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God

11,427 वचन · 2 परिवार के सदस्य

God का उल्लेख करने वाले वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. याहवेह ने मिस्र से इस्राएल को निकालने के लिये एक भविष्यवक्ता का उपयोग किया, एक भविष्यवक्ता के द्वारा उसने उसका ध्यान रखा.

  2. पर एफ्राईम ने याहवेह के क्रोध को बहुत भड़काया है; उसका प्रभु उसके द्वारा किए गये खून का दोष उसी पर रहने देगा और उसके अनादर के लिये उसको बदला चुकाएगा.

  3. “परंतु मैं तब से याहवेह तुम्हारा परमेश्वर हूं, जब से तुम मिस्र देश से निकलकर आये. तुम मेरे सिवाय किसी और को परमेश्वर करके न मानना, मेरे अलावा कोई और उद्धारकर्ता नहीं है.

  4. मैंने उजाड़-निर्जन प्रदेश में, गर्मी से तपते देश में तुम्हारा ध्यान रखा.

  5. जब मैंने उन्हें खाना खिलाया, तो वे संतुष्ट हुए; और जब वे संतुष्ट हो गए, तो वे घमंडी हो गए; और तब वे मुझे भूल गए.

  6. इसलिये मैं उनके लिये एक सिंह के जैसा होऊंगा, एक चीते के समान मैं रास्ते पर उनके घात में रहूंगा.

  7. मैं उनके लिये उस मादा भालू के समान बन जाऊंगा, जिसके बच्‍चे छीन लिये गये हैं, मैं उन पर हमला करूंगा और उन्हें फाड़ डालूंगा; एक सिंह के समान मैं उन्हें फाड़ डालूंगा, एक जंगली जानवर उन्हें फाड़कर अलग-अलग कर देगा.

  8. “हे इस्राएल, तुम नाश हुए, क्योंकि तुम मेरे विरुद्ध, मेरे सहायक के विरुद्ध हो.

  9. कहां है तुम्हारा राजा, जो तुम्हें बचाए? कहां हैं तुम्हारे सब नगरों के शासक, जिनके बारे में तुमने कहा था, ‘मुझे एक राजा और राजकुमार दो’?

  10. इसलिये गुस्से में आकर मैंने तुम्हें एक राजा दिया, और अपने क्रोध में ही मैंने उसे तुमसे अलग कर दिया.

  11. “मैं इन लोगों को कब्र की शक्ति से छुटकारा दूंगा; मैं इन्हें मृत्यु से बचाऊंगा. हे मृत्यु, कहां है तुम्हारी महामारियां? हे कब्र, कहां है तुम्हारा विनाश? “मैं कोई करुणा नहीं करूंगा,

  12. यद्यपि वह अपने भाइयों के बीच उन्‍नति करे. एक पूर्वी हवा याहवेह की ओर से मरुस्थल से बहेगी; उसके सोतों से पानी का फूटना बंद हो जाएगा और उसका कुंआ सूख जाएगा. उसके गोदाम में रखी सब बहुमूल्य चीज़ें लूट ली जाएंगी.

  13. अवश्य है कि शमरिया के लोग अपने अपराध का दंड भोगें, क्योंकि उन्होंने अपने परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह किया है. वे तलवार से मारे जाएंगे; उनके छोटे बच्चों को भूमि पर पटक दिया जाएगा, और उनकी गर्भवती स्त्रियों के पेट फाड़ दिए जाएंगे.”

  14. हे इस्राएल, याहवेह अपने परमेश्वर के पास लौट आओ. तुम्हारा पाप ही तुम्हारे पतन का कारण है!

  15. याहवेह की बातों को मानो और उसके पास लौट आओ. उससे कहो: “हमारे सब पापों को क्षमा करें, और अनुग्रहपूर्वक हमें ग्रहण करें, कि हम अपने मुंह से धन्यवाद रूपी बलि चढ़ा सकें.

  16. अश्शूर हमारा उद्धार नहीं कर सकता; हम युद्ध के घोड़ों पर नहीं चढ़ेंगे. हम अपने हाथों से बनाये चीज़ों को फिर कभी न कहेंगे ‘हमारे ईश्वर,’ क्योंकि अनाथ को आपसे ही करुणा मिलती है.”

  17. “मैं उनकी बेवफ़ाई को दूर करूंगा, और स्वछंद रूप से उन्हें प्रेम करूंगा, क्योंकि मेरा क्रोध उनके ऊपर से हट गया है.

  18. मैं इस्राएल के लिये ओस के समान होऊंगा; वह कुमुदिनी के फूल के समान खिलेगा. लबानोन के देवदार वृक्ष के समान उसकी जड़ें नीचे दूर-दूर तक फैलेंगी;

  19. हे एफ्राईम, मूर्तियों से अब मेरा और क्या काम? मैं उसे उत्तर दूंगा और उसका ध्यान रखूंगा. मैं बढ़ते हुए सनोवर पेड़ के समान हूं; तुम्हारा फलवंत होना मेरे कारण होता है.”

  20. बुद्धिमान कौन है? उन्हें इन बातों का अनुभव करने दो. समझदार कौन है? उन्हें समझने दो. याहवेह के रास्ते सही हैं; धर्मी उन पर चलते हैं, परंतु विद्रोही उन पर ठोकर खाकर गिरते हैं.

  21. याहवेह का वह वचन जो पथूएल के पुत्र योएल के पास आया.

  22. मेरे देश पर एक-एक जाति ने आक्रमण कर दिया है, वह एक शक्तिशाली सेना है और उनकी संख्या अनगिनत है; उसके दांत सिंह के दांत के समान, और उसकी दाढ़ें सिंहनी की दाढ़ के समान हैं.

  23. उसने मेरी अंगूर की लताओं को उजाड़ दिया है और मेरे अंजीर के पेड़ों को नष्ट कर दिया है. उसने उनकी छाल को छील दिया है, और उनकी शाखाओं को सफेद छोड़कर उनकी छाल को फेंक दिया है.

  24. याहवेह के भवन में अब न तो अन्‍नबलि और न ही पेय बलि चढ़ाई जाती है. याहवेह की सेवा करनेवाले पुरोहित विलाप कर रहे हैं.

  25. हे पुरोहितो, शोक-वस्त्र पहनकर विलाप करो; तुम जो वेदी पर सेवा करते हो, विलाप करो. तुम जो मेरे परमेश्वर की सेवा करते हो, आओ, और शोक-वस्त्र पहनकर रात बिताओ; क्योंकि तुम्हारे परमेश्वर के भवन में अन्‍नबलि और पेय बलि चढ़ाना बंद कर दिया गया है.