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circa 1900–1700 BC

Jacob, Joseph & Egypt

Jacob wrestles with God and becomes Israel; Joseph is sold into slavery yet rises to save the world from famine.

840 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. उत्पत्ति २७:४१लगभग १७६० ई.पू.

    एसाव अपने भाई याकोब से नफ़रत करने लगा और मन में ऐसा सोचने लगा, “पिता की मृत्यु शोक के दिन नज़दीक है, उनके बाद मैं याकोब की हत्या कर दूंगा.”

  2. उत्पत्ति २७:४२लगभग १७६० ई.पू.

    जब रेबेकाह को अपने बड़े बेटे की ये बातें बताई गईं तब उसने सेवक भेजकर अपने छोटे पुत्र याकूब को बुलवाकर उससे कहा, “तुम्हारे भाई एसाव के मन में तुम्हारे लिए बहुत नफ़रत हैं. सुनो, तुम्हारा भाई एसाव तुम्हें मारने का षड़्‍यंत्र कर रहा है.

  3. उत्पत्ति २७:४३लगभग १७६० ई.पू.

    इसलिये तुम यहां से भागकर मेरे भाई लाबान के यहां चले जाओ.

  4. उत्पत्ति २७:४४लगभग १७६० ई.पू.

    वहां जाकर कुछ समय रहो, जब तक तुम्हारे भाई का गुस्सा खत्म न हो जाए.

  5. उत्पत्ति २७:४५लगभग १७६० ई.पू.

    जब तुम्हारे भाई का गुस्सा खत्म होगा, और भूल जायेगा कि तुमने उसके साथ क्या किया, तब मैं तुम्हें वहां से बुला लूंगी. मैं एक ही दिन तुम दोनों को क्यों खो दूं?”

  6. उत्पत्ति २७:४६लगभग १७६० ई.पू.

    एक दिन रेबेकाह ने यित्सहाक से कहा, “हेथ की इन पुत्रियों ने मेरा जीवन दुःखी कर दिया है. यदि याकोब भी हेथ की पुत्रियों में से किसी को, अपनी पत्नी बना लेगा तो मेरे लिए जीना और मुश्किल हो जाएगा?” इसलिये याकोब को उसके मामा के घर भेज दो.

  7. उत्पत्ति २८:१लगभग १७६० ई.पू.

    इसलिये यित्सहाक ने याकोब को आशीष दी और कहा: “कनानी कन्याओं से शादी मत करना.

  8. उत्पत्ति २८:२लगभग १७६० ई.पू.

    पर पद्दन-अराम में अपने नाना बेथुएल के यहां चले जाओ. और वहां अपने मामा लाबान की पुत्रियों में से किसी से विवाह कर लेना.

  9. उत्पत्ति २८:३लगभग १७६० ई.पू.

    सर्वशक्तिमान परमेश्वर की दया तुम पर बनी रहे तथा सुख और शांति से आगे बढ़ो.

  10. उत्पत्ति २८:४लगभग १७६० ई.पू.

    परमेश्वर तुम्हें वे आशीषें दें, जिन्हें उन्होंने अब्राहाम को दी थी, तुम्हें और तुम्हारे वंश को, उस देश का अधिकारी बनाये.”

  11. उत्पत्ति २८:५लगभग १७६० ई.पू.

    इन सब आशीषित वचन के साथ यित्सहाक ने याकोब को विदा किया. याकोब अपनी और एसाव की माता रेबेकाह के भाई अरामवासी लाबान के यहां चले गए, जो पद्दन-अराम के बेथुएल के पुत्र थे.

  12. उत्पत्ति २८:६लगभग १७६० ई.पू.

    एसाव को मालूम हो गया था कि यित्सहाक ने याकोब को आशीष देकर पद्दन-अराम में भेजा है ताकि वह अपने लिए पत्नी चुने, और आदेश भी दिया है कि वह कनानी स्त्री से विवाह न करे,

  13. उत्पत्ति २८:७लगभग १७६० ई.पू.

    और याकोब अपने पिता एवं माता की बात को मानते हुए पद्दन-अराम में चले गये.

  14. उत्पत्ति २८:८लगभग १७६० ई.पू.

    तब एसाव को यह समझ में आ गया, कि उसके पिता को कनान देश की कन्याएं पसंद नहीं हैं.

  15. उत्पत्ति २८:९लगभग १७६० ई.पू.

    इसलिये एसाव ने अपनी पत्नियों के अलावा अब्राहाम के पुत्र इशमाएल की पुत्री माहालाथ से, जो नेबाइयोथ की बहन थी, विवाह कर लिया.

  16. उत्पत्ति २८:१०लगभग १७६० ई.पू.

    याकोब बेअरशेबा से हारान की ओर गए.

  17. उत्पत्ति २८:११लगभग १७६० ई.पू.

    जब वह एक जगह पहुंचा तब रात को उन्हें वहां रुकना पड़ा, क्योंकि तब तक सूरज ढल चुका था. उन्होंने एक पत्थर अपने सिर के नीचे रखा और लेट गए.

  18. उत्पत्ति २८:१२लगभग १७६० ई.पू.

    तब उन्होंने एक स्वप्न देखा: एक सीढ़ी पृथ्वी पर खड़ी है, उसका दूसरा सिरा स्वर्ग तक पहुंचा हुआ था. उन्होंने देखा कि परमेश्वर के स्वर्गदूत इस पर चढ़ रहे और उतर रहे हैं.

  19. उत्पत्ति २८:१३लगभग १७६० ई.पू.

    उन्होंने देखा कि ऊपर याहवेह खड़े हैं, और कह रहे हैं, “मैं ही याहवेह हूं, तुम्हारे पिता अब्राहाम तथा यित्सहाक का परमेश्वर. जिस भूमि पर तुम इस समय लेटे हुए हो, मैं वह भूमि तुम्हें तथा तुम्हारे वंश को दूंगा.

  20. उत्पत्ति २८:१४लगभग १७६० ई.पू.

    तुम्हारा वंश भूमि की धूल के समान आशीषित होकर पृथ्वी के चारों दिशाओं में फैल जायेगा. पृथ्वी पर सभी लोग तुम्हारे और तुम्हारे वंश के द्वारा आशीषित होंगे.

  21. उत्पत्ति २८:१५लगभग १७६० ई.पू.

    मैं तुम्हारे साथ रहूंगा और जहां कहीं तुम जाओगे, मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा. और तुम्हें इसी देश में लौटा ले आऊंगा. जब तक मैं अपनी बात पूरी न कर लूं तब तक तुम्हें न छोडूंगा.”

  22. उत्पत्ति २८:१६लगभग १७६० ई.पू.

    अचानक याकोब की नींद खुल गई और कहा, “निश्चय इस स्थान पर याहवेह की उपस्थिति है और मुझे यह मालूम ही न था.”

  23. उत्पत्ति २८:१७लगभग १७६० ई.पू.

    याकोब भयभीत होकर कहने लगे, “अनोखा है यह स्थान! यह परमेश्वर के भवन के अलावा कुछ और नहीं हो सकता; ज़रूर यह स्वर्ग का द्वार ही होगा.”

  24. उत्पत्ति २८:१८लगभग १७६० ई.पू.

    याकोब ने उस पत्थर को, जिसे उसने अपने सिर के नीचे रखा था, एक स्तंभ के जैसे खड़ा कर उस पर तेल डाला,

  25. उत्पत्ति २८:१९लगभग १७६० ई.पू.

    याकोब ने उस स्थान का नाम बेथेल रखा; जबकि उस स्थान का नाम लूज़ था.