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circa 800–400 BC
The Hebrew Prophets
God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.
इस काल के वचन
- यशायाह ३१:५लगभग ७१३ ई.पू.
पंख फैलाए हुए पक्षी के समान सर्वशक्तिमान याहवेह येरूशलेम की रक्षा करेंगे; और उन्हें छुड़ाएंगे.”
- यशायाह ३१:६लगभग ७१३ ई.पू.
हे इस्राएल तुमने जिसका विरोध किया है, उसी की ओर मुड़ जाओ.
- यशायाह ३१:७लगभग ७१३ ई.पू.
उस समय हर व्यक्ति अपनी सोने और चांदी की मूर्तियों को फेंक देगा, जो तुमने बनाकर पाप किया था.
- यशायाह ३१:८लगभग ७१३ ई.पू.
“अश्शूरी के लोग तलवार से मार दिये जाएंगे, वह मनुष्य की तलवार से नहीं; एक तलवार उन्हें मार डालेगी, किंतु वह तलवार मनुष्य की नहीं है. इसलिये वह उस तलवार से बच नहीं पाएगा और उसके जवान पुरुष पकड़े जाएंगे.
- यशायाह ३१:९लगभग ७१३ ई.पू.
डर से उसका गढ़ गिर जाएगा; और उसके अधिकारी डर के अपना झंडा छोड़कर भाग जाएंगे,” याहवेह की यह वाणी है कि, जिनकी अग्नि ज़ियोन में, और जिनका अग्निकुण्ड येरूशलेम की पहाड़ी पर युद्ध करने को उतरेंगे.
- यशायाह ३२:१लगभग ७१३ ई.पू.
देखो, राजा धर्म से शासन करेंगे और अधिकारी न्याय से शासन करेंगे.
- यशायाह ३२:२लगभग ७१३ ई.पू.
सब मानो आंधी से छिपने का स्थान और बौछार के लिये आड़ के समान होगा, मरुभूमि में झरने एक विशाल चट्टान की छाया के समान होंगे.
- यशायाह ३२:३लगभग ७१३ ई.पू.
तब जो देखते हैं, उनकी आंख कमजोर न होगी, और जो सुनते हैं वे सुनेंगे.
- यशायाह ३२:४लगभग ७१३ ई.पू.
उतावले लोगों के मन ज्ञान की बातें समझेंगे, और जो हकलाते हैं वे साफ़ बोलेंगे.
- यशायाह ३२:५लगभग ७१३ ई.पू.
मूर्ख फिर उदार न कहलायेगा न कंजूस दानी कहलायेगा.
- यशायाह ३२:६लगभग ७१३ ई.पू.
क्योंकि एक मूर्ख मूढ़ता की बातें ही करता है, और उसका मन व्यर्थ बातों पर ही लगा रहता है: वह कपट और याहवेह के विषय में झूठ बोलता है जिससे वह भूखे को भूखा और प्यासे को प्यासा ही रख सके.
- यशायाह ३२:७लगभग ७१३ ई.पू.
दुष्ट गलत बात सोचता है, और सीधे लोगों को भी अपनी बातों में फंसा देता है.
- यशायाह ३२:८लगभग ७१३ ई.पू.
किंतु सच्चा व्यक्ति तो अच्छा ही करता है, और अच्छाईयों पर स्थिर रहता है.
- यशायाह ३२:९लगभग ७१३ ई.पू.
हे आलसी स्त्रियों तुम जो निश्चिंत हो, मेरी बात को सुनो; हे निश्चिंत पुत्रियो उठो, मेरे वचन पर ध्यान दो!
- यशायाह ३२:१०लगभग ७१३ ई.पू.
हे निश्चिंत पुत्रियो एक वर्ष और कुछ ही दिनों में तुम व्याकुल कर दी जाओगी; क्योंकि दाख का समय खत्म हो गया है, और फल एकत्र नहीं किए जाएंगे.
- यशायाह ३२:११लगभग ७१३ ई.पू.
हे निश्चिंत स्त्रियो, कांपो; कांपो, हे निश्चिंत पुत्रियो! अपने वस्त्र उतारकर अपनी कमर पर टाट बांध लो.
- यशायाह ३२:१२लगभग ७१३ ई.पू.
अच्छे खेतों के लिए और फलदार अंगूर के लिये रोओ,
- यशायाह ३२:१३लगभग ७१३ ई.पू.
क्योंकि मेरी प्रजा, जो बहुत खुश और आनंदित है, उनके खेत में झाड़ और कांटे उग रहे हैं.
- यशायाह ३२:१४लगभग ७१३ ई.पू.
क्योंकि राजमहल छोड़ दिया जायेगा, और नगर सुनसान हो जायेगा; पर्वत और उनके पहरेदारों के घर जहां है, वहां जंगली गधे मौज करेंगे, पालतू पशुओं की चराई बन जाएंगे.
- यशायाह ३२:१५लगभग ७१३ ई.पू.
जब तक हम पर ऊपर से आत्मा न उंडेला जाए, और मरुभूमि फलदायक खेत न बन जाए, और फलदायक खेत वन न बन जाए.
- यशायाह ३२:१६लगभग ७१३ ई.पू.
तब तक उस बंजर भूमि में याहवेह का न्याय रहेगा, और फलदायक खेत में धर्म रहेगा.
- यशायाह ३२:१७लगभग ७१३ ई.पू.
धार्मिकता का फल है शांति, उसका परिणाम चैन; और हमेशा के लिए साहस!
- यशायाह ३२:१८लगभग ७१३ ई.पू.
तब मेरे लोग शांति से, और सुरक्षित एवं स्थिर रहेंगे.
- यशायाह ३२:१९लगभग ७१३ ई.पू.
और वन विनाश होगा और उस नगर का घमंड चूर-चूर किया जाएगा,
- यशायाह ३२:२०लगभग ७१३ ई.पू.
क्या ही धन्य हो तुम, जो जल के स्रोतों के पास बीज बोते हो, और गधे और बैल को आज़ादी से चराते हो.