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circa 1446 BC

Sinai & The Law

God meets Israel at Mount Sinai, reveals the Ten Commandments, and establishes the Tabernacle and the priestly covenant.

1,657 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. निर्गमन ३७:१९लगभग १४९१ ई.पू.

    हर डाली में कलियों और फूलों के साथ बादाम के फूलों के आकार के तीन पुष्‍पकोष और एक गांठ थे. पूरे छः डालियों को, जो दीये से निकलीं, इसी आकार से बनाई.

  2. निर्गमन ३७:२०लगभग १४९१ ई.पू.

    दीये की डंडी में चार फूल बने थे, जिसमें बादाम के फूल के समान कलियां तथा पंखुड़ियां बनी थीं.

  3. निर्गमन ३७:२१लगभग १४९१ ई.पू.

    दीये से निकली हुई छः डालियों में से दो-दो डालियों के नीचे एक-एक गांठ और दीये समेत एक ही टुकड़े से बने थे.

  4. निर्गमन ३७:२२लगभग १४९१ ई.पू.

    ये सभी कलियां, शाखाएं और दीप का स्तंभ शुद्ध सोने को पीटकर बने थे.

  5. निर्गमन ३७:२३लगभग १४९१ ई.पू.

    उन्होंने वे सातों दीये, इनके बुझाने के साधन तथा रखने के बर्तन सोने से बनाए.

  6. निर्गमन ३७:२४लगभग १४९१ ई.पू.

    दीये और उसके साथ सभी सामान को लगभग पैंतीस किलो सोने से बनाया गया.

  7. निर्गमन ३७:२५लगभग १४९१ ई.पू.

    फिर बबूल की लकड़ी से धूप वेदी बनाई; यह चौकोर थी, जिसकी लंबाई पैंतालीस सेंटीमीटर तथा चौड़ाई भी पैंतालीस सेंटीमीटर थी, व ऊंचाई नब्बे सेंटीमीटर, तथा इसकी सींग एक ही टुकड़े से बनाई गई थी.

  8. निर्गमन ३७:२६लगभग १४९१ ई.पू.

    पूरी धूप वेदी का ऊपरी हिस्सा इसके चारों परत तथा इसके सींग और चारों ओर की किनारी सोने की बनाई.

  9. निर्गमन ३७:२७लगभग १४९१ ई.पू.

    इसकी किनारियों के नीचे सोने के दो-दो कड़े लगाए. इसको इन डंडे के द्वारा उठाने के लिए ही दोनों तरफ आमने-सामने कड़े लगवाया.

  10. निर्गमन ३७:२८लगभग १४९१ ई.पू.

    इन डंडों को बबूल की लकड़ी से बनाकर उसमें सोने की परत चढ़ाई.

  11. निर्गमन ३७:२९लगभग १४९१ ई.पू.

    बसलेल ने अभिषेक का पवित्र तेल और सुगंध द्रव्य भी बनाया, जिस प्रकार से कोई निपुण इत्र बनानेवाला बनाता है.

  12. निर्गमन ३८:१लगभग १४९१ ई.पू.

    और बसलेल ने बबूल की लकड़ी से होमबलि के लिए चौकोर वेदी बनाई. यह दो मीटर पच्चीस सेंटीमीटर लंबी तथा इतनी ही चौड़ी थी. इसकी ऊंचाई एक मीटर सैंतीस सेंटीमीटर थी.

  13. निर्गमन ३८:२लगभग १४९१ ई.पू.

    और इसके चारों कोनों पर एक-एक सींग बनाया, जो वेदी के साथ एक ही टुकड़े में कांसे से बनाये गये.

  14. निर्गमन ३८:३लगभग १४९१ ई.पू.

    डोल, बेलचे, छिड़काव कटोरे, कांटे तथा तवे जैसी वेदी में काम आनेवाली सभी चीज़ों को कांसे से बनाया.

  15. निर्गमन ३८:४लगभग १४९१ ई.पू.

    वेदी के लिए कांसे की जाली की एक झंझरी बनाई, जो वेदी की आधी ऊंचाई पर लगाई गई थी.

  16. निर्गमन ३८:५लगभग १४९१ ई.पू.

    कांसे की झंझरी के चारों कोनों पर चार कड़े लगाए, ताकि इनके बीच से डंडों को लगा सकें.

  17. निर्गमन ३८:६लगभग १४९१ ई.पू.

    डंडे बबूल की लकड़ी से बनाकर उस पर कांसे लगवा दी.

  18. निर्गमन ३८:७लगभग १४९१ ई.पू.

    उसने उन डंडों को उन कड़ों में डाल दिया ताकि वेदी को उठाया जा सके. वेदी भीतर से खोखली थी और तख्ते जोड़कर बनाई गई थी.

  19. निर्गमन ३८:८लगभग १४९१ ई.पू.

    इसकी हौदी और पाये दोनों कांसे के बनाए. इसे उन स्त्रियों के दर्पणों से बनाया, जो मिलनवाले तंबू के द्वार पर सेवा करती थीं.

  20. निर्गमन ३८:९लगभग १४९१ ई.पू.

    फिर पवित्र स्थान के आंगन को बनाया. आंगन के दक्षिण हिस्से में बंटी हुई बारिक सनी के कपड़े का पर्दा था, जिसकी लंबाई पैंतालीस मीटर थी,

  21. निर्गमन ३८:१०लगभग १४९१ ई.पू.

    तथा बीस खंभे और कांसे की बीस कुर्सियां बनवाईं. खंभों के कुण्डे और पट्टियां चांदी की थी.

  22. निर्गमन ३८:११लगभग १४९१ ई.पू.

    आंगन के उत्तरी दिशा के लिए भी पैंतालीस मीटर लंबे पर्दे बनाए गए और इसके लिए कांसे के बीस खंभे और बीस कुर्सियां बनाई गईं. मीनारों की कड़ियां तथा उसकी पट्टियां चांदी की थीं.

  23. निर्गमन ३८:१२लगभग १४९१ ई.पू.

    पश्चिम दिशा के पर्दे साढ़े बाईस मीटर लंबे थे, तथा इसके लिए दस खंभे एवं दस कुर्सियां बनाई गई थी. मीनारों की कड़ियां तथा पट्टियां चांदी की थी.

  24. निर्गमन ३८:१३लगभग १४९१ ई.पू.

    पूर्वी दिशा के पर्दे भी साढ़े बाईस मीटर लंबे थे.

  25. निर्गमन ३८:१४लगभग १४९१ ई.पू.

    द्वार के एक तरफ के पर्दे छः मीटर पचहत्तर सेंटीमीटर के थे, और तीन खंभे और तीन कुर्सियां बनाई गयीं.