. उनके पुत्र एसाव तथा याकोब ने उन्हें वहीं दफनाया जहां उनके पिता को दफनाया गया था.

  24. उत्पत्ति ३६:१लगभग १७९६ ई.पू.

    एसाव (अर्थात् एदोम) के वंशज इस प्रकार है:

  25. उत्पत्ति ३६:२लगभग १७९६ ई.पू.

    एसाव ने कनान देश की ही कन्याओं से विवाह कर लिया. हित्ती एलोन की पुत्री अदाह, अनाह की पुत्री तथा हिव्वी ज़िबेओन की पौत्री ओहोलिबामाह थे.