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circa 800–400 BC

The Hebrew Prophets

God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.

3,706 वचन · 14 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. यशायाह २:२०लगभग ७५९ ई.पू.

    उस दिन मनुष्य अपनी सोने-चांदी की मूर्तियां जिन्हें उन्होंने बनाई थी, उन्हें छछूंदरों और चमगादड़ों के सामने फेंक देंगे.

  2. यशायाह २:२१लगभग ७५९ ई.पू.

    जब याहवेह पृथ्वी को कंपित करने के लिए उठेंगे तब उनके भय तथा उनके प्रताप के तेज के कारण, मनुष्य चट्टानों की गुफाओं में तथा चट्टानों में जा छिपेंगे.

  3. यशायाह २:२२लगभग ७५९ ई.पू.

    तुम मनुष्यों से दूर रहो, जिनका सांस कुछ पल का है. जिनका कोई महत्व नहीं.

  4. यशायाह ३:१लगभग ७५९ ई.पू.

    प्रभु सर्वशक्तिमान याहवेह येरूशलेम और यहूदिया से उनका सहारा और उनके अन्‍न और जल का स्रोत सब दूर कर देगा,

  5. यशायाह ३:२लगभग ७५९ ई.पू.

    वीर योद्धा तथा सैनिक, न्यायी तथा भविष्यद्वक्ता, भावी बोलनेवाले तथा बूढ़े,

  6. यशायाह ३:३लगभग ७५९ ई.पू.

    मंत्री और प्रतिष्ठित व्यक्ति, सलाहकार, कारीगर और जादूगर को भी दूर करेंगे.

  7. यशायाह ३:४लगभग ७५९ ई.पू.

    “मैं लड़कों को शासक बना दूंगा; और वे उन पर शासन करेंगे.”

  8. यशायाह ३:५लगभग ७५९ ई.पू.

    लोग एक दूसरे पर अत्याचार करेंगे— सब अपने साथी, पड़ोसी पर, और लड़के, बूढ़ों से बुरा व्यवहार करेंगे.

  9. यशायाह ३:६लगभग ७५९ ई.पू.

    जब एक व्यक्ति अपने पिता के घर में अपने भाई से ही यह कहने लगे, “तुम्हारे पास तो अच्छा वस्त्र है, तुम्हें हमारा न्यायी होना चाहिए; और यह देश जो उजड़ा हुआ है अपने अधीन कर लो!”

  10. यशायाह ३:७लगभग ७५९ ई.पू.

    उस दिन कहेगा, “मैं चंगा करनेवाला नहीं हूं. क्योंकि मेरे घर में न तो भोजन है और न वस्त्र; ऐसा व्यक्ति प्रजा का शासक नहीं बन सकता.”

  11. यशायाह ३:८लगभग ७५९ ई.पू.

    येरूशलेम लड़खड़ाया और यहूदिया गिर गया है; क्योंकि उनके वचन और उनके काम याहवेह के विरुद्ध हैं, जो याहवेह के तेजोमय आंखों के सामने बुराई करनेवाले हो गये.

  12. यशायाह ३:९लगभग ७५९ ई.पू.

    उनका मुंह ही उनके विरुद्ध गवाही देता हैं; और वे सदोम के समान अपने ही पापों को बताते हैं; वे उन्हें छिपाते नहीं हाय उन पर. क्योंकि उन्होंने अपना ही नुकसान किया है.

  13. यशायाह ३:१०लगभग ७५९ ई.पू.

    धर्मियों को यह बताओ कि उनका अच्छा ही होगा, क्योंकि उन्हें उनके कामों का प्रतिफल मिलेगा.

  14. यशायाह ३:११लगभग ७५९ ई.पू.

    हाय है दुष्ट पर! उनके साथ बुरा ही होगा! क्योंकि उनके बुरे कामों का फल उन्हें बुरा ही मिलेगा.

  15. यशायाह ३:१२लगभग ७५९ ई.पू.

    मेरे लोगों को बच्‍चे दुःख देते हैं, और स्त्रियां उन पर अधिकार करती हैं. हे मेरी प्रजा, जो तुम्हारे मार्ग बताते हैं; वे ही तुम्हें भटकाते हैं तथा वे तुम्हारे रास्ते को भूला देते हैं.

  16. यशायाह ३:१३लगभग ७५९ ई.पू.

    याहवेह तुम्हें बचाने और लोगों के न्याय निष्पादन के लिए तैयार हैं.

  17. यशायाह ३:१४लगभग ७५९ ई.पू.

    याहवेह न्याय के लिए शासन करनेवालों तथा बूढ़ों के साथ मिल गए हैं: “तुम ही ने खेत से अंगूर खा लिये; और गरीबों से लूटा गया सामान अपने घर में रखा.

  18. यशायाह ३:१५लगभग ७५९ ई.पू.

    क्यों मेरी प्रजा को परेशान और दुःखी करते हो?” प्रभु सर्वशक्तिमान याहवेह कहता है!

  19. यशायाह ३:१६लगभग ७५९ ई.पू.

    याहवेह कहता है, “ज़ियोन की पुत्रियां घमंड करती हैं, वे सिर ऊंचा कर आंखों को मटकाती, घुंघरूओं को छमछमाती हुई पायल पहनकर चलती हैं.

  20. यशायाह ३:१७लगभग ७५९ ई.पू.

    इसलिये प्रभु याहवेह ज़ियोन की पुत्रियों के सिर को गंजा कर देंगे; और उनके तन को विवस्त्र करेंगे.”

  21. यशायाह ३:१८लगभग ७५९ ई.पू.

    उस दिन प्रभु उनकी पायल, ललाट पट्टिका, झूमर,

  22. यशायाह ३:१९लगभग ७५९ ई.पू.

    झुमके, कंगन, झीना मुखावरण,

  23. यशायाह ३:२०लगभग ७५९ ई.पू.

    सुंदर वस्त्र, भुजबन्द, करधनी, ईत्रदान, कवच,

  24. यशायाह ३:२१लगभग ७५९ ई.पू.

    अंगूठी, नथ,

  25. यशायाह ३:२२लगभग ७५९ ई.पू.

    मख़मल के वस्त्र, कुरती, बुन्दियों, ओढ़नी;