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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ३७:३५लगभग १७२८ ई.पू.

    सबने याकोब को दिलासा देने की कोशिश की, पर याकोब का दुःख कम न हुआ, और वे योसेफ़ के लिए रोते ही रहे. याकोब ने कहा, “मैं मरने के दिन तक (शीयोल तक) अपने पुत्र योसेफ़ के शोक में डूबा रहूंगा.”

  2. उत्पत्ति ३७:३६लगभग १७२८ ई.पू.

    वहां, मिदियानियों ने मिस्र पहुंचकर योसेफ़ को पोतिफर को बेच दिया, जो फ़रोह का एक अधिकारी, अंगरक्षकों का प्रधान था.

  3. उत्पत्ति ३८:१लगभग १७३९ ई.पू.

    जब उन्हीं दिनों यहूदाह अपने भाइयों के बीच से निकलकर हीराह नामक अदुल्लामवासी व्यक्ति के साथ रहने चले गये.

  4. उत्पत्ति ३८:२लगभग १७३९ ई.पू.

    तब शुआ नामक एक कनानी व्यक्ति की पुत्री से मिले और उन्होंने उससे विवाह कर लिया और उससे प्रेम किया;

  5. उत्पत्ति ३८:३लगभग १७३८ ई.पू.

    और उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका एर नाम रखा.

  6. उत्पत्ति ३८:४लगभग १७३७ ई.पू.

    उसने एक और पुत्र को जन्म दिया और उसका नाम ओनान रखा.

  7. उत्पत्ति ३८:५लगभग १७३६ ई.पू.

    उसने एक और पुत्र को जन्म दिया, जिसका शेलाह नाम रखा. तब यहूदाह केज़ीब में रहते थे.

  8. उत्पत्ति ३८:६लगभग १७३६ ई.पू.

    यहूदाह ने एर, का विवाह तामार नामक स्त्री से किया.

  9. उत्पत्ति ३८:७लगभग १७३६ ई.पू.

    यहूदाह का बड़ा बेटा याहवेह के दृष्टि में दुष्ट था; इसलिये याहवेह ने उसे मार डाला.

  10. उत्पत्ति ३८:८लगभग १७२२ ई.पू.

    यहूदाह ने ओनान से कहा, “अपने भाई की पत्नी के साथ देवर का कर्तव्य पूरा करके अपने भाई के लिए संतान पैदा करो.”

  11. उत्पत्ति ३८:९लगभग १७२२ ई.पू.

    ओनान ने कहा, ये संतान मेरी नहीं होगी; इसलिये जब कभी वह समागम करता, अपना वीर्य भूमि पर गिरा देता था कि उससे उसके भाई के लिए कोई संतान पैदा न हो सके.

  12. उत्पत्ति ३८:१०लगभग १७२२ ई.पू.

    उसका यह काम याहवेह को अच्छा नहीं लगा, इसलिये याहवेह ने उसके प्राण ले लिए.

  13. उत्पत्ति ३८:११लगभग १७२२ ई.पू.

    यह देख यहूदाह ने अपनी बहू तामार से कहा, “जब तक मेरा पुत्र शेलाह, विवाह के योग्य न हो जाए, अपने पिता के घर विधवा बनकर रहना.” यहूदाह को डर था कि इस पुत्र की भी मृत्यु उसके भाइयों के समान हो जाए. इसलिये तामार अपने पिता के घर चली गई.

  14. उत्पत्ति ३८:१२लगभग १७२२ ई.पू.

    बहुत समय बाद शुआ की पुत्री अर्थात् यहूदाह की पत्नी की मृत्यु हो गई. यहूदाह अपने शोक के समय के बाद अपनी भेड़ों के ऊन कतरने वालों के पास तिमनाह को गया. उसके साथ उसका मित्र अदुल्लामी हीराह भी था.

  15. उत्पत्ति ३८:१३लगभग १७२२ ई.पू.

    जब तामार को यह बताया गया, “तुम्हारे ससुर तिमनाह जा रहे हैं,”

  16. उत्पत्ति ३८:१४लगभग १७२२ ई.पू.

    तब तामार ने अपने विधवा के वस्त्र उतार दिए, और अपना मुंह घूंघट से छिपाकर एक चादर लपेट ली तथा तिमनाह के मार्ग पर एनाइम के प्रवेश द्वार पर बैठ गई. यह इसलिये किया क्योंकि उसका देवर शेलाह जवान हो चुका था तथा उससे उसका विवाह नहीं किया गया था.

  17. उत्पत्ति ३८:१५लगभग १७२२ ई.पू.

    वहां से निकलते हुए उसे देख यहूदाह ने उसे वेश्या समझा, क्योंकि उसने मुंह ढक रखा था.

  18. उत्पत्ति ३८:१६लगभग १७२२ ई.पू.

    इसलिये यहूदाह उसके पास गया और उससे कहा, “मुझे तुम्हारे साथ संभोग करना है.” यहूदाह को यह मालूम नहीं था कि वह उसकी ही बहू थी. उसने पूछा, “क्या मजदूरी दोगे?”

  19. उत्पत्ति ३८:१७लगभग १७२२ ई.पू.

    यहूदाह ने उत्तर दिया, “मैं तुम्हें अपने झुंड में से एक बकरी भिजवा दूंगा.” तब तामार ने कहा, “उसे भिजवाने तक उसके बदले में क्या दोगे?”

  20. उत्पत्ति ३८:१८लगभग १७२२ ई.पू.

    यहूदाह ने पूछा, “क्या चाहती हो?” उसने उत्तर दिया, “तुम्हारी मुद्रामोहर, तुम्हारा बाजूबन्द तथा तुम्हारे हाथ की लाठी.” तब यहूदाह ने उसे ये देकर उससे संभोग किया और चला गया. तामार यहूदाह से गर्भवती हो गई.

  21. उत्पत्ति ३८:१९लगभग १७२२ ई.पू.

    तामार ने घर जाकर अपना विधवा वस्त्र वापस पहन लिया.

  22. उत्पत्ति ३८:२०लगभग १७२२ ई.पू.

    जब यहूदाह ने अपने अदुल्लामी मित्र के हाथ वह शावक बकरी उस स्त्री के लिए भेजी, तो वहां उसे वह स्त्री नहीं मिली.

  23. उत्पत्ति ३८:२१लगभग १७२२ ई.पू.

    उसने आस-पास लोगों से पूछा, “वह वेश्या कहां है, जो एनाइम मार्ग पर बैठा करती है?” उन्होंने कहा, “यहां कोई वेश्या कभी थी ही नहीं.”

  24. उत्पत्ति ३८:२२लगभग १७२२ ई.पू.

    इसलिये वह यहूदाह के पास लौट गया और उसे बताया, “वह मुझे नहीं मिली. इतना ही नहीं, वहां लोगों ने बताया कि वहां तो कभी कोई वेश्या थी ही नहीं.”

  25. उत्पत्ति ३८:२३लगभग १७२२ ई.पू.

    यह सुन यहूदाह ने उससे कहा, “तब तो उसे वे चीज़ें रख लेने दो अन्यथा तुच्छ हम ही बन जाएंगे. मैंने तो उसके लिए बकरी भिजवा दी थी, किंतु हम उसका पता नहीं लगा सके.”