मुख्य सामग्री पर जाएँ

circa 2100–1900 BC

Abraham: The Covenant

God calls Abram from Ur, establishes an everlasting covenant, and promises a son through whom all nations will be blessed.

394 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति २३:३लगभग १८६० ई.पू.

    तब अब्राहाम ने अपनी पत्नी के शव के पास से उठकर हित्तियों से कहा;

  2. उत्पत्ति २३:४लगभग १८६० ई.पू.

    “मैं तो तुम्हारे बीच एक परदेशी और अजनबी हूं. मुझे कब्रस्थान के लिये बिक्री में कुछ ज़मीन दीजिये ताकि मैं अपने मृत लोगों को गाड़ सकूं.”

  3. उत्पत्ति २३:५लगभग १८६० ई.पू.

    हित्तियों ने अब्राहाम से कहा,

  4. उत्पत्ति २३:६लगभग १८६० ई.पू.

    “महोदय, आप हमारी बात सुनें. आप हमारे बीच में एक बड़े प्रधान हैं. आप जहां चाहें अपनी पत्नी को हमारे अच्छे कब्रों में गाड़ सकते हैं. हममें से कोई भी आपको अपनी पत्नी को गाड़ने के लिये अपनी कब्र देने से मना नहीं करेगा.”

  5. उत्पत्ति २३:७लगभग १८६० ई.पू.

    तब अब्राहाम उठे और उस देश के लोगों को अर्थात् हित्तियों को झुककर प्रणाम किया

  6. उत्पत्ति २३:८लगभग १८६० ई.पू.

    और उनसे कहा, “यदि आप चाहते हैं कि मैं अपनी पत्नी को मिट्टी दूं, तब मेरी एक बात और मान लीजिये और आप ज़ोहार के पुत्र एफ्रोन से मेरी तरफ से बात कीजिये

  7. उत्पत्ति २३:९लगभग १८६० ई.पू.

    ताकि वह माखपेलाह की गुफा को, जो उसकी है और उसके खेत की आखिरी छोर में है, दाम लेकर मुझे बेच दे. उससे कहिये कि वह उस जगह का पूरा दाम लेकर मुझे बेच दे ताकि वह तुम्हारे बीच में हमारे लिये एक कब्रस्थान की जगह हो.”

  8. उत्पत्ति २३:१०लगभग १८६० ई.पू.

    हित्ती एफ्रोन अपने लोगों के साथ वहां बैठा था. जो हित्ती उसके शहर के फाटक पर एकत्रित हुए थे, उनके सामने एफ्रोन ने अब्राहाम से कहा,

  9. उत्पत्ति २३:११लगभग १८६० ई.पू.

    “हे मेरे स्वामी; मेरी बात सुनिये; मैं आपको वह गुफा खेत सहित मेरे संबंधियों के सामने दे रहा हूं. आप इसमें अपनी पत्नी को गाड़ दीजिये.”

  10. उत्पत्ति २३:१२लगभग १८६० ई.पू.

    अब्राहाम ने फिर से उन लोगों को झुककर प्रणाम किया

  11. उत्पत्ति २३:१३लगभग १८६० ई.पू.

    और लोगों के सुनते में एफ्रोन से कहा, “मेरी बात सुनिये, आपको मैं उस खेत का दाम चुकाऊंगा, आप इसे स्वीकार कर लीजिये ताकि मैं अपनी पत्नी को वहां गाड़ सकूं.”

  12. उत्पत्ति २३:१४लगभग १८६० ई.पू.

    यह सुन एफ्रोन ने अब्राहाम से कहा,

  13. उत्पत्ति २३:१५लगभग १८६० ई.पू.

    “हे मेरे स्वामी, मेरी बात सुनिये; इस खेत का दाम सिर्फ चार सौ शेकेल चांदी है, पर यह आपके और मेरे लिए कुछ नहीं है. आप अपनी पत्नी को मिट्टी दे दीजिये.”

  14. उत्पत्ति २३:१६लगभग १८६० ई.पू.

    अब्राहाम ने एफ्रोन की बात मानकर उसको उतने मूल्य की चांदी तौलकर दे दी, जितना उसने हित्तियों के सुनते में कहा था: चार सौ शेकेल चांदी जो उस समय व्यापारियों के बीच में चलती थी.

  15. उत्पत्ति २३:१७लगभग १८६० ई.पू.

    इसलिये उन्होंने एफ्रोन का वह खेत और गुफा, जो माखपेलाह में ममरे के पास था, और खेत के सभी पेड़ जो उसमें और उसके चारों ओर सीमा के अंदर थे,

  16. उत्पत्ति २३:१८लगभग १८६० ई.पू.

    सब अब्राहाम को दे दिया. जितने हित्ती शहर के फाटक पर एकत्रित हुए थे, उन सभों के सामने वह संपत्ति अब्राहाम के अधिकार में पक्की रीति से आ गई.

  17. उत्पत्ति २३:१९लगभग १८६० ई.पू.

    उसके बाद अब्राहाम ने अपनी पत्नी साराह को माखपेलाह के खेत की गुफा में गाड़ दिया, जो कनान देश में ममरे के पास (अर्थात् हेब्रोन) में था.

  18. उत्पत्ति २३:२०लगभग १८६० ई.पू.

    इस प्रकार हित्तियों के द्वारा वह खेत और उसमें की गुफा कब्रस्थान के रूप में अब्राहाम के अधिकार में दे दी गई.

  19. उत्पत्ति २४:१लगभग १८५७ ई.पू.

    अब्राहाम बहुत बूढ़े हो गये थे, और याहवेह ने उन्हें सब प्रकार से आशीषित किया था.

  20. उत्पत्ति २४:२लगभग १८५७ ई.पू.

    अब्राहाम ने अपने पुराने सेवक से, जो घर की और पूरे संपत्ति की देखभाल करता था, कहा, “तुम अपना हाथ मेरी जांघ के नीचे रखो.

  21. उत्पत्ति २४:३लगभग १८५७ ई.पू.

    मैं चाहता हूं कि तुम स्वर्ग एवं पृथ्वी के परमेश्वर याहवेह की शपथ खाओ कि तुम इन कनानियों की पुत्रियों में से, जिनके बीच हम रह रहे हैं, मेरे बेटे की शादी नहीं कराओगे,

  22. उत्पत्ति २४:४लगभग १८५७ ई.पू.

    परंतु तुम मेरे देश में मेरे रिश्तेदारों में से मेरे बेटे यित्सहाक के लिए पत्नी लाओगे.”

  23. उत्पत्ति २४:५लगभग १८५७ ई.पू.

    उस सेवक ने अब्राहाम से पूछा, “उस स्थिति में मैं क्या करूं, जब वह स्त्री इस देश में आना ही न चाहे; क्या मैं आपके पुत्र को उस देश में ले जाऊं, जहां से आप आए हैं?”

  24. उत्पत्ति २४:६लगभग १८५७ ई.पू.

    इस पर अब्राहाम ने कहा, “तुम मेरे पुत्र को वहां कभी नहीं ले जाना.

  25. उत्पत्ति २४:७लगभग १८५७ ई.पू.

    याहवेह, जो स्वर्ग के परमेश्वर हैं, जो मुझे मेरे पिता के परिवार और मेरी जन्मभूमि से लाये हैं और जिन्होंने शपथ खाकर मुझसे यह वायदा किया, ‘यह देश मैं तुम्हारे वंश को दूंगा’—वे ही स्वर्गदूत को तुम्हारे आगे-आगे भेजेंगे और तुम मेरे पुत्र के लिए वहां से एक पत्नी लेकर आओगे.