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circa 800–400 BC

The Hebrew Prophets

God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.

3,706 वचन · 14 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. मीकाह १:१लगभग ७५० ई.पू.

    यहूदिया के राजा योथाम, आहाज़ तथा हिज़किय्याह के शासनकाल में मोरेशेथवासी मीकाह के पास याहवेह का यह वचन पहुंचा, जिसे उसने शमरिया और येरूशलेम के बारे में दर्शन में देखा.

  2. मीकाह १:२लगभग ७५० ई.पू.

    हे लोगों, तुम सब सुनो, पृथ्वी और इसके सभी निवासियों, इस पर ध्यान दो, कि प्रभु अपने पवित्र मंदिर से, परम याहवेह तुम्हारे विरुद्ध गवाही दें.

  3. मीकाह १:३लगभग ७५० ई.पू.

    देखो! याहवेह अपने निवास से निकलकर आ रहे हैं; वे नीचे उतरकर पृथ्वी के ऊंचे स्थानों को रौंदते हैं.

  4. मीकाह १:४लगभग ७५० ई.पू.

    उनके पैरों के नीचे पर्वत पिघल जाते हैं और जैसे आग के आगे मोम, और जैसे ढलान से गिरता पानी, वैसे ही घाटियां तड़क कर फट जाती हैं.

  5. मीकाह १:५लगभग ७५० ई.पू.

    यह सब याकोब के अपराध, और इस्राएल के लोगों के पाप का परिणाम है. याकोब का अपराध क्या है? क्या शमरिया नहीं? यहूदिया का ऊंचा स्थान (देवताओं के पूजा-स्थल) क्या है? क्या येरूशलेम नहीं?

  6. मीकाह १:६लगभग ७५० ई.पू.

    “इसलिये मैं शमरिया को मैदान में खंडहर के ढेर सा कर दूंगा, एक ऐसी जगह जहां अंगूर की बारी लगाई जाती है. मैं उसके पत्थरों को नीचे घाटी में लुढ़का दूंगा और उसकी नीवें खुली कर दूंगा.

  7. मीकाह १:७लगभग ७५० ई.पू.

    उसकी सब मूर्तियां टुकड़े-टुकड़े कर दी जाएंगी; उसके मंदिर के सब भेटों को आग में जला दिया जाएगा; मैं उसकी सब मूर्तियों को नष्ट कर दूंगा. क्योंकि उसने अपनी भेटों को वेश्यावृत्ति करके प्राप्‍त किया है, और वेश्यावृत्ति के मजदूरी के रूप में वे फिर उपयोग में लाई जाएंगी.”

  8. मीकाह १:८लगभग ७५० ई.पू.

    इसलिये मैं रोऊंगा और विलाप करूंगा; मैं खाली पैर और नंगा चला फिरा करूंगा. मैं सियार के समान चिल्लाऊंगा और उल्लू की तरह कराहूंगा.

  9. मीकाह १:९लगभग ७५० ई.पू.

    क्योंकि शमरिया का घाव असाध्य है; यह यहूदिया में फैल गया है. यह मेरी प्रजा के द्वार तक, और तो और यह येरूशलेम तक पहुंच गया है.

  10. मीकाह १:१०लगभग ७५० ई.पू.

    यह समाचार गाथ में न दिया जाए; बिलकुल भी न रोया जाए. बेथ-अफराह में जाकर धूल में लोटो.

  11. मीकाह १:११लगभग ७५० ई.पू.

    तुम जो शाफीर में रहते हो, नंगे और निर्लज्ज होकर आगे बढ़ो. जो त्सानान नगर में रहते हैं वे बाहर नहीं निकलेंगे. बेथ-एत्सेल विलाप में डूबा हुआ है; यह तुम्हारा और बचाव नहीं कर सकता.

  12. मीकाह १:१२लगभग ७५० ई.पू.

    जो मारोथ में रहते हैं, वे दर्द से छटपटा रहे हैं, और मदद के लिये इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि याहवेह के द्वारा भेजी गई विपत्ति येरूशलेम के प्रवेश द्वार तक पहुंच गई है.

  13. मीकाह १:१३लगभग ७५० ई.पू.

