Skip to content

Salt के बारे में बाइबल के वचन

32 वचन · 29 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. ये सभी एक साथ होकर सिद्दिम घाटी (अर्थात् लवण-सागर) के पास इकट्‍ठे हो गए.

  2. परंतु लोत के पत्नी ने मुड़कर पीछे देखा और परिणामस्वरूप वह नमक का खंभा बन गई.

  3. तुम अपनी सब अन्‍न बलियों में नमक चढ़ाना. तुम्हारी अन्‍नबलि से तुम्हारे परमेश्वर की वाचा का नमक अलग न रहे, अपनी सब बलियों के साथ तुम नमक भेंट करना.

  4. वे सभी पवित्र भेंटें, जो इस्राएली याहवेह को चढ़ाते हैं, मैंने तुम्हारे लिए एवं तुम्हारे पुत्र-पुत्रियों के लिए हमेशा का अंश ठहरा दिया है. यह तुम्हारे तथा तुम्हारे साथ तुम्हारे वंशजों की याहवेह के सामने हमेशा की नमक की वाचा होगी.”

  5. फिर सीमा यरदन की दिशा में जाएगी और लवण-सागर पर जा समाप्‍त हो जाएगी. “ ‘यही होगी हर एक दिशा से सीमाओं के अनुसार तुम्हें दिया गया वह देश.’ ”

  6. इसके अलावा अराबाह भी, जिसकी सीमा यरदन हो गई, किन्‍नेरेथ से लेकर अराबाह सागर तक, लवण-सागर, जिसके पूर्व में पिसगाह की ढलान की तलहटी है.

  7. ऊपर से आ रहा जल बहना रुक गया, और दीवार सा ऊंचा उठ गया. यह आदम नामक नगर था, जो ज़ारेथान के पास है. इससे अराबाह सागर, जो लवण-सागर की ओर जाता है, वहां का जल पूरा सूख गया. और इस्राएली येरीख़ो की ओर पार हो गए.

  8. और याहवेह ने उन्हें इस्राएल के अधीन कर दिया. इस्राएली बृहत्-सीदोन से मिसरेफोत-मयिम तक तथा पूर्व में मिज़पाह घाटी तक उनका पीछा करते चले गए. उन्होंने उनको ऐसा मारा, कि उनमें से एक भी योद्धा जीवित न रहा.

  9. उसका शासन पूर्व अराबाह प्रदेश जो किन्‍नेरेथ झील से अराबाह सागर तक, और पूर्व में बेथ-यशिमोथ तक तथा, दक्षिण में पिसगाह की ढलानों की तराई तक फैला था.

  10. उनकी दक्षिण सीमा लवण-सागर के दक्षिण छोर से, उस खाड़ी से, जो दक्षिण की ओर मुड़ती है;

  11. निबशान, लवण का नगर तथा एन-गेदी; इनके गांवों सहित छः नगर जो.

  12. अबीमेलेक दिन भर शेकेम से युद्ध करता रहा. उसने शेकेम पर अधिकार कर लिया, और सभी नगरवासियों को मार दिया. उसने नगर को पूरी तरह से गिराकर नगर क्षेत्र में नमक बिखेर दिया.

  13. नमक की घाटी में 18,000 एदोमियों का संहार कर लौटने पर दावीद ने अपनी कीर्ति व्यापक कर ली.

  14. एलीशा ने आदेश दिया, “एक नए बर्तन में नमक डालकर मेरे पास ले आओ.”

  15. एलीशा झरने के निकट गए, नमक उसमें डाल दिया और यह घोषित किया, “यह याहवेह द्वारा भेजा हुआ संदेश है, ‘मैंने इस जल को ठीक कर दिया है. इसके बाद इस जल से न तो किसी की मृत्यु होगी, और न किसी का गर्भपात.’ ”

  16. उसने नमक की घाटी में दस हज़ार एदोमियों को मार गिराया. भयंकर युद्ध के द्वारा उसने सेला नगर अपना लिया, और उसे एक नया नाम दिया: योकथएल, जो आज तक प्रचलित है.

  17. इसके अलावा ज़ेरुइयाह के पुत्र अबीशाई ने नमक की घाटी में 18,000 सैनिकों की एदोमी सेना को हराया.

  18. क्या तुम्हें यह मालूम नहीं कि याहवेह इस्राएल के परमेश्वर ने नमक की वाचा के द्वारा दावीद और उनके पुत्रों को इस्राएल पर हमेशा के लिए शासन दिया है?

  19. इसलिये कि हम राजमंदिर में काम करते हैं, हम महाराज को अपमानित होते हुए नहीं देख सकते, सो हम महाराज को इसकी ख़बर दे रहे हैं,

  20. उनकी गेहूं, नमक, दाखमधु और तेल की आवश्यकता चाहे जितनी भी हो, स्वर्ग के परमेश्वर के लिए होमबलि अर्पण के निमित्त बछड़े, मेढ़े, मेमने, गेहूं, लवण, द्राक्षारस तथा अभिषेक का तेल जैसा कि येरूशलेम के पुरोहितों का आग्रह है, उन्हें प्रतिदिन बिना चूक प्रदान किया जाता रहे.

  21. यहां तक, यदि वह एक सौ तालन्त चांदी, एक सौ कोर गेहूं, एक सौ बाथ दाखरस, एक सौ बाथ तेल, तथा नमक आवश्यकतानुसार.

  22. क्या किसी स्वादरहित वस्तु का सेवन नमक के बिना संभव है? क्या अंडे की सफेदी में कोई भी स्वाद होता है?

  23. क्योंकि वह उस झाड़ी के सदृश है, जो मरुभूमि में उगी हुई है. समृद्धि उससे दूर ही रहेगी. वह निर्जन प्रदेश की गर्मी से झुलसने वाली भूमि में निवास करेगा. उस भूमि की मिट्टी लवणमय है, वहां किसी भी मनुष्य का निवास नहीं है.

  24. तुम्हारे जन्म के समय न तो तुम्हारी नाभिनाड़ी काटी गई, और न ही तुम्हें पानी से नहलाकर साफ किया गया, न तो तुम्हें नमक से रगड़ा गया था, और न ही तुम्हें कपड़ों में लपेटा गया था.

  25. तुम उन्हें याहवेह के सामने अर्पण करना, और पुरोहित उन पर नमक छिड़कें और उन्हें होमबलिदान के रूप में याहवेह को चढ़ाएं.