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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति ३०:१३लगभग १७४७ ई.पू.

    तब लियाह ने सोचा, “मैं धन्य हूं और स्त्रियां मुझे धन्य कहेंगी.” इसलिये इस पुत्र का नाम आशेर रखा.

  2. उत्पत्ति ३०:१४लगभग १७४८ ई.पू.

    खेत में गेहूं की कटाई के समय रियूबेन जब खेत में गया उसे दूदाईम नामक कुछ विशेष पौधा मिला, जिन्हें वह अपनी मां लियाह के पास ले आया. राहेल ने लियाह से कहा, “मुझे भी थोड़ा दूदाईम दे दो.”

  3. उत्पत्ति ३०:१५लगभग १७४८ ई.पू.

    लियाह ने राहेल से कहा, “क्या यह काफ़ी नहीं कि तुमने मुझसे मेरा पति छीन लिया? और अब मेरे पुत्र द्वारा लाए दूदाईम भी लेना चाहती हो?” तब राहेल ने उससे कहा, “यदि तुम मुझे यह पौधा दोगी, तो मैं आज की रात तुम्हें याकोब के साथ व्यतीत करने दूंगी.”

  4. उत्पत्ति ३०:१६लगभग १७४८ ई.पू.

    जब शाम को याकोब खेत से आये तब लियाह ने याकोब से कहा, “मैंने आपको अपने बेटे द्वारा लाए गये दूदाईम देकर किराये में लिया है.”

  5. उत्पत्ति ३०:१७लगभग १७४७ ई.पू.

    परमेश्वर ने लियाह की सुन ली. उसने गर्भधारण किया तथा याकोब को पांचवां पुत्र दिया.

  6. उत्पत्ति ३०:१८लगभग १७४७ ई.पू.

    इस पर लियाह ने कहा, “परमेश्वर ने मुझे मेरी मजदूरी दी है क्योंकि मैंने अपनी दासी मेरे पति को दी.” और इसलिये उसका नाम इस्साखार रखा.

  7. उत्पत्ति ३०:१९लगभग १७४७ ई.पू.

    फिर लियाह ने छठे पुत्र को जन्म दिया.

  8. उत्पत्ति ३०:२०लगभग १७४६ ई.पू.

    लियाह ने कहा, “परमेश्वर ने मुझे एक उत्तम भेंट से सम्मानित किया है. अब मेरे पति मेरी कद्र करेंगे, क्योंकि मैंने उनको छः पुत्र दिये हैं.” और इसलिये उस पुत्र का नाम ज़ेबुलून रखा.

  9. उत्पत्ति ३०:२१लगभग १७४५ ई.पू.

    फिर कुछ समय बाद लिया की एक बेटी हुई, उसका नाम दीनाह रखा.

  10. उत्पत्ति ३०:२२लगभग १७४५ ई.पू.

    इसके बाद परमेश्वर ने राहेल पर दया की. परमेश्वर ने उसे गर्भधारण करने के लिए सक्षम किया.

  11. उत्पत्ति ३०:२३लगभग १७४५ ई.पू.

    उसे एक बेटा हुआ, और उसने कहा, “परमेश्वर ने मेरा कलंक मिटा दिया है.”

  12. उत्पत्ति ३०:२४लगभग १७४५ ई.पू.

    यह कहते हुए उसे योसेफ़ नाम दिया कि याहवेह मुझे एक और पुत्र दें.

  13. उत्पत्ति ३०:२५लगभग १७४५ ई.पू.

    जब राहेल ने योसेफ़ को जन्म दिया, तब याकोब ने लाबान से कहा, “अब मुझे मेरे देश जाने दीजिए.

  14. उत्पत्ति ३०:२६लगभग १७४५ ई.पू.

    मुझे मेरी पत्नियां एवं संतान दे दीजिए, जिसके लिए मैंने इतने वर्ष आपकी सेवा की है. जो सेवा मैं आपके लिए करता रहा हूं, वह आपको मालूम है.”

  15. उत्पत्ति ३०:२७लगभग १७४५ ई.पू.

    किंतु लाबान ने कहा, “याहवेह की ओर से मुझे यह मालूम हुआ है, कि मुझे जो आशीष मिली है, वह तुम्हारे ही कारण मिली है. इसलिये तुम मुझसे नाराज नहीं हो, तो मेरे यहां ही रहो.”

  16. उत्पत्ति ३०:२८लगभग १७४५ ई.पू.

    लाबान ने कहा, “सेवा के बदले तुम क्या चाहते हो, मैं तुम्हें वही दूंगा.”

  17. उत्पत्ति ३०:२९लगभग १७४५ ई.पू.

    किंतु याकोब ने लाबान से कहा, “मैंने आपकी सेवा कैसे की है, यह बात आपसे छिपी नहीं है, और आपके पशु की देखरेख भी मैंने कैसे की हैं.

  18. उत्पत्ति ३०:३०लगभग १७४५ ई.पू.

    पहले पशु कम थे लेकिन अब बहुत ज्यादा हो गये हैं. मैंने जो भी काम किया, उसमें याहवेह ने आशीष दी है. लेकिन अब मैं अपने घराने के बारे में सोचना चाहता हूं.”

  19. उत्पत्ति ३०:३१लगभग १७४५ ई.पू.

    तब लाबान ने पूछा, “तुम्हारी मजदूरी क्या होगी?” याकोब ने कहा, “आप मुझे कुछ न दीजिए. लेकिन, आप चाहें तो आपके पशुओं की चरवाही तथा देखभाल करता रहूंगा:

  20. उत्पत्ति ३०:३२लगभग १७४५ ई.पू.

    आज मैं भेड़-बकरियों में से, धारी वाले सब एक तरफ और बिना धारी वाले एक तरफ करके अलग करूंगा और इस तरह दोनों को अलग रखकर उनकी देखरेख करूंगा.

  21. उत्पत्ति ३०:३३लगभग १७४५ ई.पू.

    जब आप मेरी मजदूरी देने आएंगे तब इन भेड़-बकरियों को जो अलग करके रखी हैं आप देखना और यदि इन भेड़-बकरियों में से कोई धारी वाली और चितकबरी न हो वह दिखे तो उसे चोरी किया हुआ मान लेना.”

  22. उत्पत्ति ३०:३४लगभग १७४५ ई.पू.

    लाबान ने उत्तर दिया, “ठीक हैं, तुम जैसा चाहते हो वैसा करो.”

  23. उत्पत्ति ३०:३५लगभग १७४५ ई.पू.

    पर उस दिन लाबान ने धारी वाले तथा धब्बे युक्त बकरों तथा सभी चित्तीयुक्त एवं धब्बे युक्त बकरियों को अलग कर दिया तथा हर एक, जिस पर श्वेत रंग पाया गया तथा भेड़ों में से सभी काली भेड़ अलग कर इन सभी को अपने पुत्रों को सौंप दिया.

  24. उत्पत्ति ३०:३६लगभग १७४५ ई.पू.

    तब उन्होंने अपने व याकोब के बीच तीन दिन की यात्रा की दूरी बना ली. अब याकोब लाबान की बच गई भेड़-बकरियों की चरवाही करने लगे.

  25. उत्पत्ति ३०:३७लगभग १७४५ ई.पू.

    कुछ समय बाद याकोब ने चिनार, बादाम तथा अर्मोन वृक्ष की टहनियां लेकर उनकी छाल छील कर उन पर सफेद धारियां बनाई इससे उन टहनियों के अंदर का सफेद भाग दिखने लगा.