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circa AD 48–96

Letters to the Churches

Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.

2,767 वचन · 21 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. तीतॉस ३:८लगभग ६५ ई.

    ये बात विश्वास करने योग्य हैं. और मैं चाहता हूं कि तुम इन विषयों को निडरता से सिखाओ कि जिन्होंने परमेश्वर में विश्वास किया है, उनके मन उन कामों पर केंद्रित हो जाएं, जो सबके लिए आदर्श और लाभदायक हैं.

  2. तीतॉस ३:९लगभग ६५ ई.

    मूर्खता भरे विवादों, वंशावली संबंधी झगड़े, व्यवस्था संबंधी वाद-विवाद से दूर रहो क्योंकि ये निष्फल और व्यर्थ हैं.

  3. तीतॉस ३:१०लगभग ६५ ई.

    झगड़ा करनेवाले व्यक्ति को पहली और दूसरी बार चेतावनी देने के बाद उससे किसी भी प्रकार का संबंध न रखो,

  4. तीतॉस ३:११लगभग ६५ ई.

    यह जानते हुए कि ऐसा व्यक्ति भटक गया और पाप में लीन हो गया है. वह अपने ऊपर स्वयं दंड-आज्ञा ठहरा रहा है.

  5. तीतॉस ३:१२लगभग ६५ ई.

    जब मैं आर्तेमास या तुख़िकस को तुम्हारे पास भेजूं तो जल्द से जल्द मुझसे निकोपोलिस नगर में भेंट करने का प्रयास करना. मैंने जाड़ा वहां बिताने का निर्णय लिया है.

  6. तीतॉस ३:१३लगभग ६५ ई.

    अपोल्लॉस और विधि-विशेषज्ञ ज़ेनॉस की यात्रा में हर प्रकार से सहायता करना कि उन्हें किसी प्रकार की कमी न हो.

  7. तीतॉस ३:१४लगभग ६५ ई.

    साथी विश्वासी अच्छे कामों में जुट जाना सीखें कि रोज़ की ज़रूरतें पूरी हों और वे निष्फल न हो जाएं.

  8. तीतॉस ३:१५लगभग ६५ ई.

    उनकी ओर से, जो मेरे साथ हैं नमस्कार. तथा जो विश्वास के कारण हमसे प्रेम करते हैं, उनको नमस्कार. तुम सब पर अनुग्रह बना रहे.

  9. फ़िलेमोन १:१लगभग ६४ ई.

    मसीह येशु के लिए बंदी पौलॉस तथा हमारे भाई तिमोथियॉस की ओर से, हमारे प्रिय सहकर्मी फ़िलेमोन,

  10. फ़िलेमोन १:२लगभग ६४ ई.

    हमारी बहन आप्फ़िया, हमारे साथी योद्धा आरखिप्पॉस और कलीसिया को, जो तुम्हारे घर में इकट्ठा होती है:

  11. फ़िलेमोन १:३लगभग ६४ ई.

    हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु येशु मसीह का अनुग्रह व शांति प्राप्‍त हो.

  12. फ़िलेमोन १:४लगभग ६४ ई.

    अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें याद करते हुए मैं हमेशा अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं,

  13. फ़िलेमोन १:५लगभग ६४ ई.

    क्योंकि मैं प्रभु येशु मसीह तथा सभी पवित्र लोगों के प्रति तुम्हारे प्रेम और विश्वास के बारे में सुना करता हूं.

  14. फ़िलेमोन १:६लगभग ६४ ई.

    मेरी प्रार्थना है कि तुम्हारे विश्वास का सहभागी होना हर एक वरदान के स्पष्ट अहसास के द्वारा, जो तुममें मसीह के लिए है, प्रभावशाली हो.

  15. फ़िलेमोन १:७लगभग ६४ ई.

    प्रिय भाई बहनो, तुम्हारी प्रेम भावना से मुझे बहुत आनंद व प्रोत्साहन मिला है क्योंकि तुम्हारे कारण पवित्र लोगों के मन आनंदित हुए हैं.

  16. फ़िलेमोन १:८लगभग ६४ ई.

    यद्यपि मुझे मसीह में तुम्हें यह आज्ञा देने का अधिकार है कि तुम्हारा क्या करना सही है,

  17. फ़िलेमोन १:९लगभग ६४ ई.

    मैं, मसीह येशु के लिए बंदी बूढ़ा पौलॉस, प्रेमवश तुमसे इस समय मात्र विनती कर रहा हूं.

  18. फ़िलेमोन १:१०लगभग ६४ ई.

    मेरी विनती मेरे पुत्र ओनेसिमॉस के संबंध में है, जो कारावास में मेरा आत्मिक पुत्र बन गया है,

  19. फ़िलेमोन १:११लगभग ६४ ई.

    जो इससे पहले तुम्हारे लिए किसी काम का न था किंतु अब तुम्हारे और मेरे, दोनों के लिए बड़े काम का हो गया है.

  20. फ़िलेमोन १:१२लगभग ६४ ई.

    उसे, जो अब मेरे हृदय का टुकड़ा है, मैं तुम्हारे पास वापस भेज रहा हूं.

  21. फ़िलेमोन १:१३लगभग ६४ ई.

    हालांकि मैं चाहता था कि उसे अपने पास ही रखूं कि वह तुम्हारा स्थान लेकर ईश्वरीय सुसमाचार के लिए मुझ बंदी की सेवा करे.

  22. फ़िलेमोन १:१४लगभग ६४ ई.

    किंतु मैंने तुम्हारी सलाह के बिना कुछ भी करना उचित न समझा कि तुम्हारी उदारता मजबूरीवश नहीं परंतु अपनी इच्छा से हो.

  23. फ़िलेमोन १:१५लगभग ६४ ई.

    क्योंकि वह तुमसे कुछ समय के लिए इसी कारण अलग हुआ कि तुम उसे हमेशा के लिए प्राप्‍त कर लो.

  24. फ़िलेमोन १:१६लगभग ६४ ई.

    दास के रूप में नहीं परंतु दास से ऊंचे एक प्रिय भाई के रूप में, विशेषकर मेरे लिए. वह मुझे तो अत्यंत प्रिय है ही किंतु मुझसे बढ़कर तुम्हें दोनों ही रूपों में—व्यक्ति के रूप में तथा प्रभु में भाई के रूप में.

  25. फ़िलेमोन १:१७लगभग ६४ ई.

    इसलिये यदि तुम मुझे अपना सहभागी समझते हो तो मेरी विनती है कि तुम उसे ऐसे अपना लो जैसे तुमने मुझे अपनाया था.