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circa 2100–1900 BC

Abraham: The Covenant

God calls Abram from Ur, establishes an everlasting covenant, and promises a son through whom all nations will be blessed.

394 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति १५:१४लगभग १९११ ई.पू.

    फिर जिस देश के वे दास होंगे, उस देश के लोगों को मैं दंड दूंगा, फिर तुम्हारे वंश के लोग वहां से बहुत धन लेकर निकलेंगे.

  2. उत्पत्ति १५:१५लगभग १९११ ई.पू.

    पर तुम्हारा अंत बहुत शांति से होगा और तुम अपनी पूरे बुढ़ापे की आयु में अपने पुरखों के पास दफनाए जाओगे.

  3. उत्पत्ति १५:१६लगभग १९११ ई.पू.

    तुम्हारा वंश, चौथी पीढ़ी में यहां फिर लौट आयेगा, क्योंकि अमोरियों का अधर्म अब तक पूरा नहीं हुआ.”

  4. उत्पत्ति १५:१७लगभग १९११ ई.पू.

    शाम ढलकर रात बहुत हो गई थी तब एक अंगीठी जिससे धुआं निकल रहा था और उसमें से एक जलता हुआ पतीला उन टुकड़ों के बीच में से गुजरा.

  5. उत्पत्ति १५:१८लगभग १९११ ई.पू.

    और उसी दिन याहवेह ने अब्राम से एक वाचा बांधी और कहा, “मैं तुम्हारे वंश को मिस्र के नदी से लेकर फरात महानदी तक दूंगा,

  6. उत्पत्ति १५:१९लगभग १९११ ई.पू.

    जो कि केनी, कनिज्ज़ी, कदमोनी,

  7. उत्पत्ति १५:२०लगभग १९११ ई.पू.

    हित्ती, परिज्ज़ी, रेफाइम,

  8. उत्पत्ति १५:२१लगभग १९११ ई.पू.

    अमोरी, कनानी, गिर्गाशी तथा यबूसियों का देश है.”

  9. उत्पत्ति १६:१लगभग १९१२ ई.पू.

    अब्राम की पत्नी सारय निःसंतान थी. उसकी हागार नामक एक दासी थी, जो मिस्री थी;

  10. उत्पत्ति १६:२लगभग १९१२ ई.पू.

    सारय ने अब्राम से कहा, “मैं तो मां नहीं बन सकती क्योंकि मैं बांझ हूं इसलिये कृपा करके आप मेरी दासी को स्वीकारें, संभवतः उसके द्वारा संतान का सुख पा सकूं.” अब्राम ने सारय के इस बात को मान लिया.

  11. उत्पत्ति १६:३लगभग १९११ ई.पू.

    अब्राम को कनान देश में रहते हुए दस साल हो चुके थे. अब्राम की पत्नी सारय ने अपनी दासी हागार को अब्राम की पत्नी होने के लिए उनको सौंप दिया.

  12. उत्पत्ति १६:४लगभग १९११ ई.पू.

    अब्राम ने हागार के साथ शारीरिक संबंध बनाए; इस प्रकार हागार गर्भवती हुई तब हागार सारय को तुच्छ समझने लगी.

  13. उत्पत्ति १६:५लगभग १९११ ई.पू.

    सारय ने अब्राम से कहा, “मेरे साथ हो रहे उपद्रव का कारण आप हैं. मैंने अपनी दासी को केवल वारिस पाने के लिए आपको सौंपा था लेकिन हागार गर्भवती होते ही मुझे तुच्छ समझने लगी. अब याहवेह ही आपके तथा मेरे बीच न्याय करें.”

  14. उत्पत्ति १६:६लगभग १९११ ई.पू.

    अब्राम ने सारय से कहा, “सुनो, तुम्हारी दासी पर तुम्हारा ही अधिकार है. तुम जैसा चाहो उसके साथ करो.” तब सारय हागार को तंग करने लगी. हागार परेशान होकर सारय के सामने से भाग गई.

  15. उत्पत्ति १६:७लगभग १९११ ई.पू.

    जब याहवेह के दूत ने उसे निर्जन प्रदेश में एक सोते के पास देखा जो शूर के मार्ग पर था.

  16. उत्पत्ति १६:८लगभग १९११ ई.पू.

    तब स्वर्गदूत ने उससे पूछा, “हे सारय की दासी हागार, तुम कहां से आ रही हो? और कहां जा रही हो?” हागार ने उत्तर दिया, “मैं अपनी स्वामिनी सारय के पास से भागकर आई हूं.”

  17. उत्पत्ति १६:९लगभग १९११ ई.पू.

    याहवेह के दूत ने कहा, “अपनी स्वामिनी के पास वापस चली जाओ और उसके अधीन में रहो.”

  18. उत्पत्ति १६:१०लगभग १९११ ई.पू.

    और याहवेह के दूत ने कहा, “मैं तुम्हारे वंश को बहुत बढाऊंगा, इतना कि उनकी गिनती करना मुश्किल होगा.”

  19. उत्पत्ति १६:११लगभग १९११ ई.पू.

    याहवेह के दूत ने यह भी कहा: “देखो, तुम गर्भवती होगी और एक पुत्र को जन्म दोगी. उसका नाम तुम इशमाएल रखना, क्योंकि याहवेह ने तुम्हारे रोना सुना है.

  20. उत्पत्ति १६:१२लगभग १९११ ई.पू.

    वह जंगली गधे की प्रकृति का पुरुष होगा; सभी से उसकी दुश्मनी होगी और सबको उससे दुश्मनी होगी, और वह अपने संबंधियों के साथ शत्रुतापूर्ण वातावरण में जीवन व्यतीत करेगा.”

  21. उत्पत्ति १६:१३लगभग १९११ ई.पू.

    तब हागार ने याहवेह का जिन्होंने उससे बात की थी, यह नाम रखा: “अत्ता-एल-रोई,” (अर्थात् आप मुझे देखनेवाला परमेश्वर हैं) उसने यह भी कहा, “मैंने अब उसको देखा है जो मुझे देखता है.”

  22. उत्पत्ति १६:१४लगभग १९११ ई.पू.

    इस घटना के कारण उस कुएं का नाम बएर-लहाई-रोई पड़ा, जो कादेश तथा बेरेद के बीच में है.

  23. उत्पत्ति १६:१५लगभग १९१० ई.पू.

    अब्राम से हागार का एक बेटा हुआ तथा अब्राम ने हागार से जन्मे अपने इस बेटे का नाम इशमाएल रखा.

  24. उत्पत्ति १६:१६लगभग १९१० ई.पू.

    अब्राम छियासी वर्ष के थे, जब इशमाएल पैदा हुआ.

  25. उत्पत्ति १७:१लगभग १८९७ ई.पू.

    जब अब्राम निन्यानबे वर्ष के हुए तब याहवेह उन पर प्रकट हुए और उनसे कहा, “मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूं; तुम मेरे सामने विश्वासयोग्यता से चलो और निर्दोष रहो.