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circa 1406–1380 BC

Conquest of Canaan

Joshua leads Israel across the Jordan into the promised land, defeating the Canaanite kingdoms one by one.

658 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. यहोशू १५:५०लगभग १४४३ ई.पू.

    अनाब, एशतमोह, अनीम,

  2. यहोशू १५:५१लगभग १४४३ ई.पू.

    गोशेन, होलोन तथा गिलोह; गांवों सहित ग्यारह नगर.

  3. यहोशू १५:५२लगभग १४४३ ई.पू.

    अरब, दूमाह, एशआन,

  4. यहोशू १५:५३लगभग १४४३ ई.पू.

    यानूम, बेथ-तप्पूआह, अफेकाह,

  5. यहोशू १५:५४लगभग १४४३ ई.पू.

    हूमटा, किरयथ-अरबा अर्थात् हेब्रोन तथा ज़ीओर; गांवों सहित नौ नगर.

  6. यहोशू १५:५५लगभग १४४३ ई.पू.

    माओन, कर्मेल, ज़ीफ़, युताह,

  7. यहोशू १५:५६लगभग १४४३ ई.पू.

    येज़्रील, योकदआम, ज़ानोहा,

  8. यहोशू १५:५७लगभग १४४३ ई.पू.

    कयीन, गिबियाह तथा तिमनाह; इनके गांवों सहित दस नगर.

  9. यहोशू १५:५८लगभग १४४३ ई.पू.

    हलहूल, बेथ-त्सूर, गेदोर,

  10. यहोशू १५:५९लगभग १४४३ ई.पू.

    माराथ, बेथ-अनोथ, एलतेकोन; इनके गांवों सहित छः नगर.

  11. यहोशू १५:६०लगभग १४४३ ई.पू.

    किरयथ-बाल अर्थात् किरयथ-यआरीम तथा रब्बाह, इनके गांवों सहित दो नगर.

  12. यहोशू १५:६१लगभग १४४३ ई.पू.

    निर्जन प्रदेश में: बेथ-अराबाह, मिद्दीन, सकाकाह,

  13. यहोशू १५:६२लगभग १४४३ ई.पू.

    निबशान, लवण का नगर तथा एन-गेदी; इनके गांवों सहित छः नगर जो.

  14. यहोशू १५:६३लगभग १४४३ ई.पू.

    यहूदाह गोत्रज येरूशलेम के ही रहनेवाले यबूसियों को निकाल न सके. इस कारण यबूसी अब तक यहूदाह गोत्रजों के साथ हैं.

  15. यहोशू १६:१लगभग १४४३ ई.पू.

    योसेफ़ को येरीख़ो नगर के पास यरदन नदी से लेकर येरीख़ो के जल के सोते तक और पूर्व में निर्जन प्रदेश तक भूमि दी गई जो येरीख़ो से लेकर पर्वतीय क्षेत्र से होते हुए बेथेल तक थी.

  16. यहोशू १६:२लगभग १४४३ ई.पू.

    यह सीमा बेथेल से लूज़ तक थी और आगे बढ़ते हुए अटारोथ के अर्कीयों की सीमा तक थी.

  17. यहोशू १६:३लगभग १४४३ ई.पू.

    यह पश्चिम से होते हुए यफलेतियों की सीमा से आगे बढ़ते हुए बेथ-होरोन तथा गेज़ेर से होती हुई भूमध्य-सागर तट पर खत्म होती है.

  18. यहोशू १६:४लगभग १४४३ ई.पू.

    इस प्रकार योसेफ़ के पुत्र मनश्शेह तथा एफ्राईम को उनका हिस्सा मिला.

  19. यहोशू १६:५लगभग १४४३ ई.पू.

    उनके परिवारों के अनुसार एफ्राईम वंश के मीरास की सीमाएं इस प्रकार थी: पूर्व में उनकी सीमा अटारोथ-अद्दार से लेकर उच्चतर बेथ-होरोन तक थी.

  20. यहोशू १६:६लगभग १४४३ ई.पू.

    यह सीमा पश्चिम की ओर बढ़ती गई: जो उत्तर में मिकमथाथ, फिर पूर्व में तानथ-शिलोह की ओर मुड़ गई, फिर बढ़ते हुए यानोहा में जा पहुंची.

  21. यहोशू १६:७लगभग १४४३ ई.पू.

    यानोहा से दक्षिण की ओर बढ़ते हुए अटारोथ और नाराह पहुंचकर येरीख़ो पहुंच गई और वहां से निकलकर यरदन पर खत्म हुई.

  22. यहोशू १६:८लगभग १४४३ ई.पू.

    फिर तप्पूआह से यह सीमा पश्चिम में कानाह नदी की और बढ़ जाती है और भूमध्य-सागर पर जाकर मिल जाती है. एफ्राईम गोत्र के परिवारों के अनुसार उनका हिस्सा यही है,

  23. यहोशू १६:९लगभग १४४३ ई.पू.

    इसके अलावा कुछ ऐसे गांव एवं नगर भी हैं, जो मनश्शेह की विरासत की सीमा के अंदर थे, जो एफ्राईम वंश को दे दिए गए थे.

  24. यहोशू १६:१०लगभग १४४३ ई.पू.

    लेकिन उन्होंने उन कनानियों को बाहर नहीं निकाला, जो गेज़ेर में रह रहे थे. तब आज तक कनानी एफ्राईम वंश के बीच दास बनकर रह रहे हैं.

  25. यहोशू १७:१लगभग १४४३ ई.पू.

    फिर मनश्शेह के गोत्र के लिए भूमि का बंटवारा किया गया. मनश्शेह के बड़े बेटे माखीर को गिलआद तथा बाशान नामक स्थान दिया गया, क्योंकि वह एक योद्धा था.