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circa 6 BC – AD 30

The Life of Jesus

The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.

3,779 वचन · 4 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. मत्तियाह ७:२९लगभग ३१ ई.

    क्योंकि येशु की शिक्षा-शैली अधिकारपूर्ण थी, न कि शास्त्रियों के समान.

  2. मत्तियाह ८:१लगभग ३१ ई.

    जब येशु पर्वत से उतरकर आए तब बड़ी भीड़ उनके पीछे-पीछे चलने लगी.

  3. मत्तियाह ८:२लगभग ३१ ई.

    एक कोढ़ के रोगी ने उनके सामने झुककर उनसे विनती करके कहा, “प्रभु, यदि आप चाहें तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं.”

  4. मत्तियाह ८:३लगभग ३१ ई.

    येशु ने हाथ बढ़ाकर उसे स्पर्श करते हुए कहा, “मैं चाहता हूं. शुद्ध हो जाओ.” वह उसी क्षण कोढ़ रोग से शुद्ध हो गया.

  5. मत्तियाह ८:४लगभग ३१ ई.

    येशु ने उसे आज्ञा दी, “यह ध्यान रहे कि तुम इसके विषय में किसी को न बताओ. अब जाकर पुरोहित के सामने स्वयं को परीक्षण के लिए प्रस्तुत करो, और मोशेह द्वारा निर्धारित बलि भेंट करो कि तुम्हारा स्वास्थ्य-लाभ उनके सामने गवाही हो जाए.”

  6. मत्तियाह ८:५लगभग ३१ ई.

    जब येशु ने कफ़रनहूम नगर में प्रवेश किया, तब एक शताधिपति ने आकर उनसे नम्रतापूर्वक निवेदन किया,

  7. मत्तियाह ८:६लगभग ३१ ई.

    “प्रभु, घर पर मेरा सेवक लकवा रोग से पीड़ित है और वह घोर पीड़ा में है.”

  8. मत्तियाह ८:७लगभग ३१ ई.

    येशु ने उसे आश्वासन दिया, “मैं आकर उसे चंगा करूंगा.”

  9. मत्तियाह ८:८लगभग ३१ ई.

    किंतु शताधिपति ने कहा, “नहीं प्रभु, नहीं, मैं इस योग्य नहीं कि आप मेरे घर आएं. आप केवल मुंह से कह दीजिए और मेरा सेवक स्वस्थ हो जाएगा.

  10. मत्तियाह ८:९लगभग ३१ ई.

    मैं स्वयं बड़े अधिकारियों के अधीन नियुक्त हूं और सैनिक मेरे अधिकार में हैं. मैं किसी को आदेश देता हूं, ‘जाओ!’ तो वह जाता है, और किसी को आदेश देता हूं, ‘इधर आओ!’ तो वह आता है. अपने सेवक से कहता हूं, ‘यह करो!’ तो वह वही करता है.”

  11. मत्तियाह ८:१०लगभग ३१ ई.

    यह सुनकर येशु आश्चर्यचकित रह गए. उन्होंने पीछे आ रही भीड़ से कहा, “यह एक सच है कि मैंने इस्राएल राष्ट्र में भी किसी में ऐसा विश्वास नहीं देखा.

  12. मत्तियाह ८:११लगभग ३१ ई.

    मैं तुम्हें सूचित करना चाहता हूं कि स्वर्ग-राज्य में अब्राहाम, यित्सहाक और याकोब के साथ भोज में शामिल होने के लिए पूर्व और पश्चिम दिशाओं से अनेकानेक आकर संगति करेंगे,

  13. मत्तियाह ८:१२लगभग ३१ ई.

    किंतु राज्य के वारिस बाहर अंधकार में फेंक दिए जाएंगे. वह स्थान ऐसा होगा जहां रोना और दांत पीसना होता रहेगा.”

  14. मत्तियाह ८:१३लगभग ३१ ई.

    तब येशु ने शताधिपति से कहा, “जाओ, तुम्हारे लिए वैसा ही होगा जैसा तुम्हारा विश्वास है.” उसी क्षण वह सेवक चंगा हो गया.

  15. मत्तियाह ८:१४लगभग ३१ ई.

    जब येशु पेतरॉस के घर पर आए, उन्होंने उनकी सास को बुखार से पीड़ित पाया.

  16. मत्तियाह ८:१५लगभग ३१ ई.

    उन्होंने उनके हाथ का स्पर्श किया और वह बुखार से मुक्त हो गई और उठकर उन सब की सेवा करने में जुट गई.

  17. मत्तियाह ८:१६लगभग ३१ ई.

    जब संध्या हुई तब लोग दुष्टात्मा से पीड़ित लोगों को उनके पास लाने लगे और येशु अपने वचन मात्र से उन्हें दुष्टात्मा मुक्त करते गए, साथ ही रोगियों को स्वस्थ.

  18. मत्तियाह ८:१७लगभग ३१ ई.

    यह भविष्यवक्ता यशायाह द्वारा की गई इस भविष्यवाणी की पूर्ति थी: “उन्होंने स्वयं हमारी दुर्बलताओं को अपने ऊपर ले लिया तथा हमारे रोगों को उठा लिया.”

  19. मत्तियाह ८:१८लगभग ३१ ई.

    अपने आस-पास भीड़ को देख येशु ने शिष्यों को झील की दूसरी ओर जाने की आज्ञा दी.

  20. मत्तियाह ८:१९लगभग ३१ ई.

    उसी समय एक शास्त्री ने आकर येशु से विनती की, “गुरुवर, आप जहां कहीं जाएंगे, मैं आपके साथ रहूंगा.”

  21. मत्तियाह ८:२०लगभग ३१ ई.

    येशु ने उसके उत्तर में कहा, “लोमड़ियों के पास उनकी गुफाएं तथा आकाश के पक्षियों के पास उनके बसेरे होते हैं, किंतु मनुष्य के पुत्र के पास तो सिर रखने तक का स्थान नहीं है!”

  22. मत्तियाह ८:२१लगभग ३१ ई.

    एक अन्य शिष्य ने उनसे विनती की, “प्रभु मुझे पहले अपने पिता की अंत्येष्टि की अनुमति दे दीजिए.”

  23. मत्तियाह ८:२२लगभग ३१ ई.

    किंतु येशु ने उससे कहा, “मृत अपने मरे हुओं का प्रबंध कर लेंगे, तुम मेरे पीछे हो लो.”

  24. मत्तियाह ८:२३लगभग ३१ ई.

    जब उन्होंने नाव में प्रवेश किया उनके शिष्य भी उनके साथ हो लिए.

  25. मत्तियाह ८:२४लगभग ३१ ई.

    अचानक झील में ऐसा प्रचंड आंधी उठी कि लहरों ने नाव को ढांक लिया, किंतु येशु इस समय सो रहे थे.