circa 6 BC – AD 30
The Life of Jesus
The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.
इस काल के वचन
- मत्तियाह २४:१३लगभग ३३ ई.
किंतु उद्धार उसी का होगा, जो अंतिम क्षण तक विश्वास में स्थिर रहेगा.
- मत्तियाह २४:१४लगभग ३३ ई.
पूरे जगत में सारे राष्ट्रों के लिए प्रमाण के तौर पर राज्य के विषय में सुसमाचार का प्रचार किया जाएगा और तब जगत का अंत हो जाएगा.
- मत्तियाह २४:१५लगभग ३३ ई.
“इसलिये जब तुम उस विनाशकारी घृणित वस्तु को, जिसकी चर्चा भविष्यवक्ता दानिएल ने की थी, पवित्र स्थान में खड़ा देखो—पाठक ध्यान दे—
- मत्तियाह २४:१६लगभग ३३ ई.
तो वे, जो यहूदिया प्रदेश में हों पर्वतों पर भागकर जाएं,
- मत्तियाह २४:१७लगभग ३३ ई.
वह, जो घर की छत पर हो, घर में से सामान लेने नीचे न आए.
- मत्तियाह २४:१८लगभग ३३ ई.
वह, जो खेत में हो, अपना कपड़ा लेने पीछे न लौटे.
- मत्तियाह २४:१९लगभग ३३ ई.
दयनीय होगी गर्भवती और शिशुओं को दूध पिलाती स्त्रियों की स्थिति!
- मत्तियाह २४:२०लगभग ३३ ई.
प्रार्थनारत रहो, ऐसा न हो कि तुम्हें जाड़े या शब्बाथ पर भागना पड़े
- मत्तियाह २४:२१लगभग ३३ ई.
क्योंकि वह महाक्लेश का समय होगा—ऐसा, जो न तो सृष्टि के प्रारंभ से आज तक देखा गया, न ही इसके बाद दोबारा देखा जाएगा.
- मत्तियाह २४:२२लगभग ३३ ई.
“यदि यह आनेवाले दिन घटाए न जाते, कोई भी जीवित न रहता. कुछ चुने हुए विशेष लोगों के लिए यह अवधि घटा दी जाएगी.
- मत्तियाह २४:२३लगभग ३३ ई.
उस समय यदि कोई आकर तुम्हें सूचित करे, ‘सुनो-सुनो, मसीह यहां हैं!’ या, ‘वह वहां हैं!’ तो विश्वास न करना.
- मत्तियाह २४:२४लगभग ३३ ई.
क्योंकि अनेक झूठे मसीह तथा अनेक झूठे भविष्यवक्ता उठ खड़े होंगे. वे प्रभावशाली चमत्कार चिह्न दिखाएंगे तथा अद्भुत काम करेंगे कि यदि संभव हुआ तो परमेश्वर द्वारा चुने हुओं को भी भटका दें.
- मत्तियाह २४:२५लगभग ३३ ई.
ध्यान दो कि मैंने पहले ही तुम्हें इसकी चेतावनी दे दी है.
- मत्तियाह २४:२६लगभग ३३ ई.
“कि यदि वे तुम्हारे पास आकर यह कहें, ‘देखो, देखो; वह बंजर भूमि में हैं,’ तो उसे देखने चले न जाना; या यदि वे यह कहें, ‘आओ, देखो, वह कोठरी में हैं,’ तो उनका विश्वास न करना.”
- मत्तियाह २४:२७लगभग ३३ ई.
जैसे बिजली पूर्व दिशा से चमकती हुई पश्चिम दिशा तक चली जाती है, ठीक ऐसा ही होगा मनुष्य के पुत्र का आगमन.
- मत्तियाह २४:२८लगभग ३३ ई.
गिद्ध वहीं इकट्ठा होते हैं, जहां शव होता है.
- मत्तियाह २४:२९लगभग ३३ ई.
“उन दिनों के क्लेश के तुरंत बाद “ ‘सूर्य अंधियारा हो जाएगा और चंद्रमा का प्रकाश न रहेगा. आकाश से तारे गिर जाएंगे. आकाश की शक्तियां हिलायी जाएंगी.’
- मत्तियाह २४:३०लगभग ३३ ई.
“तब आकाश में मनुष्य के पुत्र का चिह्न प्रकट होगा. पृथ्वी के सभी गोत्र शोक से भर जाएंगे और वे मनुष्य के पुत्र को आकाश में बादलों पर सामर्थ्य और प्रताप के साथ आता हुआ देखेंगे.
- मत्तियाह २४:३१लगभग ३३ ई.
मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों को तुरही के ऊंचे शब्द के साथ भेजेगा, जो चारों दिशाओं से, आकाश के एक छोर से दूसरे छोर तक जाकर उनके चुने हुओं को इकट्ठा करेंगे.
- मत्तियाह २४:३२लगभग ३३ ई.
“अंजीर के पेड़ से शिक्षा लो: जब उसमें कोंपलें फूटने लगती हैं, पत्तियां निकलने लगती हैं तो तुम जान लेते हो कि गर्मी का समय पास है.
- मत्तियाह २४:३३लगभग ३३ ई.
इसी प्रकार तुम जब भी इन सभी घटनाओं को होते देखो तो समझ लेना कि वह पास हैं—परंतु द्वार पर ही हैं.
- मत्तियाह २४:३४लगभग ३३ ई.
सच्चाई तो यह है कि इन घटनाओं के हुए बिना इस युग का अंत नहीं होगा.
- मत्तियाह २४:३५लगभग ३३ ई.
आकाश तथा पृथ्वी खत्म हो जाएंगे किंतु मेरे कहे हुए शब्द कभी नहीं.
- मत्तियाह २४:३६लगभग ३३ ई.
“वैसे उस दिन तथा उस समय के विषय में किसी को भी मालूम नहीं है—न स्वर्ग के दूतों को और न ही पुत्र को—परंतु मात्र पिता को ही यह मालूम है.
- मत्तियाह २४:३७लगभग ३३ ई.
“ठीक नोहा के दिनों जैसा होगा मनुष्य के पुत्र का आगमन: