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circa 1446–1406 BC

The Wilderness Years

Forty years of wandering in the desert test Israel's faith and prepare a new generation to enter the promised land.

2,247 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. व्यवस्था ५:२लगभग १४५१ ई.पू.

    होरेब पर्वत पर याहवेह, हमारे परमेश्वर ने हमसे वाचा बांधी थी.

  2. व्यवस्था ५:३लगभग १४५१ ई.पू.

    यह वाचा याहवेह ने हमारे पूर्वज से नहीं, बल्कि हम सभी के साथ, जो आज यहां जीवित हैं, बांधी है.

  3. व्यवस्था ५:४लगभग १४५१ ई.पू.

    उस पर्वत पर याहवेह ने आग में होकर तुमसे आमने-सामने बातें की.

  4. व्यवस्था ५:५लगभग १४५१ ई.पू.

    उस अवसर पर मैं याहवेह और तुम्हारे बीच खड़ा हुआ था. तुम तो निकट आने के विचार से ही डर गए थे, तब मैं तुम्हारे लिए याहवेह की बातों को स्पष्ट करते हुए घोषित करता जा रहा था. आग के भय से तुम ऊपर नहीं जाना चाह रहे थे. याहवेह ने कहा था:

  5. व्यवस्था ५:६लगभग १४५१ ई.पू.

    “मैं ही हूं याहवेह, तुम्हारा परमेश्वर, जिसने तुम्हें मिस्र देश के बंधन से छुड़ाया.

  6. व्यवस्था ५:७लगभग १४५१ ई.पू.

    “मेरे अलावा तुम किसी दूसरे को ईश्वर नहीं मानोगे.

  7. व्यवस्था ५:८लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम अपने लिए न तो आकाश की, न पृथ्वी की, और न जल की किसी वस्तु की मूर्ति बनाना.

  8. व्यवस्था ५:९लगभग १४५१ ई.पू.

    न इनमें से किसी को दंडवत करना और न उसकी आराधना करना; मैं, याहवेह, जो तुम्हारा परमेश्वर हूं, जलन रखनेवाला परमेश्वर हूं, जो मुझे अस्वीकार करते हैं, मैं उनके पापों का प्रतिफल उनके बेटों, पोतों और परपोतों तक को दूंगा,

  9. व्यवस्था ५:१०लगभग १४५१ ई.पू.

    किंतु उन हजारों पीढ़ियों पर, जिन्हें मुझसे प्रेम है तथा जो मेरे आदेशों का पालन करते हैं, अपनी करुणा प्रकट करता रहूंगा.

  10. व्यवस्था ५:११लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम याहवेह, अपने परमेश्वर के नाम का गलत इस्तेमाल नहीं करोगे, क्योंकि याहवेह उस व्यक्ति को बिना दंड दिए नहीं छोड़ेंगे, जो याहवेह का नाम व्यर्थ में लेता है.

  11. व्यवस्था ५:१२लगभग १४५१ ई.पू.

    शब्बाथ को पवित्र दिन के रूप में मानना, जैसा कि याहवेह, तुम्हारे परमेश्वर का आदेश है.

  12. व्यवस्था ५:१३लगभग १४५१ ई.पू.

    छः दिन मेहनत करते हुए तुम अपने सारे काम पूरे कर लोगे,

  13. व्यवस्था ५:१४लगभग १४५१ ई.पू.

    मगर सातवां दिन याहवेह तुम्हारे परमेश्वर का शब्बाथ है; इस दिन तुम कोई भी काम नहीं करोगे; तुम, तुम्हारे पुत्र-पुत्रियां, तुम्हारे पुरुष अथवा महिला सेवक न तुम्हारे गधे अथवा तुम्हारे सारे पशु अथवा तुम्हारे यहां रहनेवाले विदेशी, कि तुम्हारे सेवक-सेविकाएं भी तुम्हारे समान विश्राम कर सकें.

  14. व्यवस्था ५:१५लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हें याद रखना है कि तुम खुद मिस्र देश में दास थे और याहवेह, तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें वहां से अपनी बलवंत भुजा बढ़ाकर निकाला है; इसलिये याहवेह, तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें आदेश दिया है, कि शब्बाथ दिवस का पालन किया जाए.

  15. व्यवस्था ५:१६लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह, अपने परमेश्वर के आदेश के अनुसार अपने पिता अपनी माता का आदर करना, कि तुम लंबी आयु के हो जाओ और उस देश में तुम्हारा भला हो, जो याहवेह, तुम्हारे परमेश्वर तुम्हें दे रहे हैं.

  16. व्यवस्था ५:१७लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम मानव हत्या नहीं करना.

  17. व्यवस्था ५:१८लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम व्यभिचार नहीं करना.

  18. व्यवस्था ५:१९लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम चोरी नहीं करना.

  19. व्यवस्था ५:२०लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम अपने पड़ोसी के विरुद्ध झूठी गवाही नहीं देना.

  20. व्यवस्था ५:२१लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम अपने पड़ोसी की पत्नी का लालच नहीं करना, और न तुम अपने पड़ोसी के घर का, उसके खेत का, न किसी सेवक, सेविका का; अथवा उसके बैल अथवा गधे का; उसकी किसी भी वस्तु का लालच नहीं करना.”

  21. व्यवस्था ५:२२लगभग १४५१ ई.पू.

    यह सब याहवेह ने उस पर्वत पर आग, बादल और गहरे अंधकार में से ऊंचे शब्द में तुम सभी से, अर्थात् इकट्ठी हुई महासभा से, कहे थे, इसमें उन्होंने और कुछ भी नहीं जोड़ा. इसके बाद उन्होंने यह सब दो पट्टियों पर उकेर कर मुझे दे दिया.

  22. व्यवस्था ५:२३लगभग १४५१ ई.पू.

    और फिर, जब तुमने उस तमस में से वह स्वर सुना, जब वह पर्वत आग में धधक रहा था, तब तुम सभी गोत्रपिता और प्रधान मेरे पास आ गए,

  23. व्यवस्था ५:२४लगभग १४५१ ई.पू.

    और तुमने मुझसे विनती की, “सुनिए, याहवेह, हमारे परमेश्वर ने हम पर अपना तेज, अपनी प्रभुता दिखा दी है, हमने आग के बीच से उनकी आवाज भी सुन ली है; आज हमने साक्षात देख लिया है, कि परमेश्वर मनुष्य से बातचीत करते हैं, फिर भी मनुष्य जीवित रह जाता है.

  24. व्यवस्था ५:२५लगभग १४५१ ई.पू.

    मगर अब, क्या यह ज़रूरी है कि हमारी मृत्यु हो? क्योंकि यह प्रचंड आग हमें चट करने पर है; अब यदि हमें याहवेह, हमारे परमेश्वर का स्वर और अधिक सुनना पड़ जाए, तो हमारी मृत्यु तय है.

  25. व्यवस्था ५:२६लगभग १४५१ ई.पू.

    क्योंकि, क्या यह कभी भी सुना गया है, कि किसी मनुष्य ने उस आग के बीच से जीवित परमेश्वर की आवाज सुनी हो, जिस प्रकार हमने सुनी और जीवित रह गया हो?