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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति २९:२३लगभग १७५३ ई.पू.

    शाम को उसने अपनी बेटी लियाह को याकोब को सौंप दी और याकोब ने उसके साथ विवाह किया.

  2. उत्पत्ति २९:२४लगभग १७५३ ई.पू.

    लाबान ने अपनी दासी ज़िलपाह को भी लियाह को उसकी दासी होने के लिए दिया.

  3. उत्पत्ति २९:२५लगभग १७५३ ई.पू.

    जब याकोब को मालूम पड़ा कि वह तो लियाह थी, याकोब ने लाबान से पूछा, “यह क्या किया आपने मेरे साथ? मैं आपकी सेवा राहेल के लिए कर रहा था? फिर आपने मेरे साथ ऐसा धोखा क्यों किया?”

  4. उत्पत्ति २९:२६लगभग १७५३ ई.पू.

    लाबान ने कहा, “हमारे समाज में बड़ी को छोड़ पहले छोटी की शादी नहीं कर सकते.

  5. उत्पत्ति २९:२७लगभग १७५३ ई.पू.

    विवाह के उत्सव को पूरे सप्‍ताह मनाते रहो और मैं राहेल को भी तुम्हें विवाह के लिए दूंगा; परंतु तुम्हें और सात वर्ष तक मेरी सेवा करनी पड़ेगी.”

  6. उत्पत्ति २९:२८लगभग १७५३ ई.पू.

    इसलिये याकोब ने ऐसा ही किया. और समारोह का वह सप्‍ताह पूरा किया, तब लाबान ने याकोब को राहेल पत्नी स्वरूप सौंप दी.

  7. उत्पत्ति २९:२९लगभग १७५३ ई.पू.

    लाबान ने अपनी दासी बिलहाह को भी राहेल की दासी होने के लिए उसे सौंप दिया.

  8. उत्पत्ति २९:३०लगभग १७५३ ई.पू.

    याकोब राहेल के पास गया और उसे राहेल लियाह से अधिक प्रिय थी. और उसने लाबान के लिए और सात साल सेवा की.

  9. उत्पत्ति २९:३१लगभग १७५३ ई.पू.

    जब याहवेह ने देखा कि लियाह को प्यार नहीं मिल रहा, याहवेह ने लियाह को गर्भ से आशीषित किया और राहेल को बांझ कर दिया.

  10. उत्पत्ति २९:३२लगभग १७५२ ई.पू.

    लियाह गर्भवती हुई और उसने एक बेटे को जन्म दिया और उसका नाम रियूबेन यह कहकर रखा, “याहवेह ने मेरे दुःख को देखा, और अब मेरे पति ज़रूर मुझसे प्रेम करेंगे.”

  11. उत्पत्ति २९:३३लगभग १७५१ ई.पू.

    लियाह का एक और पुत्र पैदा हुआ. उसने कहा, “क्योंकि याहवेह ने यह सुन लिया कि मैं प्रिय नहीं हूं और मुझे यह एक और पुत्र दिया.” उसने उसका नाम शिमओन रखा.

  12. उत्पत्ति २९:३४लगभग १७५० ई.पू.

    लियाह फिर से गर्भवती हुई और जब उसका एक पुत्र पैदा हुआ तब उसने कहा, “अब मेरे पति मुझसे जुड़ जायेंगे क्योंकि मैनें उनके तीन पुत्रों को जन्म दिया है.” इसलिये लियाह ने तीसरे बेटे का नाम लेवी रखा.

  13. उत्पत्ति २९:३५लगभग १७४९ ई.पू.

    उसने एक और बेटे को जन्म दिया और कहा, “अब मैं याहवेह की स्तुति करूंगी,” इसलिये उसने उस बेटे का नाम यहूदाह रखा. उसके बाद लियाह के बच्‍चे होने बंद हो गए.

  14. राहेल ने यह देखा कि याकोब के लिए उसके द्वारा कोई संतान नहीं हुई, तो उसे अपनी बहन से नफ़रत हो गई. वह याकोब से झगड़ने लगी, “मुझे संतान दीजिए, नहीं तो मैं मर जाऊंगी!”

  15. यह सुन याकोब गुस्से से चिल्लाए और कहा, “क्या मैं परमेश्वर के स्थान में हूं कि तुम्हारी बंद कोख खोलूं?”

  16. यह सुन उसने कहा, “तो मेरी दासी बिलहाह के पास जाइए, ताकि उसके द्वारा मैं मां बन सकूं.”

  17. इसलिये राहेल ने याकोब को पत्नी स्वरूप में अपनी दासी सौंप दी, और याकोब ने बिलहाह से वैवाहिक संबंध बनाया.

  18. बिलहाह गर्भवती हुई और उसका एक बेटा हुआ.

  19. उत्पत्ति ३०:६लगभग १७४८ ई.पू.

    तब राहेल ने कहा, “परमेश्वर ने मेरा न्याय किया और मेरी दुहाई सुन ली और मुझे बेटा दिया.” उसने उसका नाम दान रखा.

  20. उत्पत्ति ३०:७लगभग १७४७ ई.पू.

    फिर राहेल की दासी बिलहाह से एक और बेटा हुआ.

  21. उत्पत्ति ३०:८लगभग १७४७ ई.पू.

    तब राहेल ने कहा, “मैंने अपनी बहन के साथ बड़ा संघर्ष किया है और अब मैं जीत गई हूं.” इसलिये इस बेटे का नाम नफताली रखा गया.

  22. उत्पत्ति ३०:९लगभग १७४८ ई.पू.

    जब लियाह ने देखा कि उसके और बच्‍चे होने रुक गये है, तब उसने अपनी दासी ज़िलपाह को याकोब को पत्नी स्वरूप में दे दी.

  23. उत्पत्ति ३०:१०लगभग १७४८ ई.पू.

    लियाह की दासी ज़िलपाह ने याकोब से एक बेटे को जन्म दिया.

  24. उत्पत्ति ३०:११लगभग १७४८ ई.पू.

    लियाह ने सोचा, “कैसी धन्यता है यह!” इसलिये उस बेटे का नाम गाद रखा.

  25. उत्पत्ति ३०:१२लगभग १७४८ ई.पू.

    लियाह की दासी ज़िलपाह से एक और बेटा हुआ.