मुख्य सामग्री पर जाएँ

circa 1010–970 BC

The Reign of David

David unites the tribes, conquers Jerusalem, and establishes Israel's golden age—even through deep personal failure.

1,230 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. दावीद जब वहां से ज़िकलाग को गए, मनश्शेहवासी अदनाह, योज़ाबाद, येदिआएल, मिखाएल, योज़ाबाद, एलिहू और ज़िल्लेथाइ दावीद की ओर आ गए थे. ये सभी हज़ारों के मुखिया मनश्शेह प्रदेश के थे.

  2. इन सभी ने छापामारों से दावीद को सुरक्षा दिलाई थी, क्योंकि ये सभी बहुत ही वीर और सेना के प्रधान भी थे.

  3. लोगों का दावीद के पास आने का काम चलता रहा और देखते ही देखते परमेश्वर की सेना के समान एक बड़ी सेना तैयार हो गई.

  4. 1 इतिहास १२:२३लगभग १०४८ ई.पू.

    हज़ारों सेना की टुकड़ियों की गिनती इस प्रकार है. ये सब दावीद के पास हेब्रोन में आए थे, कि उन्हें शाऊल का शासन सौंप दें, जैसी कि याहवेह का कहा गया वचन था:

  5. 1 इतिहास १२:२४लगभग १०४८ ई.पू.

    ढाल और भालाधारी यहूदिया के हज़ार सैनिकों की गिनती 6,800 थी;

  6. 1 इतिहास १२:२५लगभग १०४८ ई.पू.

    शिमओन से वीर योद्धा 7,100;

  7. 1 इतिहास १२:२६लगभग १०४८ ई.पू.

    लेवी से 4,600,

  8. 1 इतिहास १२:२७लगभग १०४८ ई.पू.

    अहरोन से शासक यहोयादा और उसके साथ 3,700 सैनिक.

  9. 1 इतिहास १२:२८लगभग १०४८ ई.पू.

    सादोक एक वीर योद्धा था, उसी के परिवार से बाईस सेनापति पैदा हुए थे.

  10. 1 इतिहास १२:२९लगभग १०४८ ई.पू.

    इस समय तक बिन्यामिन से, शाऊल के संबंधी 3,000 थे, क्योंकि अब तक शाऊल के प्रति विश्वासयोग्य थे;

  11. 1 इतिहास १२:३०लगभग १०४८ ई.पू.

    एफ्राईम से अपने पिता के वंश से प्रख्यात योद्धा 20,800;

  12. 1 इतिहास १२:३१लगभग १०४८ ई.पू.

    मनश्शेह के आधे गोत्र से 18,000; इन्हें साफ़-साफ़ कह दिया गया था कि वे आकर दावीद का राजाभिषेक करें.

  13. 1 इतिहास १२:३२लगभग १०४८ ई.पू.

    इस्साखार से 200 प्रधान थे, जिनके सभी संबंधियों पर उनका अधिकार था;

  14. 1 इतिहास १२:३३लगभग १०४८ ई.पू.

    ये वे थे, जिन्हें यह अहसास था कि इस्राएल के लिए कब क्या करना सबसे सही होगा. ज़ेबुलून से 50,000 वीर योद्धा थे; इनके पास युद्ध के सभी प्रकार के हथियार थे. ये दावीद के प्रति पूरी तरह समर्पित थे, वे चंचल न थे.

  15. 1 इतिहास १२:३४लगभग १०४८ ई.पू.

    नफताली से 37,000 सैनिक थे, जिन पर 1,000 सेनापति थे;

  16. 1 इतिहास १२:३५लगभग १०४८ ई.पू.

    लड़ाई के लिए तैयार दान गोत्र से 28,600;

  17. 1 इतिहास १२:३६लगभग १०४८ ई.पू.

    आशेर गोत्र से 40,000 युद्ध के लिए तैयार अनुभवी सैनिक;

  18. 1 इतिहास १२:३७लगभग १०४८ ई.पू.

    यरदन नदी के दूसरी ओर से, रियूबेन के गोत्र, गाद के गोत्र और मनश्शेह के आधे गोत्र से और गाद वंश गोत्र को दी गई भूमि के भाग से 1,20,000 सैनिक, जो युद्ध के लिए सभी प्रकार के हथियारों से सजे थे.

  19. 1 इतिहास १२:३८लगभग १०४८ ई.पू.

    ये सभी, जो वीर योद्धा थे, जो युद्ध व्यूह बनाने में निपुण थे. दावीद को पूरे इस्राएल पर राजा बनाने की मंशा को लेकर हेब्रोन आए और सारा इस्राएल भी चाहते थे की दावीद अपना राजा बनें.

  20. 1 इतिहास १२:३९लगभग १०४८ ई.पू.

    वहां वे दावीद के साथ तीन दिन रहे. वहां उनकी भोजन की पूरी व्यवस्था थी क्योंकि यह प्रबंध उनके लिए उनके भाइयों द्वारा किया गया था.

  21. 1 इतिहास १२:४०लगभग १०४८ ई.पू.

    इनके अलावा दूर-दूर से उनके संबंधी—इस्साखार, ज़ेबुलून और नफताली प्रदेशों से अपने गधों, ऊंटों, खच्चरों और बैलों पर लादकर भोजन सामग्री, बड़ी मात्रा में आटे से बने भोजन पदार्थ, अंजीर की टिक्कियां, किशमिश के गुच्छे, अंगूर का रस, तेल ले आए, साथ ही बैल और भेड़ें भी, क्योंकि इस्राएल में आनंद छा चुका था.

  22. दावीद ने सहस्र पतियों, शतपतियों और हर एक शासक से विचार-विमर्श किया.

  23. दावीद ने सारी इस्राएली सभा को कहा, “यदि यह आपको सही लगे, यदि यह याहवेह, हमारे परमेश्वर की ओर से है, हम हमेशा अपने देशवासियों के लिए, जो सारे इस्राएल में बचे रह गए हैं, उन पुरोहितों और लेवियों को, जो उनके साथ ऐसे नगरों में हैं, जिनमें चरागाह हैं यह संदेश भेजें, कि वे आकर हमसे मिलें.

  24. तब हम अपने परमेश्वर के संदूक को यहां ले आएं, क्योंकि शाऊल के शासनकाल में हम परमेश्वर के संदूक से दूर रहे हैं.”

  25. सारी सभा ऐसा करने के लिए राज़ी हो गई, क्योंकि यह बात सभी की नज़रों में सही थी.