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circa AD 48–96
Letters to the Churches
Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.
इस काल के वचन
- रोमियों १५:३लगभग ६० ई.
क्योंकि मसीह ने अपने आपको प्रसन्न नहीं किया जैसा कि पवित्र शास्त्र का लेख है: उनकी निंदा, जो आपके निंदक हैं, मुझ पर आ पड़ी है.
- रोमियों १५:४लगभग ६० ई.
पहले समय के सभी अभिलेख हमें शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखे गए कि निरंतर प्रयास तथा पवित्र शास्त्र के प्रोत्साहन द्वारा हममें आशा का अनुभव हो.
- रोमियों १५:५लगभग ६० ई.
परमेश्वर, जो धीरज और प्रोत्साहन के दाता है, तुममें मसीह येशु के अनुरूप आपस में एकता का भाव उत्पन्न करें
- रोमियों १५:६लगभग ६० ई.
कि तुम एक मन और एक शब्द में परमेश्वर, हमारे प्रभु येशु मसीह के पिता का धन्यवाद और महिमा करो.
- रोमियों १५:७लगभग ६० ई.
इसलिये एक दूसरे को स्वीकार करो—ठीक जिस प्रकार मसीह ने परमेश्वर की महिमा के लिए हमें स्वीकार किया है.
- रोमियों १५:८लगभग ६० ई.
सुनो, परमेश्वर की सच्चाई की पुष्टि करने के लिए मसीह येशु ख़तना किए हुए लोगों के सेवक बन गए कि पूर्वजों से की गई प्रतिज्ञाओं की पुष्टि हो
- रोमियों १५:९लगभग ६० ई.
तथा गैर-यहूदी परमेश्वर की कृपादृष्टि के लिए उनकी महिमा करें, जैसा कि पवित्र शास्त्र का लेख है: इसलिये मैं गैर-यहूदियों के बीच आपका धन्यवाद करूंगा; मैं आपके नाम का गुणगान करूंगा.
- रोमियों १५:१०लगभग ६० ई.
फिर लिखा है: गैर-यहूदियों! परमेश्वर की प्रजा के साथ मिलकर आनंद करो.
- रोमियों १५:११लगभग ६० ई.
और यह भी: सभी गैर-यहूदियों! तुम प्रभु का धन्यवाद करो; सभी जनता उनका धन्यवाद करें.
- रोमियों १५:१२लगभग ६० ई.
भविष्यवक्ता यशायाह ने भी कहा: यिशै की जड़ में कोपलें होंगी, तथा वह, जो उठेगा, गैर-यहूदियों पर शासन करेगा; वह सभी गैर-यहूदियों की आशा होगा.
- रोमियों १५:१३लगभग ६० ई.
परमेश्वर, जो आशा के स्रोत हैं, तुम्हारे विश्वास करने में तुम्हें सारे आनंद और शांति से भर दें, कि तुम पवित्र आत्मा के सामर्थ्य के द्वारा आशा में बढ़ते जाओ.
- रोमियों १५:१४लगभग ६० ई.
प्रिय भाई बहिनो, तुम्हारे विषय में स्वयं मैं भी निश्चित हूं कि तुम भी सर्वगुणसम्पन्न, सभी ज्ञान से भरकर तथा एक दूसरे को कर्तव्य की याद दिलाने में पूरी तरह सक्षम हो.
- रोमियों १५:१५लगभग ६० ई.
फिर भी मैंने कुछ विषयों पर तुम्हें साहस करके लिखा है कि तुम्हें इनका दोबारा स्मरण दिला सकूं. यह इसलिये कि मुझे परमेश्वर के द्वारा अनुग्रह प्रदान किया गया
- रोमियों १५:१६लगभग ६० ई.
कि मैं परमेश्वर के ईश्वरीय सुसमाचार के पुरोहित के रूप में गैर-यहूदियों के लिए मसीह येशु का सेवक बनूं कि गैर-यहूदी पवित्र आत्मा के द्वारा अलग किए जाकर परमेश्वर के लिए ग्रहण योग्य भेंट बन जाएं.
- रोमियों १५:१७लगभग ६० ई.
अब मेरे पास मसीह येशु में परमेश्वर संबंधित विषयों पर गर्व करने का कारण है.
- रोमियों १५:१८लगभग ६० ई.
मैं मात्र उन विषयों का वर्णन करना चाहूंगा, जो मसीह येशु ने मुझे माध्यम बनाकर मेरे प्रचार के द्वारा पूरे किए, जिसका परिणाम हुआ गैर-यहूदियों की आज्ञाकारिता.
- रोमियों १५:१९लगभग ६० ई.
ये सब अद्भुत चिह्नों तथा परमेश्वर के आत्मा के सामर्थ्य में किए गए कि येरूशलेम से लेकर सुदूर इल्लिरिकुम तक मसीह येशु के ईश्वरीय सुसमाचार का प्रचार किया जाए.
- रोमियों १५:२०लगभग ६० ई.
स्वयं मेरी बड़ी इच्छा तो यही रही है कि ईश्वरीय सुसमाचार का प्रचार उन्हीं क्षेत्रों में हो, जहां मसीह येशु के विषय में अब तक सुना नहीं गया कि मैं किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रखी गई नींव पर निर्माण न कर बैठूं.
- रोमियों १५:२१लगभग ६० ई.
जैसा पवित्र शास्त्र का लेख है: वे, जिन्होंने उनका समाचार प्राप्त नहीं किया, उन्हें देखेंगे तथा वे, जिन्होंने कुछ भी नहीं सुना, समझ लेंगे.
- रोमियों १५:२२लगभग ६० ई.
यही वह कारण है कि तुमसे भेंट करने के लिए मेरे आने में बाधा पड़ती रही.
- रोमियों १५:२३लगभग ६० ई.
अब इन देशों में मेरे सामने कोई स्थान बाकी नहीं रहा और अनेक वर्षों से मेरी यह इच्छा भी रही है कि तुमसे भेंट करूं.
- रोमियों १५:२४लगभग ६० ई.
मेरे लिए यह संभव हो सकेगा जब मैं स्पेन यात्रा को जाऊंगा. मुझे आशा है कि जाते हुए तुमसे भेंट हो तथा थोड़े समय के लिए तुम्हारी संगति का आनंद लूं और तुम्हारी सहायता भी प्राप्त कर सकूं
- रोमियों १५:२५लगभग ६० ई.
किंतु इस समय तो मैं येरूशलेम के पवित्र लोगों की सहायता के लिए येरूशलेम की ओर जा रहा हूं.
- रोमियों १५:२६लगभग ६० ई.
मकेदोनिया तथा आखाया प्रदेश की कलीसियाएं येरूशलेम के निर्धन पवित्र लोगों की सहायता के लिए खुशी से सामने आई.
- रोमियों १५:२७लगभग ६० ई.
सच मानो, उन्होंने यह खुशी से किया है. वे येरूशलेम वासियों के कर्ज़दार हैं क्योंकि जब गैर-यहूदियों ने उनसे आत्मिक धन प्राप्त किया है तो यह उचित ही है कि अब वे भौतिक वस्तुओं द्वारा भी उनकी सहायता करें.