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circa 1446 BC

Sinai & The Law

God meets Israel at Mount Sinai, reveals the Ten Commandments, and establishes the Tabernacle and the priestly covenant.

1,657 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. लेवी २७:२८लगभग १४९१ ई.पू.

    “ ‘परंतु यदि कोई व्यक्ति अपनी सारी संपत्ति में से, जो कुछ भी याहवेह के लिए अलग करता है—मनुष्य, पशु या पैतृक संपत्ति में से खेत; उसको न तो बेचा जाए और न ही उसको छुड़ाया जाए. जो कुछ याहवेह को पूरी तरह से समर्पित है, वह याहवेह के लिए परम पवित्र है.

  2. लेवी २७:२९लगभग १४९१ ई.पू.

    “ ‘जो मनुष्य याहवेह के लिए अलग किया गया है, उसे छुड़ाया न जाए. ज़रूरी है कि उसका वध कर दिया जाए.

  3. लेवी २७:३०लगभग १४९१ ई.पू.

    “ ‘भूमि का दसवां अंश, चाहे वह खेत की उपज का हो या वृक्षों के फलों का, उस पर याहवेह का अधिकार है. वह याहवेह के लिए पवित्र है.

  4. लेवी २७:३१लगभग १४९१ ई.पू.

    इसलिये यदि कोई अपने दसवें अंश का कुछ छुड़ाना चाहे, तो वह उसमें उसके ठहराए गए मूल्य का पांचवा अंश भी जोड़ दे.

  5. लेवी २७:३२लगभग १४९१ ई.पू.

    गाय-बैलों और भेड़-बकरियों का हर एक दसवां पशु, जो चरवाहे की लाठी के नीचे से निकलता है, वह याहवेह के लिए पवित्र है.

  6. लेवी २७:३३लगभग १४९१ ई.पू.

    वह उनमें अच्छे और बुरे पशु में भेद न करे और न उनको बदले. किंतु यदि कोई ऐसे बदल भी लेता है, तो वह पशु और उसके बदले के पशु दोनों ही पवित्र माने जाएंगे. इनको छुड़ाये न जाए.’ ”

  7. लेवी २७:३४लगभग १४९१ ई.पू.

    यही वे आदेश हैं, जिन्हें याहवेह ने मोशेह को इस्राएल के घराने के लिए सीनायी पर्वत पर दिए.