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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ४९:२०लगभग १६८९ ई.पू.

    “आशेर का अन्‍न बहुत उत्तम होगा और वह राजसी भोजन उपलब्ध कराएगा.

  2. उत्पत्ति ४९:२१लगभग १६८९ ई.पू.

    “नफताली छोड़ी हुई हिरणी के समान है जो सुंदर बच्चों को जन्म देती है.

  3. उत्पत्ति ४९:२२लगभग १६८९ ई.पू.

    “योसेफ़ तो फल से भरी एक शाखा है जो सोते के पास लगी हुई फलवंत लता की एक शाखा है जो बाड़े के सहारे चढ़ी हैं.

  4. उत्पत्ति ४९:२३लगभग १६८९ ई.पू.

    धनुष चलानेवाले ने धनुष चलाया और तीर छोड़ा और लगकर दर्द हुआ.

  5. उत्पत्ति ४९:२४लगभग १६८९ ई.पू.

    परंतु उसका धनुष दृढ़ रहा, उसकी बांहें मजबूत रहीं, यह याकोब के सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर से था, जो इस्राएल के चरवाहे तथा चट्टान हैं.

  6. उत्पत्ति ४९:२५लगभग १६८९ ई.पू.

    तुम्हारे पिता के परमेश्वर की ओर से, जो तुम्हारे सहायक हैं तथा उस सर्वशक्तिमान से जो स्वर्गीय आशीषों से तुम्हें आशीषित करेंगे, वे आशीषें, जो नीचे गहराइयों से आती हैं, स्तनों तथा गर्भ की आशीषें देगा.

  7. उत्पत्ति ४९:२६लगभग १६८९ ई.पू.

    तुम्हारे पिता की आशीषें तो मेरे पूर्वजों के पहाड़ों से बढ़कर हैं ये अनंत पर्वतों से संबंधित आशीषों से बढ़कर हैं. ये ही आशीषें योसेफ़ पर प्रकट होकर उसके सिर का मुकुट बनें, जो सब भाइयों से प्रतिष्ठित हुआ है.

  8. उत्पत्ति ४९:२७लगभग १६८९ ई.पू.

    “बिन्यामिन एक क्रूर भेड़िया है; सवेरे वह अहेर का सेवन करता है, शाम को वह लूट सामग्री बांटा करता है.”

  9. उत्पत्ति ४९:२८लगभग १६८९ ई.पू.

    ये सभी इस्राएल के बारह गोत्र हैं उनके पिता ने उनके बारे में तब कहा जब वह उन्हें आशीष दे रहे थे, और उनमें से एक-एक को इन्हीं वचनों से आशीष दी.

  10. उत्पत्ति ४९:२९लगभग १६८९ ई.पू.

    तब इस्राएल ने कहा, “मुझे मेरे पूर्वजों की उसी गुफ़ा में दफनाना, जो एफ्रोन हित्ती के खेत में है,

  11. उत्पत्ति ४९:३०लगभग १६८९ ई.पू.

    कनान देश में उस कब्रस्थान में, जो माखपेलाह के खेत में, ममरे के पास है, जिसे अब्राहाम ने हित्ती एफ्रोन से खरीदा था.

  12. उत्पत्ति ४९:३१लगभग १६८९ ई.पू.

    वहां उन्होंने अब्राहाम तथा उनकी पत्नी साराह को दफनाया था, वहीं उन्होंने यित्सहाक तथा उनकी पत्नी रेबेकाह को दफनाया तथा वहीं मैंने लियाह को भी दफनाया है;

  13. उत्पत्ति ४९:३२लगभग १६८९ ई.पू.

    वह खेत गुफा सहित हित्तियों से खरीदा है.”

  14. उत्पत्ति ४९:३३लगभग १६८९ ई.पू.

    जब याकोब अपने पुत्रों को ये आदेश दे चुके, तब उन्होंने अपने पैर अपने बिछौने पर कर लिए तथा आखिरी सांस ली, वे अपने पूर्वजों से जा मिले.

  15. उत्पत्ति ५०:१लगभग १६८९ ई.पू.

    योसेफ़ अपने पिता से लिपट कर बहुत रोये.

  16. उत्पत्ति ५०:२लगभग १६८९ ई.पू.

    योसेफ़ ने अपने सेवकों से, जो वैद्य थे उनसे कहा कि वे पिता के शव में सुगंध द्रव्य भर दें. वैद्यों ने इस्राएल के शव का संलेपन किया.

  17. उत्पत्ति ५०:३लगभग १६८९ ई.पू.

    इस काम में चालीस दिन लग जाते थे. मिस्रवासियों ने याकोब के लिए सत्तर दिन तक शोक मनाया.

  18. उत्पत्ति ५०:४लगभग १६८९ ई.पू.

    जब शोक के दिन पूरे हुए तब योसेफ़ ने जाकर फ़रोह के परिवार से कहा, “यदि आपका अनुग्रह मुझ पर है तो फ़रोह से कहिये,

  19. उत्पत्ति ५०:५लगभग १६८९ ई.पू.

    ‘मेरे पिता ने मरने से पहले मुझसे यह शपथ करवाई: उन्होंने कहा, मैं मरने पर हूं मुझे कनान देश में उस कब्र में दफनाना, जो मैंने अपने लिये खोदी है, इसलिये मुझे अपने पिता के शव को कनान देश ले जाने की आज्ञा दें ताकि मैं वहां जाकर अपने पिता को दफनाकर लौट आऊं.’ ”

  20. उत्पत्ति ५०:६लगभग १६८९ ई.पू.

    फ़रोह ने कहा, “जाकर अपने पिता को जैसी उन्होंने तुमसे शपथ करवाई थी, वैसे दफनाकर आओ.”

  21. उत्पत्ति ५०:७लगभग १६८९ ई.पू.

    इसलिये योसेफ़ अपने पिता के शव को लेकर रवाना हुए और फ़रोह के सब सेवक उनके साथ गये. उनके साथ उनके परिवार के तथा मिस्र देश के सारे प्रधान थे.

  22. उत्पत्ति ५०:८लगभग १६८९ ई.पू.

    योसेफ़ का पूरा परिवार, उनके भाई तथा उनके पिता का परिवार भी था. वे गोशेन में बच्चों और अपने भेड़-बकरी तथा पशुओं को छोड़कर गये.

  23. उत्पत्ति ५०:९लगभग १६८९ ई.पू.

    उनके साथ घोड़े तथा रथ और लोगों की बड़ी भीड़ थी.

  24. उत्पत्ति ५०:१०लगभग १६८९ ई.पू.

    जब वे अताद के खलिहान तक जो यरदन के पार है, पहुंचे; तब वे बड़े दुःखी हुए और रोने लगे; उन्होंने वहां अपने पिता के लिए सात दिन का शोक रखा.

  25. उत्पत्ति ५०:११लगभग १६८९ ई.पू.

    जब कनान के लोगों ने अताद के खलिहान में यह विलाप देखा तो कहा, “मिस्रवासियों के लिए यह वास्तव में गहरा शोक है.” इसलिये यरदन पार उस स्थान का नाम अबेल-मिस्रईम रखा गया.