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circa 2100–1900 BC

Abraham: The Covenant

God calls Abram from Ur, establishes an everlasting covenant, and promises a son through whom all nations will be blessed.

394 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति २१:११लगभग १८९३ ई.पू.

    इस बात ने अब्राहाम को बहुत दुखित कर दिया, क्योंकि यह बात अपने पुत्र इशमाएल के सम्‍बन्‍ध में थी.

  2. उत्पत्ति २१:१२लगभग १८९३ ई.पू.

    किंतु परमेश्वर ने अब्राहाम से कहा, “उस लड़के और दासी के बारे में सोचकर परेशान मत हो जो कुछ साराह तुमसे कहे, उसे सुन लो क्योंकि तुम्हारे वंशज यित्सहाक के माध्यम से नामित होंगे.

  3. उत्पत्ति २१:१३लगभग १८९३ ई.पू.

    दासी के पुत्र से भी मैं एक जाती बनाऊंगा, क्योंकि वह तुम्हारा है.”

  4. उत्पत्ति २१:१४लगभग १८९२ ई.पू.

    तब अब्राहाम ने जल्दी उठकर खाना और पानी देकर हागार और उसके पुत्र को वहां से चले जाने को कहा हागार वहां से निकल गई और बेअरशेबा के सुनसान रास्ते में भटकती रही.

  5. उत्पत्ति २१:१५लगभग १८९२ ई.पू.

    और जब पानी खत्म हो गया, उसने अपने बेटे को एक झाड़ी की छांव में लेटा दिया.

  6. उत्पत्ति २१:१६लगभग १८९२ ई.पू.

    वह स्वयं एक तीर की दूरी में जाकर बैठ गई, क्योंकि वह सोच रही थी, “मैं अपने बेटे का रोना और उसकी परेशानी नहीं देख पाऊंगी.” और वहां बैठते ही वह फूट-फूटकर रोने लगी.

  7. उत्पत्ति २१:१७लगभग १८९२ ई.पू.

    परमेश्वर ने उस बेटे का रोना सुना और स्वर्ग से परमेश्वर के दूत ने हागार से पूछा, “हे हागार, क्या हुआ तुम्हें? डरो मत; क्योंकि जहां तेरा बेटा पड़ा है, वहां से परमेश्वर ने उसके रोने को सुन लिया हैं.

  8. उत्पत्ति २१:१८लगभग १८९२ ई.पू.

    अब उठो, अपने बेटे को उठाओ, क्योंकि मैं उससे एक बड़ी जाति बनाऊंगा.”

  9. उत्पत्ति २१:१९लगभग १८९२ ई.पू.

    यह कहते हुए परमेश्वर ने हागार को एक कुंआ दिखाया. उसने उस कुएं से पानी लेकर अपने बेटे को पिलाया.

  10. उत्पत्ति २१:२०लगभग १८९२ ई.पू.

    वह बेटा परमेश्वर के अनुग्रह से बड़ा हो गया और वह धनुर्धारी बना.

  11. उत्पत्ति २१:२१लगभग १८९२ ई.पू.

    वह पारान के निर्जन देश में रहता था. उसकी माता ने उसके लिए मिस्र देश से ही शादी के लिए लड़की ढूंढ़ ली.

  12. उत्पत्ति २१:२२लगभग १८८६ ई.पू.

    अबीमेलेक तथा उसकी सेना के सेनापति फीकोल ने अब्राहाम से कहा, “आपके सब कामों में परमेश्वर की आशीष रही है.

  13. उत्पत्ति २१:२३लगभग १८८६ ई.पू.

    इसलिये आप हमसे वायदा कीजिये कि आप मुझे, मेरे वंशजों से अथवा मेरी भावी पीढ़ियों से कभी धोखा नहीं करेंगे, लेकिन आप हम सब पर दया करना-जैसा मैंने आपसे किया था.”

  14. उत्पत्ति २१:२४लगभग १८८६ ई.पू.

    अब्राहाम ने कहा, “मैं आपसे वायदा करता हूं.”

  15. उत्पत्ति २१:२५लगभग १८८६ ई.पू.

    और अब्राहाम ने अबीमेलेक से उस कुएं के विषय में कहा, जिसे अबीमेलेक के सेवकों ने ले लिया था.

  16. उत्पत्ति २१:२६लगभग १८८६ ई.पू.

    अबीमेलेक ने उत्तर दिया, “न तो आपने मुझे इसके विषय में कभी बताया, न आज तक मैंने इस विषय में सुना है और न मुझे यह बात मालूम है.”

  17. उत्पत्ति २१:२७लगभग १८८६ ई.पू.

    अब्राहाम ने अबीमेलेक को भेंट में भेड़ें एवं बछड़े दिए तथा दोनों ने वायदा किया.

  18. उत्पत्ति २१:२८लगभग १८८६ ई.पू.

    फिर अब्राहाम ने सात मेमनों को अलग किया,

  19. उत्पत्ति २१:२९लगभग १८८६ ई.पू.

    अबीमेलेक ने अब्राहाम से पूछा, “क्या मतलब है इन सात मेमनों को अलग करने का?”

  20. उत्पत्ति २१:३०लगभग १८८६ ई.पू.

    अब्राहाम ने कहा, “कि आप ये सात मेमने लें ताकि यह हमारे बीच सबूत होगा, कि यह कुंआ मैंने खोदा है.”

  21. उत्पत्ति २१:३१लगभग १८८६ ई.पू.

    इसलिये अब्राहाम ने उस स्थान का नाम बेअरशेबा रखा, क्योंकि यहां उन दोनों ने यह शपथ ली थी.

  22. उत्पत्ति २१:३२लगभग १८८६ ई.पू.

    अतः उन दोनों ने बेअरशेबा में यह वाचा स्थापित की. फिर अबीमेलेक तथा उसका सेनापति फीकोल फिलिस्तिया देश चले.

  23. उत्पत्ति २१:३३लगभग १८८६ ई.पू.

    अब्राहाम ने बेअरशेबा में एक झाऊ का पेड़ लगाया और वहां उसने याहवेह, सनातन परमेश्वर की आराधना की.

  24. उत्पत्ति २१:३४लगभग १८८६ ई.पू.

    और बहुत समय तक अब्राहाम फिलिस्तिया देश में रहा.

  25. उत्पत्ति २२:१लगभग १८७२ ई.पू.

    कुछ समय के बाद, परमेश्वर ने अब्राहाम की परीक्षा ली. परमेश्वर ने उनसे कहा, “हे अब्राहाम!” उन्होंने उत्तर दिया, “हे प्रभु! मैं यहां हूं.”