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David

968 वचन · 40 परिवार के सदस्य

David का उल्लेख करने वाले वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. “अपने सेवक को आपने जो सम्मान दिया है उसके संबंध में इसके बाद दावीद कह ही क्या सकता है? आप अपने सेवक को जानते हैं.

  2. इस विषय में यही कहा जाए, ‘इस्राएल के परमेश्वर, सेनाओं के याहवेह ही इस्राएल के परमेश्वर हैं!’ और आपके सेवक दावीद का परिवार आपके सामने स्थिर हो जाएगा.

  3. कुछ समय बाद दावीद ने फिलिस्तीनियों को युद्ध में हराया और फिलिस्तीनियों के कब्जे के गाथ और उसके आस-पास के गांव उनके अधिकार से छीन लिए.

  4. दावीद ने मोआब देश को भी हराया और मोआब के लोग दावीद के सेवक हो गए. वे दावीद को कर देने लगे.

  5. दावीद ने ज़ोबाह के राजा हादेदेज़र को भी हामाथ तक जाकर हराया क्योंकि हादेदेज़र फरात नदी के तट पर एक स्मारक बनाने की योजना बना रहा था.

  6. दावीद ने हादेदेज़र से 1,000 रथ, 7,000 घुड़सवार और 20,000 पैदल सैनिक छीन लिए और रथों के घोड़ों के पैंरो की प्रमुख नस काट दी, किंतु सौ रथों में इस्तेमाल के लिए पर्याप्‍त घोड़ों को छोड़ दिया.

  7. जब ज़ोबाह के राजा हादेदेज़र की सहायता के लिए दमेशेक से अरामी वहां आए, दावीद ने 22,000 अरामियों को मार दिया.

  8. दावीद ने दमेशेक के अरामी सैनिकों के बीच एक रक्षक सेना ठहरा दी. अरामी दावीद के सेवक बन गए और उन्हें कर देने लगे, दावीद जहां कहीं गए, उन्हें याहवेह की सहायता मिलती रही.

  9. हादेदेज़र के सेवकों द्वारा ले जाई गई सोने की ढालों को दावीद ने लाकर येरूशलेम में रख दिया.

  10. इसके अलावा दावीद हादेदेज़र के नगर तिभाह और कून से भारी मात्रा में कांसा ले आए, जिनसे शलोमोन ने पानी रखने के बर्तन, खंभे और दूसरे बर्तन बनाए थे.

  11. जब हामाथ के राजा तोऊ ने यह सुना कि दावीद ने ज़ोबाह के राजा हादेदेज़र की संपूर्ण सेना को हरा दिया है,

  12. उसने अपने पुत्र हादरोम को राजा दावीद से भेंट करने के लिए भेजा, कि वह राजा को बधाई दे सके; क्योंकि दावीद ने हादेदेज़र से युद्ध कर उसे हरा दिया था. हादेदेज़र तोऊ से युद्ध करता रहा था. राजा तोऊ ने अपने पुत्र के साथ सोने, चांदी और कांसे की तरह-तरह की वस्तुएं भेजी थी.

  13. राजा दावीद ने इन सभी वस्तुओं को उन वस्तुओं के साथ याहवेह को समर्पित कर दी, जो वह उन सभी पराजित देशों यानी एदोम, मोआब, अम्मोन के वंशजों, फिलिस्तीनियों और अमालेक से लेकर आए थे.

  14. दावीद ने एदोम में गढ़ रक्षक सेना बना दी; सभी एदोमवासी दावीद के सेवक हो गए. दावीद जहां कहीं हमला करते थे, याहवेह ने उन्हें सफलता प्रदान की.

  15. दावीद सारे इस्राएल के शासक थे, उन्होंने अपनी सारी प्रजा के लिए न्याय और सच्चाई की व्यवस्था की थी.

  16. यहोयादा का पुत्र बेनाइयाह केरेथि और पेलेथी नगरवासियों पर मुख्य अधिकारी बनाया गया था; दावीद के पुत्र दावीद के साथ उच्च अधिकारी थे.

  17. दावीद ने सोचा, “मैं नाहाश के पुत्र हानून पर अपनी दया बनाकर रखूंगा, क्योंकि उसका पिता मुझ पर कृपालु था,” इसलिये दावीद ने उसे उसके पिता की मृत्यु के संबंध में सांत्वना देने के लिए अपने दूत भेजे. दावीद के दूत अम्मोन के वंशजों के नगर में राजा हानून को सांत्वना देने पहुंचे,

  18. किंतु अम्मोन के वंशजों के शासकों ने हानून से कहा, “क्या आप वास्तव में यह मानते हैं कि इन दूतों को आपको सांत्वना देने के लिए भेजते हुए दावीद ने आपके पिता का सम्मान करने का विचार किया है? ज़रा सोचिए, क्या उसके ये सेवक आपके पास जासूसी करके नाश करने के लक्ष्य से हमारे देश का भेद लेने तो नहीं आए हैं?”

  19. तब हानून ने दावीद के सेवकों को पकड़कर उनके बाल और दाढ़ी मूंड दी और उनके वस्त्रों को बीच में नितम्बों तक काट दिया और उन्हें लौट जाने दिया.

  20. कुछ लोगों ने जाकर इसकी सूचना दावीद को दे दी. राजा ने कुछ दूतों को उस सुझाव के साथ बुलवा लिया, “आकर येरीख़ो में उस समय तक ठहरे रहना जब तक तुम्हारी दाढ़ी बढ़ न जाए. तब तुम यहां लौट सकते हो,” क्योंकि वे इस समय बहुत ही शर्म महसूस कर रहे थे.

  21. जब अम्मोन के वंशजों ने यह पाया कि उन्होंने स्वयं को दावीद के सामने बहुत ही घृणित बना लिया है, हानून और अम्मोन के वंशजों ने लगभग पैंतीस हज़ार किलो चांदी देकर मेसोपोतामिया, आराम-माकाह और ज़ोबाह से घुड़सवार और रथ किराये पर ले लिए.

  22. जब दावीद को इसका समाचार प्राप्‍त हुआ, उन्होंने योआब के साथ वीर योद्धाओं की सारी सेना वहां भेज दी.

  23. जब दावीद को इसकी सूचना दी गई, वह सारी इस्राएली सेना को इकट्ठा कर यरदन के पार चले गए और उन्होंने अरामी सेना के विरुद्ध मोर्चा बांधा. दोनों में युद्ध छिड़ गया.

  24. अरामी इस्राएलियों के सामने पीठ दिखाकर भागने लगे. दावीद ने अरामी सेना के 700 रथ सैनिक, 40,000 घुड़सवार मार गिराए और उनकी सेना के आदेशक शोफख का वध कर दिया.

  25. जब हादेदेज़र के अधीन सभी जागीरदारों ने यह देखा कि वे इस्राएल द्वारा हरा दिया गया है, उन्होंने दावीद से संधि कर ली और उनके अधीन हो गए. अब अरामी अम्मोन-वंशजो की सहायता के लिए तैयार न थे.