मुख्य सामग्री पर जाएँ

circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. रोमियों १६:२०लगभग ६० ई.

    शांति के परमेश्वर शीघ्र ही शैतान को तुम्हारे पांवों के नीचे कुचल देंगे. हमारे प्रभु येशु मसीह का अनुग्रह तुम पर बना रहे.

  2. रोमियों १६:२१लगभग ६० ई.

    मेरे सहकर्मी तिमोथियॉस का नमस्कार. वैसे ही मेरे परिजन लुकियॉस, यासोन तथा सोसिपात्रॉस का भी.

  3. रोमियों १६:२२लगभग ६० ई.

    इस पत्र के लिखनेवाले, तेर्तियॉस का तुम्हें प्रभु में नमस्कार.

  4. रोमियों १६:२३लगभग ६० ई.

    गायॉस का, जिसके यहां मैं अतिथि हूं और जिसके घर पर कलीसिया आराधना करती है, तुम्हें नमस्कार. नगर कोषाध्यक्ष इरास्तुस तथा संगी विश्वासी क्वार्तोस का भी तुम्हें नमस्कार. [

  5. रोमियों १६:२४लगभग ६० ई.

    हमारे प्रभु येशु मसीह का अनुग्रह तुम पर बना रहे. आमेन.]

  6. रोमियों १६:२५लगभग ६० ई.

    अब उस परमेश्वर को, जो तुमको मेरे सुसमाचार और मसीह येशु के प्रचार द्वारा और सशक्त कर सकता, उस भेद के प्रकाशन के अनुसार, जो सनातन से छिपाकर रखा गया था;

  7. रोमियों १६:२६लगभग ६० ई.

    जिसे अब परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार भविष्यद्वक्ताओं के अभिलेखों द्वारा सभी राष्ट्रों पर प्रकट कर दिया गया है कि इसके द्वारा वे विश्वास की आज्ञाकारिता की ओर आगे बढ़ें.

  8. रोमियों १६:२७लगभग ६० ई.

    मसीह येशु के द्वारा उन एकमात्र ज्ञानी परमेश्वर की महिमा सदा-सर्वदा होती रहे! आमेन.

  9. 1 कोरिंथ १:१लगभग ५९ ई.

    परमेश्वर की इच्छा के अनुसार मसीह येशु के लिए बुलाए गए प्रेरित पौलॉस तथा हमारे भाई सोस्थेनेस की ओर से.

  10. 1 कोरिंथ १:२लगभग ५९ ई.

    कोरिन्थॉस नगर में स्थापित परमेश्वर की कलीसिया को वे, जो मसीह येशु में पवित्र किए गए हैं तथा जिनका उन सबके समान, जो हर जगह हमारे तथा उनके प्रभु येशु मसीह की स्तुति करते हैं, पवित्र लोगों के रूप में बुलाये गये हैं:

  11. 1 कोरिंथ १:३लगभग ५९ ई.

    तुम सबको हमारे पिता परमेश्वर तथा प्रभु येशु मसीह की ओर से अनुग्रह तथा शांति.

  12. 1 कोरिंथ १:४लगभग ५९ ई.

    मसीह येशु में तुम्हें दिए गए परमेश्वर के अनुग्रह के लिए मैं तुम्हारे लिए परमेश्वर के प्रति निरंतर धन्यवाद करता हूं.

  13. 1 कोरिंथ १:५लगभग ५९ ई.

    क्योंकि तुम मसीह येशु में सब प्रकार से सम्पन्‍न किए गए हो, सारे ज्ञान और उसकी हर बात में;

  14. 1 कोरिंथ १:६लगभग ५९ ई.

    ठीक जिस प्रकार तुममें मसीह येशु के संदेश की पुष्टि भी हुई है.

  15. 1 कोरिंथ १:७लगभग ५९ ई.

    परिणामस्वरूप इस समय, जब तुम हमारे प्रभु येशु मसीह के प्रकट होने की उत्सुकतापूर्वक प्रतीक्षा कर रहे हो, तुममें पवित्र आत्मा के द्वारा किसी भी आत्मिक क्षमता का अभाव नहीं है.

  16. 1 कोरिंथ १:८लगभग ५९ ई.

    वही मसीह येशु तुम्हें अंत तक दृढ़ बनाए रखेंगे कि तुम हमारे प्रभु येशु मसीह के दिन निर्दोष पाए जाओ.

  17. 1 कोरिंथ १:९लगभग ५९ ई.

    परमेश्वर विश्वासयोग्य हैं, जिनके द्वारा तुम्हारा बुलावा उनके पुत्र, मसीह येशु हमारे प्रभु की संगति में किया गया है.

  18. 1 कोरिंथ १:१०लगभग ५९ ई.

    प्रिय भाई बहिनो, अपने प्रभु येशु मसीह के नाम में मेरी तुमसे विनती है, कि तुममें आपसी मेल हो, फूट कहीं भी न हो, तुम मन तथा मत में एक हो.

  19. 1 कोरिंथ १:११लगभग ५९ ई.

    क्योंकि तुम्हारे विषय में, प्रिय भाई बहिनो, क्लोए परिवार के कुछ सदस्यों द्वारा मुझे यह संकेत दिया गया है कि तुम्हारे मध्य झगड़ा चल रहा है.

  20. 1 कोरिंथ १:१२लगभग ५९ ई.

    मेरे कहने का मतलब यह है कि तुममें हर एक का मत अलग है: कोई कहता है, “मैं पौलॉस का शिष्य हूं,” कोई, “मैं अपोल्लॉस का,” तो कोई, “मैं कैफ़स का,” या “मैं मसीह का शिष्य हूं.”

  21. 1 कोरिंथ १:१३लगभग ५९ ई.

    क्या मसीह का बंटवारा कर दिया गया है? क्या तुम्हारे लिए पौलॉस को क्रूसित किया गया था? या तुम्हारा बपतिस्मा पौलॉस के नाम में किया गया था?

  22. 1 कोरिंथ १:१४लगभग ५९ ई.

    मैं परमेश्वर का आभारी हूं कि क्रिस्पॉस तथा गायॉस के अतिरिक्त तुममें से किसी को भी मैंने बपतिस्मा नहीं दिया,

  23. 1 कोरिंथ १:१५लगभग ५९ ई.

    कि कोई भी यह न कह पाए कि तुम्हें मेरे नाम में बपतिस्मा दिया गया.

  24. 1 कोरिंथ १:१६लगभग ५९ ई.

    (हां, मैंने स्तेफ़ानॉस के परिवार को भी बपतिस्मा दिया है किंतु इसके अलावा मैंने किसी अन्य को बपतिस्मा दिया हो, इसका मुझे ध्यान नहीं.)

  25. 1 कोरिंथ १:१७लगभग ५९ ई.

    मसीह येशु ने मुझे बपतिस्मा देने के लिए नहीं परंतु ईश्वरीय सुसमाचार प्रचार के लिए चुना है—वह भी शब्दों के ज्ञान के अनुसार नहीं, ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस उसकी सामर्थ्य से व्यर्थ हो जाए.