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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. केवल लूकॉस मेरे साथ हैं. आते हुए मार्कास को अपने साथ ले आना क्योंकि वह सेवकाई में मेरे लिए उपयोगी है.

  2. मैंने तुख़िकस को इफ़ेसॉस नगर भेज दिया है.

  3. वह अंगरखा, जो मैं त्रोऑस नगर में कार्पूस के पास छोड़ आया था, साथ लेते आना, साथ ही वे ग्रंथ भी, विशेषतः चर्मपत्र.

  4. अलेक्सान्दरॉस ठठेरे ने मेरी बड़ी हानि की है. प्रभु उसे उसके कामों के अनुसार प्रतिफल प्रदान करें.

  5. तुम स्वयं भी उससे सावधान रहो क्योंकि उसने हमारी शिक्षा का कड़ा विरोध किया था.

  6. मेरी पहली सुनवाई के समय कोई मेरे साथ नहीं था—सबने मुझे त्याग दिया; इसके लिए उन्हें दोषी न माना जाए.

  7. प्रभु मेरे साथ थे तथा उन्होंने मुझे सामर्थ्य दी कि मेरे द्वारा संदेश की घोषणा पूरी तरह सम्पन्‍न हो जाए तथा सब गैर-यहूदी इसे सुन सकें. मैं सिंह के मुख से बचा लिया गया.

  8. प्रभु मुझे हर एक बुराई से उबारेंगे तथा अपने स्वर्गीय राज्य में सुरक्षित ले जाएंगे. उनकी महिमा युगानुयुग हो. आमेन.

  9. प्रिस्का व अकुलॉस को तथा ओनेसिफ़ोरस के परिवार को मेरा नमस्कार.

  10. इरास्तुस अब तक कोरिन्थॉस नगर में ही है परंतु त्रोफ़िमस की बीमारी के कारण उसे मिलेतॉस नगर में छोड़ना पड़ा.

  11. जाड़े के पहले ही आने का पूरा प्रयास करना. तुम्हें यूबुलस का नमस्कार, साथ ही पुदेन्स, लीनोस, क्लौदिआ तथा सभी विश्वासी भाई बहनों को भी नमस्कार.

  12. प्रभु तुम्हारी आत्मा के साथ हों. तुम पर अनुग्रह बना रहे.

  13. तीतॉस १:१लगभग ६५ ई.

    विश्वास की सहभागिता में मेरे सच्चे पुत्र तीतॉस को परमेश्वर के दास तथा मसीह येशु के प्रेरित पौलॉस की ओर से, जिन्हें परमेश्वर के चुने हुओं के विश्वास तथा उनके सत्य के ज्ञान के लिए,

  14. तीतॉस १:२लगभग ६५ ई.

    जो अनंत जीवन की आशा में परमेश्वर की प्रतिज्ञा के अनुसार है, जिस अनंत जीवन की प्रतिज्ञा सनातन से ही परमेश्वर द्वारा की गई, जो कभी झूठ नहीं बोलते,

  15. तीतॉस १:३लगभग ६५ ई.

    अब जिनके ठहराए हुए समय पर इस आशा का संदेश परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की आज्ञा पर मुझे सौंपी गई प्रचार की सेवकाई द्वारा प्रकट किया गया है.

  16. तीतॉस १:४लगभग ६५ ई.

    पिता परमेश्वर तथा मसीह येशु हमारे उद्धारकर्ता की ओर से, तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले.

  17. तीतॉस १:५लगभग ६५ ई.

    मैंने तुम्हें क्रेते द्वीप में इसलिये छोड़ा था कि तुम वहां बचे हुए काम की पूरी व्यवस्था करो तथा हर एक नगर में मेरे अनुदेशानुसार ऐसे कलीसिया-पुरनियों की नियुक्ति करो,

  18. तीतॉस १:६लगभग ६५ ई.

    जो निर्दोष तथा एक पत्नी के पति हों, जिनकी संतान विश्वासी हो तथा जिन पर कामुकता और निरंकुशता का आरोप न हो.

  19. तीतॉस १:७लगभग ६५ ई.

    परमेश्वर द्वारा चुने हुए प्रबंधक के रूप में भंडारी का निर्दोष होना ज़रूरी है, न कि हठी, क्रोधी, मदिरा पीनेवाला, झगड़ालू या लालची.

  20. तीतॉस १:८लगभग ६५ ई.

    वह अतिथि-सत्कार करनेवाला, सब प्रकार की उचित बातों का समर्थक, विवेकशील, न्यायी, पवित्र तथा ऐसा हो जिसने अपनी इंद्रियों को अपने वश में कर लिया हो.

  21. तीतॉस १:९लगभग ६५ ई.

    वह उस विश्वसनीय संदेश पर स्थिर रहे, जो सिद्धांत शिक्षा के अनुकूल है कि वह खरी शिक्षा का उपदेश कर इसके विरोधियों का मुंह बंद कर सके.

  22. तीतॉस १:१०लगभग ६५ ई.

    अनेक लोग निरंकुश, बकवादी और कपटी हैं, विशेषकर वे, जो ख़तना समर्थक हैं.

  23. तीतॉस १:११लगभग ६५ ई.

    इनका मुख बंद करना अत्यावश्यक है क्योंकि ये नीच कमाई के लाभ के लिए गलत शिक्षा देकर घर के घर उजाड़ रहे हैं.

  24. तीतॉस १:१२लगभग ६५ ई.

    उन्हीं में से एक ने, जो उनका अपना तथाकथित भविष्यवक्ता है, कहा है, “क्रेतेवासी हमेशा ही झूठे, दुष्ट पशु और आलसी पेटू रहे हैं.”

  25. तीतॉस १:१३लगभग ६५ ई.

    यह घोषणा सच है. इसलिये उन्हें कड़ी फटकार लगाना, कि वे विश्वास में स्थिर बने रहें