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circa 1446 BC

Sinai & The Law

God meets Israel at Mount Sinai, reveals the Ten Commandments, and establishes the Tabernacle and the priestly covenant.

1,657 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. लेवी १४:३७लगभग १४९० ई.पू.

    वह उस चिन्ह की जांच करे और यदि घर की दीवारों पर यह चिन्ह हरी अथवा लाल सतह से नीचे दबी हुई प्रतीत हो,

  2. लेवी १४:३८लगभग १४९० ई.पू.

    तो पुरोहित उस घर से बाहर निकलकर प्रवेश द्वार पर आकर उस घर को सात दिन के लिए उसे बंद कर दे.

  3. लेवी १४:३९लगभग १४९० ई.पू.

    सातवें दिन पुरोहित उसको दोबारा जांचे. यदि वास्तव में वह चिन्ह घर की दीवारों में फैल गया है,

  4. लेवी १४:४०लगभग १४९० ई.पू.

    तो पुरोहित उन्हें यह आदेश दे कि वे उन चिन्हयुक्त पत्थरों को निकालकर नगर से बाहर कूड़े के ढेर पर फेंक दें.

  5. लेवी १४:४१लगभग १४९० ई.पू.

    इसके बाद पुरोहित उस संपूर्ण घर को भीतर से खुरचवा दे और वे उस खुरचन को नगर के बाहर अशुद्ध स्थान पर फेंक दें.

  6. लेवी १४:४२लगभग १४९० ई.पू.

    फिर वे दूसरे पत्थर लेकर उन्हें निकाले गए पत्थरों के स्थान पर लगा दें और गारा लेकर उस आवास की पुनः लीपाई-पोताई कर दें.

  7. लेवी १४:४३लगभग १४९० ई.पू.

    “किंतु यदि उसके द्वारा पत्थरों को निकालवाए जाने, घर को खुरचे जाने तथा पुनः पलस्तर लीपे पोते जाने के बाद उस घर में वह फफूंदी फूट पड़ती है,

  8. लेवी १४:४४लगभग १४९० ई.पू.

    तो पुरोहित उसमें प्रवेश कर उसकी जांच करे. यदि उसे यह प्रतीत होता है कि वास्तव में वह चिन्ह आवास में फैल गया है, तो यह उस आवास में एक असाध्य रोग है; यह अशुद्ध है.

  9. लेवी १४:४५लगभग १४९० ई.पू.

    इसलिये उस आवास को ढाह दिया जाए, वह उसके पत्थर, लकड़ी और संपूर्ण पलस्तर को नगर के बाहर अशुद्ध स्थान पर ले जाए.

  10. लेवी १४:४६लगभग १४९० ई.पू.

    “इसके अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति उस समय में उस घर में प्रवेश कर ले, जिसे पुरोहित ने बंद कर दिया था, तो वह व्यक्ति शाम तक अशुद्ध रहेगा.

  11. लेवी १४:४७लगभग १४९० ई.पू.

    इसी प्रकार जो कोई व्यक्ति उस घर में विश्राम करता है, या भोजन कर लेता है, वह भी अपने वस्त्रों को शुद्ध करे.

  12. लेवी १४:४८लगभग १४९० ई.पू.

    “यदि इसके विपरीत, पुरोहित उस आवास में प्रवेश कर निरीक्षण करे, और यह पाए कि उस घर की पुनः पलस्तर करने के बाद वह फफूंदी वास्तव में नहीं फैली है, तो पुरोहित उस आवास को शुद्ध घोषित कर दे, क्योंकि यह रोग उसमें पुनः प्रकट नहीं हुआ है.

  13. लेवी १४:४९लगभग १४९० ई.पू.

    तब पुरोहित उस आवास को शुद्ध करने के लिए दो पक्षी, देवदार की लकड़ी, जूफ़ा और लाल डोरी लेकर,

  14. लेवी १४:५०लगभग १४९० ई.पू.

    एक पक्षी को बहते हुए जल पर मिट्टी के एक पात्र में बलि करे.

  15. लेवी १४:५१लगभग १४९० ई.पू.

    इसके बाद वह उस जीवित पक्षी के साथ देवदार की लकड़ी, जूफ़ा और लाल डोरी को उस बलि किए हुए पक्षी के रक्त तथा बहते हुए जल में डुबाकर उस घर पर सात बार छिड़के.

  16. लेवी १४:५२लगभग १४९० ई.पू.

    इस प्रकार वह उस घर का शुद्धीकरण उस पक्षी के लहू तथा बहते हुए जल के साथ साथ देवदार की लकड़ी, जूफ़ा तथा लाल डोरी के साथ करे.

  17. लेवी १४:५३लगभग १४९० ई.पू.

    फिर वह उस जीवित पक्षी को नगर के बाहर खुले मैदान में छोड़ दे. इस प्रकार वह उस घर के लिए प्रायश्चित पूरा करे और वह आवास शुद्ध हो जाएगा.”

  18. लेवी १४:५४लगभग १४९० ई.पू.

    किसी भी प्रकार के कोढ़ के रोग के लिए यही विधि है; सेहुंआ के लिए,

  19. लेवी १४:५५लगभग १४९० ई.पू.

    कोढ़ से संक्रमित वस्त्र अथवा घर के लिए,

  20. लेवी १४:५६लगभग १४९० ई.पू.

    सूजन के लिए, पपड़ी के लिए अथवा किसी भी प्रकार के चमकदार धब्बे के लिए;

  21. लेवी १४:५७लगभग १४९० ई.पू.

    उन पर यह प्रकट हो जाए कि क्या अशुद्ध है अथवा क्या शुद्ध. कोढ़ रोग के लिए यही विधि है.

  22. लेवी १५:१लगभग १४९० ई.पू.

    याहवेह ने मोशेह और अहरोन को ये आदेश दिए:

  23. लेवी १५:२लगभग १४९० ई.पू.

    “इस्राएल वंशजों को यह आदेश दो, ‘यदि किसी व्यक्ति की देह से कोई स्राव हो रहा हो, वह स्राव अशुद्ध है.

  24. लेवी १५:३लगभग १४९० ई.पू.

    यह उसकी अशुद्धता ही मानी जाएगी, चाहे उसकी देह से स्राव हो रहा हो, अथवा स्राव रुक गया हो.

  25. लेवी १५:४लगभग १४९० ई.पू.

    “ ‘स्रावग्रस्त व्यक्ति जिस बिछौने पर विश्राम करता है, वह बिछौना अशुद्ध हो जाता है, और हर एक वस्तु जिस पर वह बैठ जाता है, वह भी अशुद्ध हो जाती है.