circa 6 BC – AD 30
The Life of Jesus
The eternal Son of God enters history: born in Bethlehem, baptized in the Jordan, crucified at Golgotha, raised on the third day.
इस काल के वचन
- मत्तियाह २४:३८लगभग ३३ ई.
जल-बाढ़ के पहले उन दिनों में लोग तब तक खाते-पीते रहे और उनमें विवाह होते रहे जब तक नोहा ने जहाज़ में प्रवेश न किया.
- मत्तियाह २४:३९लगभग ३३ ई.
लोग तब तक कुछ न समझे जब तक बाढ़ ने आकर उन्हें डुबो न दिया. ऐसा ही होगा मनुष्य के पुत्र का आगमन.
- मत्तियाह २४:४०लगभग ३३ ई.
उस समय दो व्यक्ति खेत में कार्य कर रहे होंगे; एक उठा लिया जाएगा, दूसरा रह जाएगा.
- मत्तियाह २४:४१लगभग ३३ ई.
दो स्त्रियां चक्की पर अनाज पीस रही होंगी; एक उठा ली जाएगी, दूसरी रह जाएगी.
- मत्तियाह २४:४२लगभग ३३ ई.
“इसलिये हमेशा सावधान रहो क्योंकि तुम यह नहीं जानते कि तुम्हारे प्रभु का आगमन किस दिन होगा.
- मत्तियाह २४:४३लगभग ३३ ई.
याद रखो कि यदि घर के स्वामी को यह पता हो कि चोर रात में किस समय आएगा तो वह सावधान हो जाएगा तथा घर में सेंध लगने न देगा.
- मत्तियाह २४:४४लगभग ३३ ई.
तुम्हारा भी इसी प्रकार सावधान रहना ज़रूरी है क्योंकि मनुष्य के पुत्र का आगमन ऐसे समय पर होगा जिसकी तुम कल्पना तक नहीं कर सकते.
- मत्तियाह २४:४५लगभग ३३ ई.
“कौन है वह विश्वासयोग्य और समझदार सेवक, जिसे घर का मालिक अपने परिवार की ज़िम्मेदारी सौंप दे कि वह समय के अनुसार सबके लिए भोजन-व्यवस्था करे?
- मत्तियाह २४:४६लगभग ३३ ई.
धन्य है वह सेवक, जिसे घर का स्वामी लौटने पर यही करते हुए पाए.
- मत्तियाह २४:४७लगभग ३३ ई.
सच्चाई तो यह है कि घर का स्वामी उस सेवक के हाथों में अपनी सारी संपत्ति की ज़िम्मेदारी सौंप देगा.
- मत्तियाह २४:४८लगभग ३३ ई.
किंतु यदि वह सेवक बुरा हो और अपने मन में यह विचार करने लगे: ‘स्वामी के लौटने में तो बड़ी देरी हो रही है’
- मत्तियाह २४:४९लगभग ३३ ई.
और वह सहसेवकों के साथ मार-पीट आरंभ कर दे, पियक्कड़ों की संगति में जाकर खाए-पिए और
- मत्तियाह २४:५०लगभग ३३ ई.
उसका स्वामी एक ऐसे दिन लौटेगा, जिसकी उसने कल्पना ही न की थी और एक ऐसे क्षण में, जिसके विषय में उसे मालूम ही न था,
- मत्तियाह २४:५१लगभग ३३ ई.
तो स्वामी उसके टुकड़े-टुकड़े कर उसकी गिनती कपट करनेवालों में कर देगा जहां हमेशा रोना तथा दांत पीसना होता रहेगा.
- मत्तियाह २५:१लगभग ३३ ई.
“स्वर्ग-राज्य उस द्वारचार के समान है जिसमें दस कुंवारी युवतियां अपने-अपने दीप लेकर द्वारचार के लिए निकलीं.
- मत्तियाह २५:२लगभग ३३ ई.
उनमें से पांच तो मूर्ख थी तथा पांच समझदार.
- मत्तियाह २५:३लगभग ३३ ई.
मूर्ख युवतियों ने अपने साथ अपने दीप तो लिए किंतु तेल नहीं;
- मत्तियाह २५:४लगभग ३३ ई.
परंतु समझदार युवतियों ने अपने दीपों के साथ तेल के बर्तन भी रख लिए.
- मत्तियाह २५:५लगभग ३३ ई.
वर के पहुंचने में देर होने के कारण उन्हें नींद आने लगी और वे सो गई.
- मत्तियाह २५:६लगभग ३३ ई.
“आधी रात को यह धूमधाम का शब्द सुनाई दिया: ‘वर पहुंच रहा है! उससे भेंट के लिए बाहर आ जाओ.’
- मत्तियाह २५:७लगभग ३३ ई.
“सभी युवतियां उठीं और अपने-अपने दीप तैयार करने लगीं.
- मत्तियाह २५:८लगभग ३३ ई.
मूर्ख युवतियों ने समझदार युवतियों से विनती की, ‘अपने तेल में से कुछ हमें भी दे दो—हमारे दीप बुझे जा रहे हैं.’
- मत्तियाह २५:९लगभग ३३ ई.
“किंतु समझदार युवतियों ने उन्हें उत्तर दिया, ‘हमारे और तुम्हारे दोनों के लिए तो तेल पूरा नहीं होगा. भला तो यह होगा कि तुम जाकर व्यापारियों से अपने लिए तेल मोल ले लो.’
- मत्तियाह २५:१०लगभग ३३ ई.
“जब वे तेल लेने जा ही रही थी कि वर आ पहुंचा और वे युवतियां, जो तैयार थी, वर के साथ विवाह के भवन में चली गईं और द्वार बंद कर दिया गया.
- मत्तियाह २५:११लगभग ३३ ई.
“कुछ समय बाद वे अन्य युवतियां भी आ गईं और विनती करने लगीं, ‘श्रीमान! हमारे लिए द्वार खोल दीजिए.’