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Idolatry के बारे में बाइबल के वचन

447 वचन · 205 पहलू

प्रमुख बाइबल वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. अब वे और अधिक पाप करते हैं; वे अपनी चांदी से स्वयं के लिये मूर्तियां बनाते हैं, जिनमें बुद्धिमानी से कारीगरी की गई है, और ये सब शिल्पकारों का काम है. इन लोगों के बारे में कहा जाता है, “वे मानव बलि चढ़ाते हैं! वे बछड़े की मूर्तियों को चूमते हैं!”

  2. इसलिये वे सुबह के कोहरे, सुबह के ओस के समान हैं जो गायब हो जाती है, वे खलिहान की भूसी के समान हैं जो घूमते हुए उड़ जाती है, या वे खिड़की से बाहर आते धुएं के समान हैं.

  3. “परंतु मैं तब से याहवेह तुम्हारा परमेश्वर हूं, जब से तुम मिस्र देश से निकलकर आये. तुम मेरे सिवाय किसी और को परमेश्वर करके न मानना, मेरे अलावा कोई और उद्धारकर्ता नहीं है.

  4. “जाओ और बेथेल में अपराध करो; गिलगाल में जाकर और ज्यादा अपराध करो. प्रातःकाल अपनी भेंट बलि लेकर आया करो, और हर तीसरे साल अपना दशमांश लाओ.

  5. खमीर युक्त रोटी को धन्यवाद बलि के रूप में जलाओ अपने स्वेच्छा बलियों के बारे में डींग मारो— हे इस्राएलियो, उनके बारे में घमंड करो, क्योंकि ऐसा करना तुम्हें अच्छा लगता है,” प्रभु याहवेह की यह घोषणा है.

  6. यहूदिया के राजा योथाम, आहाज़ तथा हिज़किय्याह के शासनकाल में मोरेशेथवासी मीकाह के पास याहवेह का यह वचन पहुंचा, जिसे उसने शमरिया और येरूशलेम के बारे में दर्शन में देखा.

  7. हे लोगों, तुम सब सुनो, पृथ्वी और इसके सभी निवासियों, इस पर ध्यान दो, कि प्रभु अपने पवित्र मंदिर से, परम याहवेह तुम्हारे विरुद्ध गवाही दें.

  8. देखो! याहवेह अपने निवास से निकलकर आ रहे हैं; वे नीचे उतरकर पृथ्वी के ऊंचे स्थानों को रौंदते हैं.

  9. उनके पैरों के नीचे पर्वत पिघल जाते हैं और जैसे आग के आगे मोम, और जैसे ढलान से गिरता पानी, वैसे ही घाटियां तड़क कर फट जाती हैं.

  10. यह सब याकोब के अपराध, और इस्राएल के लोगों के पाप का परिणाम है. याकोब का अपराध क्या है? क्या शमरिया नहीं? यहूदिया का ऊंचा स्थान (देवताओं के पूजा-स्थल) क्या है? क्या येरूशलेम नहीं?

  11. “इसलिये मैं शमरिया को मैदान में खंडहर के ढेर सा कर दूंगा, एक ऐसी जगह जहां अंगूर की बारी लगाई जाती है. मैं उसके पत्थरों को नीचे घाटी में लुढ़का दूंगा और उसकी नीवें खुली कर दूंगा.

  12. उसकी सब मूर्तियां टुकड़े-टुकड़े कर दी जाएंगी; उसके मंदिर के सब भेटों को आग में जला दिया जाएगा; मैं उसकी सब मूर्तियों को नष्ट कर दूंगा. क्योंकि उसने अपनी भेटों को वेश्यावृत्ति करके प्राप्‍त किया है, और वेश्यावृत्ति के मजदूरी के रूप में वे फिर उपयोग में लाई जाएंगी.”

  13. इसलिये मैं रोऊंगा और विलाप करूंगा; मैं खाली पैर और नंगा चला फिरा करूंगा. मैं सियार के समान चिल्लाऊंगा और उल्लू की तरह कराहूंगा.

  14. क्योंकि शमरिया का घाव असाध्य है; यह यहूदिया में फैल गया है. यह मेरी प्रजा के द्वार तक, और तो और यह येरूशलेम तक पहुंच गया है.

  15. मैं तुम्हारे बीच जादू-टोने को समाप्‍त कर दूंगा और तुम फिर कभी ज्योतिष की बात न कर सकोगे.

  16. मैं तुम्हारे मूर्तियों और तुम्हारे बीच तुम्हारे पवित्र पत्थरों को नाश कर दूंगा; तुम फिर कभी अपने हाथ से बनाये चीज़ों की आराधना नहीं करोगे.

  17. जब मैं तुम्हारे शहरों का विनाश करूंगा तो मैं तुम्हारे बीच से तुम्हारे अशेरा-स्तम्भों को उखाड़ फेंकूंगा.

  18. “एक मूर्तिकार के द्वारा बनाई गई मूर्ति का क्या मूल्य? या उस मूर्ति से क्या लाभ जो झूठ बोलना सिखाती है? क्योंकि जो इसे बनाता है वह अपनी ही रचना पर भरोसा करता है; वह मूर्तियों को बनाता है जो बोल नहीं सकती.

  19. उस पर हाय, जो लकड़ी से कहता है, ‘ज़िंदा हो जा!’ या निर्जीव पत्थर से कहता है, ‘उठ!’ क्या यह सिखा सकता है? यह सोना-चांदी से मढ़ा होता है; किंतु उनमें तो श्वास नहीं होता.”

  20. यहूदाह ने विश्वासघात किया है. इस्राएल तथा येरूशलेम में एक घृणित काम किया गया है: यहूदाह ने उन स्त्रियों से विवाह किया है, जो दूसरे देवताओं की आराधना करती हैं और ऐसा करके उसने याहवेह के उस पवित्र स्थान को अपवित्र किया है जिससे याहवेह प्रेम करता है.

  21. जो भी व्यक्ति ऐसा करता है, वह कोई भी क्यों न हो, उसे याहवेह याकोब के तंबुओं से निकाल दे—भले ही वह व्यक्ति सर्वशक्तिमान याहवेह को चढ़ाने के लिये एक बलिदान लाए.

  22. दूसरा काम तुम यह करते हो: तुम रोते हुए याहवेह की वेदी को अपने आंसुओं से भिगो देते हो. तुम रोते और विलाप करते हो क्योंकि अब याहवेह तुम्हारी भेंटों पर कृपादृष्टि नहीं करते या खुश होकर उन्हें तुम्हारे हाथों ग्रहण नहीं करते.

  23. “मैं ये सब तुम्हें दे दूंगा यदि तुम मेरी दंडवत-वंदना करो.”

  24. इस पर येशु ने उसे उत्तर दिया, “हट, शैतान! दूर हो! क्योंकि लिखा है, तुम सिर्फ प्रभु अपने परमेश्वर की ही आराधना और सेवा किया करो.”

  25. “हमारे पूर्वज उनके आज्ञापालन के इच्छुक नहीं थे. वे मन ही मन मिस्र देश की कामना करने लगे.