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circa 800–400 BC

The Hebrew Prophets

God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.

3,706 वचन · 14 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. यशायाह ३१:५लगभग ७१३ ई.पू.

    पंख फैलाए हुए पक्षी के समान सर्वशक्तिमान याहवेह येरूशलेम की रक्षा करेंगे; और उन्हें छुड़ाएंगे.”

  2. यशायाह ३१:६लगभग ७१३ ई.पू.

    हे इस्राएल तुमने जिसका विरोध किया है, उसी की ओर मुड़ जाओ.

  3. यशायाह ३१:७लगभग ७१३ ई.पू.

    उस समय हर व्यक्ति अपनी सोने और चांदी की मूर्तियों को फेंक देगा, जो तुमने बनाकर पाप किया था.

  4. यशायाह ३१:८लगभग ७१३ ई.पू.

    “अश्शूरी के लोग तलवार से मार दिये जाएंगे, वह मनुष्य की तलवार से नहीं; एक तलवार उन्हें मार डालेगी, किंतु वह तलवार मनुष्य की नहीं है. इसलिये वह उस तलवार से बच नहीं पाएगा और उसके जवान पुरुष पकड़े जाएंगे.

  5. यशायाह ३१:९लगभग ७१३ ई.पू.

    डर से उसका गढ़ गिर जाएगा; और उसके अधिकारी डर के अपना झंडा छोड़कर भाग जाएंगे,” याहवेह की यह वाणी है कि, जिनकी अग्नि ज़ियोन में, और जिनका अग्निकुण्ड येरूशलेम की पहाड़ी पर युद्ध करने को उतरेंगे.

  6. यशायाह ३२:१लगभग ७१३ ई.पू.

    देखो, राजा धर्म से शासन करेंगे और अधिकारी न्याय से शासन करेंगे.

  7. यशायाह ३२:२लगभग ७१३ ई.पू.

    सब मानो आंधी से छिपने का स्थान और बौछार के लिये आड़ के समान होगा, मरुभूमि में झरने एक विशाल चट्टान की छाया के समान होंगे.

  8. यशायाह ३२:३लगभग ७१३ ई.पू.

    तब जो देखते हैं, उनकी आंख कमजोर न होगी, और जो सुनते हैं वे सुनेंगे.

  9. यशायाह ३२:४लगभग ७१३ ई.पू.

    उतावले लोगों के मन ज्ञान की बातें समझेंगे, और जो हकलाते हैं वे साफ़ बोलेंगे.

  10. यशायाह ३२:५लगभग ७१३ ई.पू.

    मूर्ख फिर उदार न कहलायेगा न कंजूस दानी कहलायेगा.

  11. यशायाह ३२:६लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि एक मूर्ख मूढ़ता की बातें ही करता है, और उसका मन व्यर्थ बातों पर ही लगा रहता है: वह कपट और याहवेह के विषय में झूठ बोलता है जिससे वह भूखे को भूखा और प्यासे को प्यासा ही रख सके.

  12. यशायाह ३२:७लगभग ७१३ ई.पू.

    दुष्ट गलत बात सोचता है, और सीधे लोगों को भी अपनी बातों में फंसा देता है.

  13. यशायाह ३२:८लगभग ७१३ ई.पू.

    किंतु सच्चा व्यक्ति तो अच्छा ही करता है, और अच्छाईयों पर स्थिर रहता है.

  14. यशायाह ३२:९लगभग ७१३ ई.पू.

    हे आलसी स्त्रियों तुम जो निश्चिंत हो, मेरी बात को सुनो; हे निश्चिंत पुत्रियो उठो, मेरे वचन पर ध्यान दो!

  15. यशायाह ३२:१०लगभग ७१३ ई.पू.

    हे निश्चिंत पुत्रियो एक वर्ष और कुछ ही दिनों में तुम व्याकुल कर दी जाओगी; क्योंकि दाख का समय खत्म हो गया है, और फल एकत्र नहीं किए जाएंगे.

  16. यशायाह ३२:११लगभग ७१३ ई.पू.

    हे निश्चिंत स्त्रियो, कांपो; कांपो, हे निश्चिंत पुत्रियो! अपने वस्त्र उतारकर अपनी कमर पर टाट बांध लो.

  17. यशायाह ३२:१२लगभग ७१३ ई.पू.

    अच्छे खेतों के लिए और फलदार अंगूर के लिये रोओ,

  18. यशायाह ३२:१३लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि मेरी प्रजा, जो बहुत खुश और आनंदित है, उनके खेत में झाड़ और कांटे उग रहे हैं.

  19. यशायाह ३२:१४लगभग ७१३ ई.पू.

    क्योंकि राजमहल छोड़ दिया जायेगा, और नगर सुनसान हो जायेगा; पर्वत और उनके पहरेदारों के घर जहां है, वहां जंगली गधे मौज करेंगे, पालतू पशुओं की चराई बन जाएंगे.

  20. यशायाह ३२:१५लगभग ७१३ ई.पू.

    जब तक हम पर ऊपर से आत्मा न उंडेला जाए, और मरुभूमि फलदायक खेत न बन जाए, और फलदायक खेत वन न बन जाए.

  21. यशायाह ३२:१६लगभग ७१३ ई.पू.

    तब तक उस बंजर भूमि में याहवेह का न्याय रहेगा, और फलदायक खेत में धर्म रहेगा.

  22. यशायाह ३२:१७लगभग ७१३ ई.पू.

    धार्मिकता का फल है शांति, उसका परिणाम चैन; और हमेशा के लिए साहस!

  23. यशायाह ३२:१८लगभग ७१३ ई.पू.

    तब मेरे लोग शांति से, और सुरक्षित एवं स्थिर रहेंगे.

  24. यशायाह ३२:१९लगभग ७१३ ई.पू.

    और वन विनाश होगा और उस नगर का घमंड चूर-चूर किया जाएगा,

  25. यशायाह ३२:२०लगभग ७१३ ई.पू.

    क्या ही धन्य हो तुम, जो जल के स्रोतों के पास बीज बोते हो, और गधे और बैल को आज़ादी से चराते हो.