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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. रोमियों १५:२८लगभग ६० ई.

    इसलिये अपने कर्तव्य को पूरा कर जब मैं निश्चित हो जाऊंगा कि उन्हें यह राशि प्राप्‍त हो गई है, मैं स्पेन की ओर जाऊंगा तथा मार्ग में तुमसे भेंट करूंगा.

  2. रोमियों १५:२९लगभग ६० ई.

    यह तो मुझे मालूम है कि जब मैं तुमसे भेंट करूंगा, मेरे साथ मसीह येशु की आशीष पूरी तरह होंगी.

  3. रोमियों १५:३०लगभग ६० ई.

    अब, प्रिय भाई बहिनो, हमारे प्रभु येशु मसीह तथा पवित्र आत्मा के प्रेम के द्वारा तुमसे मेरी विनती है कि मेरे साथ मिलकर परमेश्वर से मेरे लिए प्रार्थनाओं में जुट जाओ

  4. रोमियों १५:३१लगभग ६० ई.

    कि मैं यहूदिया प्रदेश के अविश्वासी व्यक्तियों की योजनाओं से बच सकूं तथा येरूशलेम के पवित्र लोगों के प्रति मेरी सेवा उन्हें स्वीकार हो

  5. रोमियों १५:३२लगभग ६० ई.

    कि मैं परमेश्वर की इच्छा के द्वारा तुमसे आनंदपूर्वक भेंट कर सकूं तथा तुम्हारी संगति मेरे लिए एक सुखद विश्राम हो जाए.

  6. रोमियों १५:३३लगभग ६० ई.

    शांति के परमेश्वर तुम सबके साथ रहें. आमेन.

  7. रोमियों १६:१लगभग ६० ई.

    मैं, हमारी बहन फ़ोइबे को, जो केनख्रेया नगर की कलीसिया की विश्वस्त सेविका है.

  8. रोमियों १६:२लगभग ६० ई.

    जैसा पवित्र लोगों के लिए सही है, प्रभु में उसे स्वीकार कर उसे जिस किसी रूप में भी सहायता की ज़रूरत हो, प्रदान करो. स्वयं उसने अनेकों की सहायता की है तथा मेरी भी.

  9. रोमियों १६:३लगभग ६० ई.

    मसीह येशु में मेरे सहसेवकों प्रिस्का तथा अकुलॉस को मेरा नमस्कार.

  10. रोमियों १६:४लगभग ६० ई.

    उन्होंने मेरे हित में अपने प्राण जोख़िम में डाले थे. न केवल मैं परंतु गैर-यहूदियों की सभी कलीसियाएं उनकी ऋणी हैं.

  11. रोमियों १६:५लगभग ६० ई.

    उस कलीसिया को नमस्कार, जो उनके घर में इकट्ठा होती है. मेरे प्रिय मित्र ईपाएनेतॉस को नमस्कार. आसिया प्रदेश में उसी ने सबसे पहले मसीह को स्वीकार किया था.

  12. रोमियों १६:६लगभग ६० ई.

    मरियम को नमस्कार. उसने तुम्हारे लिए बहुत परिश्रम किया है.

  13. रोमियों १६:७लगभग ६० ई.

    आन्द्रोनिकॉस तथा यूनियस को नमस्कार. ये मेरे संबंधी तथा सहबंदी हैं. प्रेरितों में इनका स्थान वर्णनीय है. ये भी मुझसे पहले मसीह में आ चुके थे.

  14. रोमियों १६:८लगभग ६० ई.

    प्रभु में मेरे प्रिय आम्पलियातॉस को नमस्कार.

  15. रोमियों १६:९लगभग ६० ई.

    मसीह में हमारे सहकर्मी अरबानस को नमस्कार और मेरे प्रिय स्ताख़ुस को भी.

  16. रोमियों १६:१०लगभग ६० ई.

    मसीह में प्रमाणित तथा स्वीकृत अपेल्लेस को नमस्कार. आरिस्तोबुलस के परिजनों को नमस्कार.

  17. रोमियों १६:११लगभग ६० ई.

    मेरे संबंधी हेरोदियॉन को नमस्कार. नारकिसस के परिजनों में से उन्हें, जो प्रभु के अनुगामी हैं, नमस्कार.

  18. रोमियों १६:१२लगभग ६० ई.

    प्रभु के कर्मी त्रिफेना तथा त्रुफ़ोसा को नमस्कार. मेरे प्रिय परसिस को नमस्कार. उसने प्रभु में अथक परिश्रम किया है.

  19. रोमियों १६:१३लगभग ६० ई.

    प्रभु के चुने हुए व्यक्ति रूफ़ॉस को नमस्कार तथा उसकी माता को भी, जो मेरी भी माता हैं.

  20. रोमियों १६:१४लगभग ६० ई.

    आसुन्क्रितॉस, फ़्लेगॉन, हेर्मेस, पात्रोबस, हेर्मेस तथा उनके सहयोगी भाई बहिनों को नमस्कार.

  21. रोमियों १६:१५लगभग ६० ई.

    फ़िलोलोगॉस तथा यूलिया, नेरेयुस, उसकी बहन तथा ओलुम्पस तथा उनके साथ सभी पवित्र लोगों को नमस्कार.

  22. रोमियों १६:१६लगभग ६० ई.

    तुम्हारा पारस्परिक नमस्कार पवित्र चुंबन के साथ हो. मसीह की सभी कलीसियाओं की ओर से तुम्हें नमस्कार.

  23. रोमियों १६:१७लगभग ६० ई.

    प्रिय भाई बहिनो, मेरी तुमसे विशेष विनती है कि उन पर विशेष ध्यान दो, जो तुम्हारे बीच फूट डालते तथा तुम्हें दी गई शिक्षा के मार्ग में बाधा उत्पन्‍न करते रहते हैं. उनसे दूर रहो.

  24. रोमियों १६:१८लगभग ६० ई.

    ये लोग हमारे प्रभु येशु मसीह के नहीं परंतु अपनी ही लालसाओं के दास हैं. अपनी चिकनी-चुपड़ी तथा चतुराई से की गई बातचीत के द्वारा वे भोले-भाले लोगों को भटका देते हैं.

  25. रोमियों १६:१९लगभग ६० ई.

    सभी तुम्हारी आज्ञाकारिता के विषय में सुन चुके हैं. यह मेरे लिए आनंद का विषय है. फिर भी मेरी यह इच्छा है कि तुम भलाई के प्रति बुद्धिमान तथा बुराई के प्रति भोले बने रहो.