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circa 2100–1900 BC

Abraham: The Covenant

God calls Abram from Ur, establishes an everlasting covenant, and promises a son through whom all nations will be blessed.

394 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति २५:१६लगभग १८२१ ई.पू.

    ये इशमाएल के पुत्र थे, और ये उन बारह जाति के प्रधानों के नाम हैं जो उनके बंदोबस्त और छावनियों के अनुसार रखे गये.

  2. उत्पत्ति २५:१७लगभग १७७३ ई.पू.

    इशमाएल एक सौ सैंतीस वर्ष तक जीवित रहा. तब उसकी मृत्यु हो गई, और वह अपने लोगों में जा मिला.

  3. उत्पत्ति २५:१८लगभग १७७३ ई.पू.

    उसके वंशज मिस्र देश के पूर्वी सीमा के नजदीक अश्शूर की दिशा में हाविलाह से लेकर शूर तक के क्षेत्र में बस गए और वे उनसे संबंधित सभी गोत्रों से बैर रखते थे.

  4. उत्पत्ति २५:१९लगभग १८९६ ई.पू.

    अब्राहाम के पुत्र यित्सहाक की वंशावली इस प्रकार है: अब्राहाम से यित्सहाक का जन्म हुआ.

  5. उत्पत्ति २५:२०लगभग १८५६ ई.पू.

    पद्दन-अरामवासी अरामी बेथुएल की पुत्री और अरामी लाबान की बहन रेबेकाह से विवाह करते समय यित्सहाक की आयु चालीस वर्ष थी.

  6. उत्पत्ति २५:२१लगभग १८३७ ई.पू.

    यित्सहाक ने अपनी पत्नी की ओर से याहवेह से प्रार्थना की, क्योंकि वह बांझ थी. याहवेह ने उसकी प्रार्थना सुन ली और उसकी पत्नी रेबेकाह गर्भवती हुई.

  7. उत्पत्ति २५:२२लगभग १८३६ ई.पू.

    बच्‍चे उसके गर्भ में एक दूसरे को धक्का देते रहते थे. तब रेबेकाह ने कहा, “यह क्या हो रहा है मेरे साथ?” और वह याहवेह से पूछने गई.

  8. उत्पत्ति २५:२३लगभग १८३६ ई.पू.

    याहवेह ने उससे कहा, “तुम्हारे गर्भ में दो जातियां हैं, तुममें से दो जनता के लोग निकलकर अलग होंगे; एक समूह के लोग दूसरे से अधिक बलवान होंगे, और बड़ा छोटे की सेवा करेगा.”

  9. उत्पत्ति २५:२४लगभग १८३६ ई.पू.

    जब उसके प्रसव का समय आया. उसके गर्भ में जुड़वां बच्‍चे थे.

  10. उत्पत्ति २५:२५लगभग १८३६ ई.पू.

    जो पहला बेटा हुआ वह लाल था, और उसका पूरा शरीर बालों से भरा था; इस कारण उसका नाम एसाव रखा गया.

  11. उत्पत्ति २५:२६लगभग १८३६ ई.पू.

    इसके बाद, उसके भाई का जन्म हुआ, जो अपने हाथ से अपने भाई एसाव की एड़ी पकड़े हुए था; तब उसका नाम याकोब रखा गया. जब रेबेकाह ने बच्चों को जन्म दिया, तब यित्सहाक की उम्र साठ वर्ष थी.

  12. उत्पत्ति २५:२७लगभग १८३६ ई.पू.

    दोनों बच्‍चे बड़े होते गये, और एसाव खुले मैदान का एक कुशल शिकारी बन गया, जबकि याकोब घर में तंबुओं के बीच रहकर संतुष्ट रहता था.

  13. उत्पत्ति २५:२८लगभग १८३६ ई.पू.

    एसाव यित्सहाक का प्रिय था क्योंकि यित्सहाक को आखेट का मांस बहुत अच्छा लगता था, पर याकोब रेबेकाह का प्रिय था.

  14. उत्पत्ति २५:२९लगभग १८०५ ई.पू.

    एक बार जब याकोब धीमी आंच में कुछ पका रहा था, तब एसाव बाहर मैदान से आया और वह बहुत भूखा था.

  15. उत्पत्ति २५:३०लगभग १८०५ ई.पू.

    उसने याकोब से कहा, “मुझे बहुत भूख लगी है; तुम जो पका रहे हो, जल्दी करके उसमें से मुझे कुछ खाने को दो.” (यही कारण है कि उसे एदोम भी कहा गया.)

  16. उत्पत्ति २५:३१लगभग १८०५ ई.पू.

    किंतु याकोब ने उससे कहा, “पहले आप अपने पहलौठे का अधिकार मुझे दे दो.”

  17. उत्पत्ति २५:३२लगभग १८०५ ई.पू.

    एसाव ने कहा, “देख, भूख से मेरे प्राण निकल रहे हैं; पहलौठे के अधिकार से मुझे क्या फायदा है?”

  18. उत्पत्ति २५:३३लगभग १८०५ ई.पू.

    पर याकोब ने कहा, “तो पहले आप मुझसे शपथ खाईये.” तब एसाव ने शपथ खाकर अपने पहलौठे का अधिकार याकोब के हाथ बेच दिया.

  19. उत्पत्ति २५:३४लगभग १८०५ ई.पू.

    तब याकोब ने एसाव को कुछ रोटी और पकाई हुई दाल दी. एसाव ने खाया पिया, और उठकर चला गया. इस प्रकार एसाव ने अपने पहलौठे के अधिकार को तुच्छ समझा.