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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ३७:१०लगभग १७२८ ई.पू.

    यह स्वप्न योसेफ़ ने अपने पिता एवं भाइयों को बताया, जिसे सुन उनके पिता ने उसे डांटते हुए कहा, “यह कैसा स्वप्न देखते हो तुम! क्या यह वास्तव में संभव है कि मैं, तुम्हारी माता एवं तुम्हारे भाई तुम्हारे पास आएंगे और तुम्हें प्रणाम करेंगे?”

  2. उत्पत्ति ३७:११लगभग १७२८ ई.पू.

    योसेफ़ के भाई उससे लगातार ईर्ष्या करते रहे. किंतु योसेफ़ के पिता ने इन सभी बातों को अपने मन में रखा.

  3. उत्पत्ति ३७:१२लगभग १७२८ ई.पू.

    योसेफ़ के भाई अपने पिता की भेड़-बकरियों को चराने के लिए शेकेम गए थे.

  4. उत्पत्ति ३७:१३लगभग १७२८ ई.पू.

    इस्राएल ने योसेफ़ से कहा, “तुम्हारे भाई शेकेम में भेड़-बकरी चरा रहे हैं न? मैं तुम्हें उनके पास भेजना चाहता हूं.” योसेफ़ ने कहा, “मैं चला जाता हूं.”

  5. उत्पत्ति ३७:१४लगभग १७२८ ई.पू.

    याकोब ने योसेफ़ से कहा, “तुम जाओ और अपने भाइयों का हाल पता करके आओ और मुझे बताओ.” योसेफ़ को याकोब ने हेब्रोन घाटी से रवाना किया. और योसेफ़ शेकेम पहुंचे,

  6. उत्पत्ति ३७:१५लगभग १७२८ ई.पू.

    जब योसेफ़ एक मैदान में इधर-उधर देख रहे थे, तब एक व्यक्ति उन्हें मिला, जिसने उससे पूछा, “क्या ढूंढ़ रहे हो तुम?”

  7. उत्पत्ति ३७:१६लगभग १७२८ ई.पू.

    योसेफ़ ने कहा, “मैं अपने भाइयों को ढूंढ़ रहा हूं. क्या आप कृपा कर मुझे बताएंगे वे अपनी भेड़-बकरियां कहां चरा रहे हैं?”

  8. उत्पत्ति ३७:१७लगभग १७२८ ई.पू.

    उस व्यक्ति ने कहा, “वे तो यहां से जा चुके हैं, क्योंकि मैंने उन्हें यह कहते सुना था, ‘चलो, अब दोथान जायें.’ ” इसलिये योसेफ़ अपने भाइयों को ढूंढ़ते दोथान पहुंचे.

  9. उत्पत्ति ३७:१८लगभग १७२८ ई.पू.

    जब भाइयों ने दूर से योसेफ़ को आते देखा, उसके नज़दीक आने के पहले ही उन्होंने उसको मार डालने का विचार किया.

  10. उत्पत्ति ३७:१९लगभग १७२८ ई.पू.

    उन्होंने कहा, “यह लो, आ गया स्वप्न देखनेवाला!

  11. उत्पत्ति ३७:२०लगभग १७२८ ई.पू.

    चलो, उसकी हत्या कर यहां किसी गड्ढे में फेंक दें, और हम कह देंगे, कि उसे किसी जंगली जानवर ने खा लिया; फिर हम देखते हैं उसके स्वप्न का क्या होता है.”

  12. उत्पत्ति ३७:२१लगभग १७२८ ई.पू.

    किंतु रियूबेन योसेफ़ को बचाना चाहता था. इसलिये रियूबेन ने कहा “हम योसेफ़ को जान से नहीं मारेंगे;

  13. उत्पत्ति ३७:२२लगभग १७२८ ई.पू.

    बल्कि हम उसे बंजर भूमि के किसी गड्ढे में डाल देते हैं,” रियूबेन ने ऐसा इसलिये कहा कि वह योसेफ़ को बचाकर पिता को सौंप देना चाहता था.

  14. उत्पत्ति ३७:२३लगभग १७२८ ई.पू.

    जैसे ही योसेफ़ अपने भाइयों के पास आये, उन्होंने योसेफ़ का रंग बिरंगा वस्त्र, जो वह पहने हुए थे उतार दिया,

  15. उत्पत्ति ३७:२४लगभग १७२८ ई.पू.

    और योसेफ़ को एक सूखे गड्ढे में डाल दिया, गड्ढा खाली था; उसमें पानी नहीं था.

  16. उत्पत्ति ३७:२५लगभग १७२८ ई.पू.

    यह करके वे भोजन करने बैठे. तभी उन्होंने देखा कि गिलआद की ओर से इशमाएलियों का एक समूह आ रहा था. उनके ऊंटों पर सुगंध गोंद, बलसान तथा गन्धरस लदे हुए थे. यह सब वे मिस्र ले जा रहे थे.

  17. उत्पत्ति ३७:२६लगभग १७२८ ई.पू.

    यहूदाह ने अपने भाइयों से कहा, “अपने भाई की हत्या कर उसे छुपाने से हमें कुछ नहीं मिलेगा.

  18. उत्पत्ति ३७:२७लगभग १७२८ ई.पू.

    हम इसे इन इशमाएलियों को बेच दें. हम इसकी हत्या न करें; अंततः वह हमारा भाई ही है, हमारा अपना खून.” भाइयों को यह बात ठीक लगी.

  19. उत्पत्ति ३७:२८लगभग १७२८ ई.पू.

    उसी समय कुछ मिदियानी व्यापारी वहां से निकले, तब उन्होंने उनकी सहायता से योसेफ़ को गड्ढे से ऊपर खींच निकाला और उसे इशमाएलियों को बीस चांदी के सिक्कों में बेच दिया.

  20. उत्पत्ति ३७:२९लगभग १७२८ ई.पू.

    जब रियूबेन उस गड्ढे पर लौटा, तब उसने देखा कि योसेफ़ वहां नहीं हैं. यह देख उसने अपने वस्त्र फाड़ लिए.

  21. उत्पत्ति ३७:३०लगभग १७२८ ई.पू.

    उसने अपने भाइयों के पास जाकर पूछा, “वह तो वहां नहीं हैं! मुझे समझ नहीं आ रहा, अब मैं क्या करूं?”

  22. उत्पत्ति ३७:३१लगभग १७२८ ई.पू.

    भाइयों ने एक बकरी को मारा और उसके खून में योसेफ़ के सुंदर अंगरखे को डुबो दिया

  23. उत्पत्ति ३७:३२लगभग १७२८ ई.पू.

    और उस वस्त्र को अपने पिता के पास ले जाकर कहा, “हमें यह वस्त्र मिला; क्या यह आपके पुत्र का वस्त्र तो नहीं?”

  24. उत्पत्ति ३७:३३लगभग १७२८ ई.पू.

    याकोब ने वस्त्र देखकर कहा, “यह मेरे पुत्र का ही वस्त्र है. किसी जंगली पशु ने उसे खा लिया है.”

  25. उत्पत्ति ३७:३४लगभग १७२८ ई.पू.

    तब याकोब ने अपने वस्त्र फाड़े, टाट पहन लिए और कई दिनों तक अपने बेटे के लिए रोते रहे.