    तुम जो लाकीश में रहते हो, तेज भागनेवाले घोड़ों को रथ में फांदने के लिये साज पहनाओ. तुम्हीं से ज़ियोन की पुत्री का पाप शुरू हुआ, क्योंकि तुम्हीं में इस्राएल का अपराध पाया गया.

  14. मीकाह १:१४लगभग ७५० ई.पू.

    इसलिये तुम्हें ही मोरेशेथ-गथ को विदाई उपहार देना होगा. अकज़ीब के निवासी इस्राएल के राजाओं के लिए धोखेबाज सिद्ध होंगे.

  15. मीकाह १:१५लगभग ७५० ई.पू.

    हे मारेशाह के रहनेवाले, मैं तुम्हारे विरुद्ध एक विजेता को भेजूंगा. इस्राएल के प्रतिष्ठित लोग अदुल्लाम को भाग जाएंगे.

  16. मीकाह १:१६लगभग ७५० ई.पू.

    अपने प्यारे बच्चों के लिए शोक में अपने सिर के बाल मुंड़ाओ; गिद्ध के समान अपना सिर गंजा कर लो, क्योंकि तुम्हारी संतान तुम्हारे पास से बंधुआई में चली जाएगी.

  17. मीकाह २:१लगभग ७३० ई.पू.

    धिक्कार है उन पर जो बुरे कार्यों की योजना बनाते रहते हैं, जो अपने बिछौने पर पड़े हुए षड़्‍यंत्र रचते हैं! पौ फटते ही अपनी युक्ति को पूरा करते हैं क्योंकि सत्ता उनके हाथ होती है.

  18. मीकाह २:२लगभग ७३० ई.पू.

    वे दूसरों के खेत का लोभ करके उसे हड़प भी लेते हैं, वे दूसरों के घर भी छीन लेते हैं. वे लोगों के घरों को छल करके ले लेते हैं, और उनके पुरखों की संपत्ति को लूट लेते हैं.

  19. मीकाह २:३लगभग ७३० ई.पू.

    इसलिये याहवेह का यह कहना है: “मैं इन लोगों के विरुद्ध विपत्ति लाने की योजना बना रहा हूं, जिससे तुम अपने आपको नहीं बचा सकते. तुम गर्व से सिर उठाकर फिर कभी न चल सकोगे, क्योंकि यह विपत्ति का समय होगा.

  20. मीकाह २:४लगभग ७३० ई.पू.

    उस दिन लोग तुम्हारा हंसी उड़ाएंगे; वे इस शोक गीत के साथ तुम्हें ताना मारेंगे: ‘हम पूर्णतः नाश हो गये हैं; मेरे लोगों की संपत्ति बांट दी गई है. परमेश्वर इसे मुझसे ले लेते हैं! वे हमारे खेत विश्‍वासघातियों को दे देते हैं.’ ”

  21. मीकाह २:५लगभग ७३० ई.पू.

    इसलिये याहवेह के सभा में भूमि को लाटरी के द्वारा बांटने के लिए तुम्हारे पास कोई न होगा.

  22. मीकाह २:६लगभग ७३० ई.पू.

    उनके भविष्यवक्ता कहते हैं, “भविष्यवाणी मत करो; इन बातों के बारे में भविष्यवाणी मत करो; हमारे ऊपर कलंक नहीं लगेगा.”

  23. मीकाह २:७लगभग ७३० ई.पू.

    हे याकोब के वंशजों, क्या यह कहा जाना चाहिये, “क्या याहवेह धीरज नहीं धरते? क्या वे ऐसा कार्य करते हैं?” “क्या मेरे वचन से उसकी भलाई नहीं होती जो न्याय के रास्ते पर चलता है?

  24. मीकाह २:८लगभग ७३० ई.पू.

    हाल ही में मेरे लोग एक शत्रु के समान उठ खड़े हुए हैं. तुम उन व्यक्तियों के मंहगे कपड़े छीन लेते हो जो बेफिक्र होकर जाते रहते हैं, मानो वे युद्ध से लौट रहे हों.

  25. मीकाह २:९लगभग ७३० ई.पू.

    तुम मेरे लोगों के महिलाओं को उनके खुशहाल घरों से निकाल देते हो. तुम उनकी संतान से मेरी आशीष को हमेशा के लिये छीन लेते हो.