circa AD 48–96
Letters to the Churches
Paul and other apostles write to strengthen, correct, and encourage the scattered churches across the Roman world.
इस काल के वचन
- 2 तिमोथियॉस ३:३लगभग ६६ ई.
निर्मम, क्षमा रहित, दूसरों की बुराई करनेवाला, असंयमी, कठोर, भले का बैरी,
- 2 तिमोथियॉस ३:४लगभग ६६ ई.
विश्वासघाती, ढीठ, घमंडी तथा परमेश्वर भक्त नहीं परंतु सुख-विलास के चाहनेवाले होंगे.
- 2 तिमोथियॉस ३:५लगभग ६६ ई.
उनमें परमेश्वर भक्ति का स्वरूप तो दिखाई देगा किंतु इसका सामर्थ्य नहीं. ऐसे लोगों से दूर रहना.
- 2 तिमोथियॉस ३:६लगभग ६६ ई.
इन्हीं में से कुछ वे हैं, जो घरों में घुसकर निर्बुद्धि स्त्रियों को अपने वश में कर लेते हैं, जो पापों में दबी तथा विभिन्न वासनाओं में फंसी हुई हैं.
- 2 तिमोथियॉस ३:७लगभग ६६ ई.
वे सीखने का प्रयास तो करती हैं किंतु सच्चाई के सारे ज्ञान तक पहुंच ही नहीं पातीं.
- 2 तिमोथियॉस ३:८लगभग ६६ ई.
जिस प्रकार यान्नेस तथा याम्ब्रेस ने मोशेह का विरोध किया था, उसी प्रकार ये भ्रष्ट बुद्धि के व्यक्ति सच का विरोध करते हैं. बनावटी है इनका विश्वास.
- 2 तिमोथियॉस ३:९लगभग ६६ ई.
यह सब अधिक समय तक नहीं चलेगा क्योंकि उन दोनों के समान उनकी मूर्खता सबके सामने प्रकाश में आ जाएगी.
- 2 तिमोथियॉस ३:१०लगभग ६६ ई.
तुमने मेरी शिक्षा, स्वभाव, उद्देश्य, विश्वास, सताए जाने के समय, प्रेम तथा धीरज और सहनशीलता का भली-भांति अनुसरण किया है
- 2 तिमोथियॉस ३:११लगभग ६६ ई.
तथा तुम्हें मालूम है कि अंतियोख़, इकोनियॉन तथा लुस्त्रा नगरों में मुझ पर कैसे-कैसे अत्याचार हुए, फिर भी उन सभी में से प्रभु ने मुझे निकाला है.
- 2 तिमोथियॉस ३:१२लगभग ६६ ई.
यह सच है कि वे सभी, जो मसीह येशु में सच्चाई का जीवन जीने का निश्चय करते हैं, सताए ही जाएंगे,
- 2 तिमोथियॉस ३:१३लगभग ६६ ई.
परंतु दुष्ट तथा बहकानेवाले छल करते और स्वयं छले जाते हुए लगातार विनाश के गड्ढे में गिरते जाएंगे.
- 2 तिमोथियॉस ३:१४लगभग ६६ ई.
किंतु तुम स्वयं उन शिक्षाओं में, जो तुमने प्राप्त की तथा जिनकें विषय में तुम आश्वस्त हो चुके हो, स्थिर रहो, यह याद रखते हुए कि किन्होंने तुम्हें ये शिक्षाएं दी हैं,
- 2 तिमोथियॉस ३:१५लगभग ६६ ई.
यह भी कि बचपन से तुम पवित्र अभिलेखों से परिचित हो, जो तुम्हें वह बुद्धिमता देने में समर्थ हैं, जिससे मसीह येशु में विश्वास के द्वारा उद्धार प्राप्त होता है.
- 2 तिमोथियॉस ३:१६लगभग ६६ ई.
संपूर्ण पवित्र शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है. यह शिक्षा देने, गलत धारणाओं का विरोध करने, दोष-सुधार तथा धार्मिकता की शिक्षा के लिए सही है,
- 2 तिमोथियॉस ३:१७लगभग ६६ ई.
कि परमेश्वर का जन पूरी तरह से हर एक अच्छे कार्य के लिए सुसज्जित पाया जाए.
- 2 तिमोथियॉस ४:१लगभग ६६ ई.
मैं परमेश्वर तथा मसीह येशु की उपस्थिति में, जो जीवितों तथा मरे हुओं का न्याय करेंगे तथा उनके दोबारा आगमन तथा उनके राज्य के विषय को ध्यान में रखते हुए तुम्हें चेतावनी देता हूं:
- 2 तिमोथियॉस ४:२लगभग ६६ ई.
वचन का प्रचार करो. समय अनुकूल हो या प्रतिकूल, हमेशा तैयार रहो, अत्यंत धीरज के साथ तथा शिक्षा के लक्ष्य से गलत धारणाओं का विरोध करो, कर्तव्य का अहसास कराओ तथा प्रोत्साहित करो,
- 2 तिमोथियॉस ४:३लगभग ६६ ई.
क्योंकि एक ऐसा समय आएगा जब वे खरी शिक्षाओं को सह न सकेंगे. वे अपनी लालसा पूरी करने के लिए ऐसे उपदेशकों को इकट्ठा करेंगे, जो उन्हें सिर्फ कानों को अच्छा लगने वाले उपदेश देंगे.
- 2 तिमोथियॉस ४:४लगभग ६६ ई.
एक ओर तो वे सच्चाई से कान फेर लेंगे तथा दूसरी ओर कहानियों पर ध्यान लगाएंगे
- 2 तिमोथियॉस ४:५लगभग ६६ ई.
परंतु तुम इन सब विषयों में सावधान रहना; कठिनाइयां सह लेना; ईश्वरीय सुसमाचार के प्रचारक का काम करना; अपनी सेवकाई को पूरा करना.
- 2 तिमोथियॉस ४:६लगभग ६६ ई.
मैं अर्घ (पेय-यज्ञ) के समान उंडेला जा चुका हूं, मेरे जाने का समय आ चुका है.
- 2 तिमोथियॉस ४:७लगभग ६६ ई.
मेरा संघर्ष सार्थक रहा है. मैंने अपनी दौड़ पूरी कर ली है. मैंने दृढतापूर्वक विश्वास को थामे रखा है.
- 2 तिमोथियॉस ४:८लगभग ६६ ई.
भविष्य में मेरे लिए धार्मिकता का मुकुट सुरक्षित है, जो न्याय करनेवाले प्रभु मुझे उस दिन देंगे—मुझे ही नहीं परंतु उन सबको भी, जो उनके दोबारा आगमन की बड़ी आशा से प्रतीक्षा कर रहे हैं.
- 2 तिमोथियॉस ४:९लगभग ६६ ई.
तुम जल्द से जल्द मेरे पास आने का पूरा प्रयास करो
- 2 तिमोथियॉस ४:१०लगभग ६६ ई.
क्योंकि देमास ने आधुनिक युग के आकर्षण में मुझे त्याग कर थेस्सलोनिकेयुस नगर जाना सही समझा है. क्रेसकेस गलातिया नगर और तीतॉस दालमतिया नगर गए हुए हैं.