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God

11,427 वचन · 2 परिवार के सदस्य

God का उल्लेख करने वाले वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. मैंने एफ्राईम को सोर के जैसे मनभावने स्थान में बसे हुए देखा है. पर एफ्राईम अपने बच्चों को वध करनेवाले के पास ले आएगा.”

  2. हे याहवेह, उन्हें दीजिए— आप उन्हें क्या देंगे? उन्हें ऐसे गर्भ दीजिए, जिससे गर्भपात हो जाता है और ऐसे स्तन दीजिए, जो सूखे हों.

  3. “गिलगाल में उनके सब बुराई के कारण, मैंने उनसे वहां घृणा किया. उनके पापमय कामों के कारण, मैं उन्हें अपने भवन से बाहर निकाल दूंगा. अब मैं उनसे प्रेम नहीं करूंगा; उनके सब अगुए विद्रोही हैं.

  4. एफ्राईम पर बीमारी लग गई है, उनकी जड़ सूख गई है, उनमें फल नहीं लगते हैं. यदि वे बच्चों को जन्म भी दें, तो मैं उनके पोषित बच्चों को मार डालूंगा.”

  5. मेरा परमेश्वर उनको अस्वीकार करेगा क्योंकि उन्होंने उसकी बातों को नहीं माना है; वे जाति-जाति के लोगों के बीच भटकते फिरेंगे.

  6. उनका हृदय धोखेबाज है, और अब वे ज़रूर दंड भोगेंगे. याहवेह उनकी वेदियों को ढहा देंगे और उनके पवित्र पत्थरों को नष्ट कर देंगे.

  7. तब वे कहेंगे, “हमारा कोई राजा नहीं है क्योंकि हमने याहवेह का आदर नहीं किया. पर यदि हमारा कोई राजा होता भी, तो वह हमारे लिये क्या करता?”

  8. जब मेरी इच्छा होगी, मैं उन्हें दंड दूंगा; अन्य जातियां उनके दो गुने पाप के कारण, उन्हें बंधन में डालने के लिये उनके विरुद्ध इकट्ठा होंगी.

  9. एफ्राईम एक प्रशिक्षित बछिया है जिसे अन्‍न दांवना अच्छा लगता है; इसलिये मैं उसके सुंदर गर्दन पर एक जूआ रखूंगा. मैं एफ्राईम को हांकूंगा, यहूदाह को हल चलाना ज़रूरी है, और याकोब को मिट्टी तोड़ना ज़रूरी है.

  10. अपने लिए धर्मीपन का बीज बोओ, निश्छल प्रेम की फसल काटो, और न जूते हुए भूमि की मिट्टी को तोड़ो; क्योंकि यह समय है कि याहवेह की खोज करो, जब तक कि वह आकर तुम पर धर्मीपन की वर्षा न करें.

  11. “जब इस्राएल बालक था, मैंने उससे प्रेम किया, और मिस्र देश से मैंने अपने पुत्र को बुलाया.

  12. वह मैं ही था, जिसने एफ्राईम को हाथ पकड़कर चलना सिखाया; परंतु उन्होंने इस बात को न जाना कि वह मैं ही था, जिसने उन्हें चंगा किया.

  13. मैंने मानवीय दया की डोरी, और प्रेम के बंधन से उनकी अगुवाई की. उनके लिये मैं वैसा था जैसे कोई छोटे बच्‍चे को गाल तक उठाता है, और मैं झुककर उन्हें खाना खिलाता था.

  14. मेरे लोग मुझसे दूर जाने का ठान लिये हैं. यद्यपि वे मुझे सर्वोच्च परमेश्वर कहते हैं, मैं उनकी किसी भी प्रकार से प्रशंसा नहीं करूंगा.

  15. “हे एफ्राईम, मैं तुम्हें कैसे छोड़ सकता हूं? हे इस्राएल, मैं तुम्हें किसी और को सौंप दूं? मैं तुम्हारे साथ अदमाह के जैसे व्यवहार कैसे कर सकता हूं? मैं तुम्हें ज़ेबोईम के समान कैसे बना सकता हूं? मेरा हृदय मेरे भीतर बदल गया है; मेरी सारी करुणा जागृत होती है.

  16. मैं अपने भयंकर क्रोध के अनुसार नहीं करूंगा, न ही मैं एफ्राईम को फिर से नाश करूंगा. क्योंकि मैं परमेश्वर हूं, मनुष्य नहीं— तुम्हारे बीच एक पवित्र जन. मैं उनके शहरों के विरुद्ध नहीं आऊंगा.

  17. वे याहवेह के पीछे चलेंगे; याहवेह एक-एक सिंह के समान गरजेंगे. जब वह गरजेंगे, तो उनकी संतान कांपती हुई पश्चिम दिशा से आएंगी.

  18. वे मिस्र देश से, गौरेया पक्षी की तरह कांपती हुई, और अश्शूर देश से पंड़की की तरह पंख फड़फड़ाते हुए आएंगी. मैं उन्हें उनके घरों में बसाऊंगा,” याहवेह घोषणा करते हैं.

  19. एफ्राईम ने मेरे चारों ओर झूठ का, और इस्राएल ने छल का ढेर लगा दिया है. और यहूदाह उद्दंडता से परमेश्वर के विरुद्ध है, और तो और वह विश्वासयोग्य पवित्र जन के विरुद्ध है.

  20. यहूदिया के विरुद्ध भी याहवेह का आरोप है; वह याकोब को उसके चालचलन के अनुसार दंड देंगे और उसके कार्यों के अनुरूप उसको बदला देंगे.

  21. जब याकोब ने अपने मां के कोख से ही अपने भाई की एड़ी जकड़ ली थी; एक मनुष्य के रूप में उसने परमेश्वर से संघर्ष किया.

  22. याहवेह सर्वशक्तिमान परमेश्वर, याहवेह उनका नाम है!

  23. पर अवश्य है कि तुम अपने परमेश्वर के पास लौटो; प्रेम और न्याय के काम में बने रहो, और हमेशा अपने परमेश्वर पर निर्भर रहो.

  24. “जब से तुम मिस्र देश से निकलकर आये, मैं याहवेह तुम्हारा परमेश्वर हूं; मैं फिर तुम्हें तंबुओं में निवास कराऊंगा, जैसे कि तुम्हारे ठहराए त्योहार के दिनों में हुआ करता था.

  25. मैंने भविष्यवक्ताओं से बात किया, उन्हें कई दर्शन दिखाये और उनके माध्यम से अनेक दृष्टांत बताये.”