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circa 800–400 BC

The Hebrew Prophets

God speaks through Isaiah, Jeremiah, and the minor prophets—calling Israel to repentance and foretelling the coming Messiah.

3,706 वचन · 14 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. यशायाह १:२६लगभग ७५९ ई.पू.

    मैं फिर से न्यायी और मंत्री बनाऊंगा और उनको उनका पद दूंगा. फिर इस नगर में कोई कमी नहीं होगी.”

  2. यशायाह १:२७लगभग ७५९ ई.पू.

    ज़ियोन को न्याय से, और जो अपने आपको बदलेगा वे धर्म से छुड़ा लिये जायेंगे.

  3. यशायाह १:२८लगभग ७५९ ई.पू.

    लेकिन विद्रोहियों और पापियों को एक साथ नष्ट कर दिया जाएगा, जिन्होंने याहवेह को त्याग दिया है.

  4. यशायाह १:२९लगभग ७५९ ई.पू.

    “वे उन बांज वृक्षों से, जिनकी तुम चाह रखते थे लज्जित हो जाएंगे; और जिन क्यारियों में मेहनत करके खुश होते थे अब उसी से लज्जित होना पड़ेगा.

  5. यशायाह १:३०लगभग ७५९ ई.पू.

    तुम उस बांज वृक्ष के समान हो जाओगे जिसके पत्ते सूख गए हैं, और सूखी क्यारियां जिसमें पानी नहीं पिलाया गया हो.

  6. यशायाह १:३१लगभग ७५९ ई.पू.

    बलवान व्यक्ति आग और उसका काम चिंगारी होगा; और वे एक साथ जल जायेंगे, और कोई उन्हें बचा नहीं पाएगा.”

  7. यशायाह २:१लगभग ७५९ ई.पू.

    यहूदिया और येरूशलेम के विषय में आमोज़ के पुत्र यशायाह ने दर्शन देखा:

  8. यशायाह २:२लगभग ७५९ ई.पू.

    कि अंत के दिनों में वह पर्वत और पहाड़ जिस पर याहवेह का भवन है; उसे दृढ़ और ऊंचा किया जायेगा, और सब जाति के लोग बहती हुई नदी के समान उस ओर आएंगे.

  9. यशायाह २:३लगभग ७५९ ई.पू.

    और कहेंगे, “आओ, हम याहवेह के पर्वत, याकोब के परमेश्वर के भवन को चलें. कि वह हमें अपने नियम सिखाएं, और हम उनके मार्गों पर चलें.” क्योंकि ज़ियोन से व्यवस्था निकलेगी, और येरूशलेम से याहवेह का वचन आएगा.

  10. यशायाह २:४लगभग ७५९ ई.पू.

    परमेश्वर राज्यों के बीच न्याय करेंगे और लोगों की परेशानियां दूर करेंगे. तब वे अपनी तलवारों को पीट-पीटकर हल के फाल तथा अपने भालों को हंसिया बना लेंगे. एक देश दूसरे के विरुद्ध तलवार नहीं उठायेगा, तथा उन्हें फिर कभी लड़ने के लिए तैयार नहीं किया जाएगा.

  11. यशायाह २:५लगभग ७५९ ई.पू.

    याकोब के लोग आओ, हम याहवेह के प्रकाश में चलें.

  12. यशायाह २:६लगभग ७५९ ई.पू.

    याहवेह, ने तो अपनी प्रजा, याकोब के वंश को छोड़ दिया है. क्योंकि वे पूर्णतः पूर्वी लोगों के समान हो गये; और फिलिस्तीनियों के समान उनकी सोच और काम हो गया है.

  13. यशायाह २:७लगभग ७५९ ई.पू.

    उनका देश भी सोना और चांदी से भरा है; और उनके पास धन की कमी नहीं. और उनका देश घोड़ों और रथों से भरा है.

  14. यशायाह २:८लगभग ७५९ ई.पू.

    उनका देश मूर्तियों से भरा है; जो अपने हाथों से बनाया हुआ है.

  15. यशायाह २:९लगभग ७५९ ई.पू.

    और मनुष्य उसके सामने झुकते और प्रणाम करते हैं, इसलिये उन्हें माफ नहीं किया जाएगा.

  16. यशायाह २:१०लगभग ७५९ ई.पू.

    याहवेह के डर तथा उनके प्रताप के तेज के कारण चट्टान में चले जाओ और छिप जाओ!

  17. यशायाह २:११लगभग ७५९ ई.पू.

    मनुष्यों का घमंड नीचा करके; याहवेह को ऊंचा किया जायेगा.

  18. यशायाह २:१२लगभग ७५९ ई.पू.

    क्योंकि हर घमंडी एवं अहंकारी व्यक्ति के लिए सर्वशक्तिमान याहवेह ने दिन ठहराया है, उस दिन उनका घमंड तोड़ दिया जाएगा,

  19. यशायाह २:१३लगभग ७५९ ई.पू.

    और लबानोन के समस्त ऊंचे देवदारों, तथा बाशान के सब बांज वृक्षों पर,

  20. यशायाह २:१४लगभग ७५९ ई.पू.

    समस्त ऊंचे पहाडों और ऊंची पहाड़ियों पर,

  21. यशायाह २:१५लगभग ७५९ ई.पू.

    समस्त ऊंचे गुम्मटों और सब शहरपनाहों पर और,

  22. यशायाह २:१६लगभग ७५९ ई.पू.

    तरशीश के सब जहाजों तथा सब सुंदर चित्रकारी पर.

  23. यशायाह २:१७लगभग ७५९ ई.पू.

    जो मनुष्य का घमंड और अहंकार है दूर किया जाएगा; और केवल याहवेह ही ऊंचे पर विराजमान होगा,

  24. यशायाह २:१८लगभग ७५९ ई.पू.

    सब मूर्तियां नष्ट कर दी जाएंगी.

  25. यशायाह २:१९लगभग ७५९ ई.पू.

    जब याहवेह पृथ्वी को कंपित करने के लिए उठेंगे तब उनके भय तथा प्रताप के तेज के कारण मनुष्य चट्टानों की गुफाओं में तथा भूमि के गड्ढों में जा छिपेंगे.