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circa 2100–1900 BC

Abraham: The Covenant

God calls Abram from Ur, establishes an everlasting covenant, and promises a son through whom all nations will be blessed.

394 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति १३:६लगभग १९१८ ई.पू.

    पर ज़मीन की कमी के कारण वे दोनों एक साथ न रह पा रहे थे क्योंकि उनके पास बहुत अधिक संपत्ति थी.

  2. उत्पत्ति १३:७लगभग १९१८ ई.पू.

    और अब्राम तथा लोत के चरवाहों के बीच आपस में लड़ाई हो जाती थी. और उस समय उस देश में कनानी एवं परिज्ज़ी लोग भी रहते थे.

  3. उत्पत्ति १३:८लगभग १९१८ ई.पू.

    इसलिये अब्राम ने लोत से कहा, “हम दोनों के बीच और हमारे चरवाहों के बीच झगड़ा न हो, क्योंकि हम एक ही परिवार के हैं.

  4. उत्पत्ति १३:९लगभग १९१८ ई.पू.

    इसलिये हम दोनों अलग हो जाते हैं. यदि तुम बायीं दिशा में जाना चाहते हो, तो मैं दायीं ओर चला जाऊंगा और यदि तुम दायीं दिशा में जाना चाहते हो, तो मैं बायीं ओर चला जाऊंगा.”

  5. उत्पत्ति १३:१०लगभग १९१८ ई.पू.

    लोत ने यरदन नदी व उसके आस-पास की हरियाली को देखा; वह चारों तरफ फैली थी और ज़ोअर की दिशा में यरदन नदी भी पानी से भरी थी. वह याहवेह का बगीचा, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी. (यह याहवेह के द्वारा सोदोम व अमोराह को नाश करने के पहले की बात है.)

  6. उत्पत्ति १३:११लगभग १९१७ ई.पू.

    इसलिये लोत ने यरदन घाटी को जो, पूर्व दिशा की ओर है, चुन लिया. इस प्रकार लोत तथा अब्राम एक दूसरे से अलग हो गए.

  7. उत्पत्ति १३:१२लगभग १९१७ ई.पू.

    अब्राम कनान देश में बस गए तथा लोत यरदन घाटी के नगरों में. लोत ने अपने तंबू सोदोम नगर के निकट खड़े किए.

  8. उत्पत्ति १३:१३लगभग १९१७ ई.पू.

    सोदोम के पुरुष दुष्ट थे और याहवेह की दृष्टि में वे बहुत पापी थे.

  9. उत्पत्ति १३:१४लगभग १९१७ ई.पू.

    लोत से अब्राम के अलग होने के बाद याहवेह ने अब्राम से कहा, “तुम जिस स्थान पर खड़े हो, वहां से चारों ओर देखो.

  10. उत्पत्ति १३:१५लगभग १९१७ ई.पू.

    क्योंकि यह सारी भूमि, जो तुम्हें दिख रही है, मैं तुम्हें तथा तुम्हारे वंश को हमेशा के लिए दूंगा.

  11. उत्पत्ति १३:१६लगभग १९१७ ई.पू.

    मैं तुम्हारे वंश को भूमि की धूल के कण के समान असंख्य बना दूंगा, तब यदि कोई इन कणों को गिन सके, तो तुम्हारे वंश को भी गिन पायेगा.

  12. उत्पत्ति १३:१७लगभग १९१७ ई.पू.

    अब उठो, इस देश की लंबाई और चौड़ाई में चलो फिरो, क्योंकि यह मैं तुम्हें दूंगा.”

  13. उत्पत्ति १३:१८लगभग १९१७ ई.पू.

    इसलिये अब्राम ने हेब्रोन में ममरे के बांज वृक्ष के पास अपने तंबू खड़े किए और उन्होंने वहां याहवेह के लिए एक वेदी बनाई.

  14. उत्पत्ति १४:१लगभग १९१३ ई.पू.

    शीनार देश के राजा अमराफेल, एलासार के राजा आरिओख, एलाम के राजा खेदोरलाओमर और गोईम के राजा तिदाल ने अपने शासनकाल में,

  15. उत्पत्ति १४:२लगभग १९१३ ई.पू.

    एकजुट होकर सोदोम के राजा बेरा, अमोराह के राजा बिरशा, अदमाह के राजा शीनाब, ज़ेबोईम के राजा शेमेबेर तथा बेला (अर्थात् ज़ोअर) के राजा के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया.

  16. उत्पत्ति १४:३लगभग १९१३ ई.पू.

    ये सभी एक साथ होकर सिद्दिम घाटी (अर्थात् लवण-सागर) के पास इकट्‍ठे हो गए.

  17. उत्पत्ति १४:४लगभग १९१३ ई.पू.

    बारह वर्ष तक तो वे खेदोरलाओमर के अधीन रहे, किंतु तेरहवें वर्ष में उन्होंने विरोध किया.

  18. उत्पत्ति १४:५लगभग १९१३ ई.पू.

    चौदहवें वर्ष में खेदोरलाओमर तथा उसके मित्र राजाओं ने आकर अश्तेरोथ-करनाइम में रेफाइम को, हाम में ज़ुज़ीम को, शावेह-किरयथाईम में एमियों को,

  19. उत्पत्ति १४:६लगभग १९१३ ई.पू.

    तथा सेईर पर्वत में निर्जन प्रदेश के पास एल-पारान तक होरियों को भी हरा दिया.

  20. उत्पत्ति १४:७लगभग १९१३ ई.पू.

    इसके बाद वे मुड़े और एन-मिशपत (अर्थात् कादेश) आ गए और पूरे अमालेकियों को तथा हज़ज़ोन-तामार में रह रहे अमोरियों को भी हरा दिया.

  21. उत्पत्ति १४:८लगभग १९१३ ई.पू.

    तब सोदोम, अमोराह, अदमाह, ज़ेबोईम तथा बेला (अर्थात् ज़ोअर) के राजा बाहर निकल गए और उन्होंने सिद्दिम की घाटी में उनके विरुद्ध युद्ध किया.

  22. उत्पत्ति १४:९लगभग १९१३ ई.पू.

    यह लड़ाई एलाम के राजा खेदोरलाओमर, गोईम के राजा तिदाल, शीनार के राजा अमराफेल तथा एलासार के राजा आरिओख—ये चार राजा उन पांच राजाओं से लड़ रहे थे.

  23. उत्पत्ति १४:१०लगभग १९१३ ई.पू.

    सिद्दिम घाटी में सब जगह गड्ढे थे. जब सोदोम तथा अमोराह के राजा युद्ध से भाग रहे थे, तो कुछ लोग गड्ढों में जा गिरे और बाकी बचे लोग पर्वत पर की बस्ती में भाग गए.

  24. उत्पत्ति १४:११लगभग १९१३ ई.पू.

    तब चारों राजाओं ने सोदोम तथा अमोराह से सब कुछ ले लिया और खाने का सब सामान भी ले गए.

  25. उत्पत्ति १४:१२लगभग १९१३ ई.पू.

    वे अपने साथ अब्राम के भतीजे लोत एवं उसकी पूरी संपत्ति भी ले गए, क्योंकि लोत उस समय सोदोम में रह रहा था.